सुंदरबन नाव हादसा: 9 मछुआरों के शव मिले, 6 लापता; PM मोदी ने ₹2 लाख मुआवज़े का ऐलान किया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में सुंदरबन के निकट बंगाल की खाड़ी में लापता हुई मछली पकड़ने वाली नाव 'एफबी मां काली' से 9 मछुआरों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि 6 मछुआरे अभी भी लापता हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से देने की घोषणा की है।
हादसे का घटनाक्रम
यह नाव 2 जुलाई को पूर्वी मिदनापुर जिले के शंकरपुर फिशरीज पोर्ट से 15 मछुआरों को लेकर रवाना हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में खराब मौसम के चलते 5 जुलाई के बाद नाव से संपर्क पूरी तरह टूट गया था। इसके बाद से बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा था।
रविवार, 13 जुलाई को पुलिस, वन विभाग और भारतीय तटरक्षक बल के संयुक्त दल ने चुल्काठी जंगल के पास रक्ताचार इलाके में डूबी हुई नाव का पता लगाया। नाव को बाहर निकाल कर तलाशी ली गई तो उसमें से 9 मछुआरों के शव मिले। इससे पहले यह नाव बक्खाली तट से लगभग 35 किलोमीटर दूर पलटी हुई अवस्था में मिली थी, जिसे बाद में सीतारामपुर घाट तक खींचकर लाया गया।
तलाशी अभियान की स्थिति
बरामद शवों को पोस्टमार्टम के लिए काकद्वीप सब-डिविजनल अस्पताल भेजा गया है। सुंदरबन टाइगर रिजर्व के डिप्टी फील्ड डायरेक्टर चित्रक भट्टाचार्य के नेतृत्व में पुलिस, तटरक्षक बल, वन विभाग और मछुआरा संगठनों का संयुक्त अभियान पहले से जारी था। सोमवार को लापता 6 मछुआरों की तलाश के लिए नया संयुक्त अभियान शुरू किया गया। अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में नाव पलटने से हुई जानमाल की हानि अत्यंत पीड़ादायक है। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। ईश्वर करे कि घायल जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं।' उन्होंने PMNRF से प्रत्येक मृतक के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता राशि देने की घोषणा की।
सुंदरबन मामलों के राज्य मंत्री दीपांकर जाना ने नाव को किनारे पर लाए जाने के बाद घटनास्थल का दौरा किया और तलाशी अभियान की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को घटना की पूरी जानकारी दे दी गई है और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार-विमर्श जारी है।
आम जनता और मछुआरा समुदाय पर असर
सुंदरबन क्षेत्र में हज़ारों मछुआरे परिवार अपनी आजीविका के लिए बंगाल की खाड़ी पर निर्भर हैं। यह हादसा ऐसे समय में आया है जब मानसून के दौरान समुद्री मौसम अत्यंत अनिश्चित रहता है और मछुआरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि यह इस क्षेत्र में हाल के वर्षों में नाव हादसों की एक और दुखद कड़ी है।
आगे क्या होगा
लापता 6 मछुआरों की तलाश के लिए बहु-एजेंसी अभियान जारी है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जब तक सभी लापता व्यक्तियों का पता नहीं चल जाता, तब तक अभियान रोका नहीं जाएगा। मृतकों के परिजनों को सरकारी सहायता राशि शीघ्र उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।