महाराष्ट्र: फडणवीस ने ₹44,800 करोड़ के 'अर्बन चैलेंज फंड' का आह्वान किया, 22 शहरी क्षेत्रों पर होगा काम
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 जुलाई 2025 को शहरी विकास विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए 'शहरी चुनौती कोष' (अर्बन चैलेंज फंड) के गठन का आह्वान किया। इस कोष के तहत महाराष्ट्र के लिए ₹44,800 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जो ₹90,000 करोड़ की कुल प्रस्तावित परियोजनाओं का हिस्सा है। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि शहर देश की आर्थिक प्रगति के प्रमुख इंजन हैं और उनके विकास की बाधाओं को योजनाबद्ध तरीके से दूर किया जाना चाहिए।
वित्तीय ढाँचा: तीन स्तरों पर होगी फंडिंग
प्रस्तावित ₹44,800 करोड़ की राशि तीन स्रोतों से जुटाई जाएगी। ₹11,200 करोड़ केंद्र सरकार देगी, ₹11,200 करोड़ राज्य सरकार का योगदान होगा, और शेष ₹22,400 करोड़ बाज़ार-आधारित वित्तीय व्यवस्था — जिसमें नगर निगम बॉन्ड और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) शामिल हैं — के ज़रिए जुटाए जाएंगे। बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि संस्थागत, वित्तीय और प्रशासनिक अड़चनों के कारण कई बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ समय पर पूरी नहीं हो पातीं, और यह कोष उसी समस्या का समाधान करेगा।
22 प्रमुख क्षेत्रों पर होगा फोकस
सरकार के अनुसार, इस अभियान के तहत करीब 22 प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जाएगा। इनमें डिजिटल प्रशासन, जलापूर्ति और स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था, यातायात प्रबंधन, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, 5 से 20 वर्ग किलोमीटर के शहरी क्षेत्रों का पुनर्विकास, बाज़ारों का पुनर्विकास, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए बेहतर सुविधाएँ, ट्रांजिट हब और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) परियोजनाएँ, तथा छोटे-मध्यम शहरों को विकास केंद्र के रूप में तैयार करना शामिल हैं।
नासिक-पुणे की सफलता से मिली प्रेरणा, पिंपरी-नागपुर अगले
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि नासिक और पुणे नगर निगम जलापूर्ति और स्वच्छता परियोजनाओं के लिए बाज़ार से सफलतापूर्वक धन जुटा चुके हैं, और इन योजनाओं को राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) की मंजूरी भी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इसी मॉडल को जल्द ही पिंपरी-चिंचवाड़ और नागपुर नगर निगम की परियोजनाओं तक विस्तारित किया जाएगा।
छठे वित्त आयोग की सिफारिशें: स्थानीय निकायों को मिलेगा अधिक हिस्सा
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब नितिन करीर की अध्यक्षता वाले छठे महाराष्ट्र वित्त आयोग की रिपोर्ट हाल ही में राज्य विधानसभा में पेश की गई है। रिपोर्ट में राज्य के अपने कर राजस्व (SOTR) में से स्थानीय निकायों की हिस्सेदारी 26.3% से बढ़ाकर 27.3% करने की सिफारिश की गई है। इस अतिरिक्त राशि सहित कुल कोष में से 55% शहरी स्थानीय निकायों और 45% ग्रामीण स्थानीय निकायों को दिया जाएगा। इसमें 5% हिस्सा अच्छा प्रदर्शन करने वाले निकायों को प्रोत्साहन अनुदान के रूप में और 5% उन क्षेत्रों पर खर्च होगा जहाँ ग्रामीण इलाके तेज़ी से शहरी रूप ले रहे हैं।
आगे क्या
अर्बन चैलेंज फंड की विस्तृत रूपरेखा और क्रियान्वयन योजना पर काम जारी है। गौरतलब है कि यह पहल वित्तीय विकेंद्रीकरण की दिशा में महाराष्ट्र का एक महत्वपूर्ण कदम है — यदि यह अपने वादों पर खरी उतरती है, तो यह राज्य के शहरी परिदृश्य को दीर्घकाल में बदल सकती है।