सूखा मुक्त महाराष्ट्र: CM फडणवीस ने की जल परियोजनाओं की समीक्षा, केंद्र से ₹6,800 करोड़ की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 27 मई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद घोषणा की कि राज्य सरकार जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) और राज्य स्तरीय जल संरक्षण पहलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। इस बैठक में लंबित जल परियोजनाओं में तेज़ी लाने के लिए महाराष्ट्र को केंद्र से लगभग ₹6,800 करोड़ मिलने की उम्मीद जताई गई है।
बैठक में क्या हुआ
मुख्यमंत्री फडणवीस ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में पीएमकेएसवाई के तहत चल रही सिंचाई परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त निधि का अनुरोध किया गया था और केंद्र सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता का आश्वासन प्राप्त हुआ है। पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य और केंद्रीय अधिकारी पहले ही 90 प्रतिशत योजनाओं की गहन समीक्षा कर चुके हैं।
निधि आवंटन की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री के अनुसार, जिन योजनाओं का कार्य 50 से 75 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है, उनके साथ ही 75 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो चुकी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर निधि आवंटित की जाएगी। पूर्ण हो चुकी जल आपूर्ति योजनाओं का ग्राम, ग्राम पंचायत, तालुका और जिला स्तर पर सटीक सत्यापन किया जाएगा। फडणवीस ने कहा, 'हम पहचानी गई कमियों को दूर कर रहे हैं और उच्च गुणवत्ता वाले कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोतों को मजबूत कर रहे हैं।'
महाराष्ट्र की अनूठी चुनौती
मुख्यमंत्री फडणवीस ने महाराष्ट्र की एक विरोधाभासी स्थिति की ओर ध्यान दिलाया — देश के लगभग 40 प्रतिशत बांध महाराष्ट्र में होने के बावजूद राज्य का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा सूखाग्रस्त है। यह ऐसे समय में आया है जब मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे क्षेत्र वर्षों से जल संकट झेल रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दीर्घकालिक जल संरक्षण और जन भागीदारी ही एकमात्र स्थायी समाधान हैं।
जन भागीदारी और सीएसआर का एकीकरण
राज्य सरकार 'जल तारा' और 'जलयुक्त शिवर' जैसी पहलों को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के साथ एकीकृत करके उनका विस्तार करने की योजना बना रही है। गौरतलब है कि 'जलयुक्त शिवर' योजना पहले भी महाराष्ट्र में जल संरक्षण के लिए चर्चित रही है, और इसे नए सिरे से व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है।
आगे की राह
केंद्र से अपेक्षित ₹6,800 करोड़ की राशि पाइपलाइन और जल अवसंरचना परियोजनाओं में तेज़ी लाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बांध क्षमता और सूखाग्रस्त क्षेत्र के बीच की खाई को पाटने के लिए अंतिम-मील जल वितरण और भूजल पुनर्भरण पर भी समान ध्यान देना होगा। राज्य सरकार का यह कदम 'सूखा मुक्त महाराष्ट्र' के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।