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सूखा मुक्त महाराष्ट्र: CM फडणवीस ने की जल परियोजनाओं की समीक्षा, केंद्र से ₹6,800 करोड़ की उम्मीद

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सूखा मुक्त महाराष्ट्र: CM फडणवीस ने की जल परियोजनाओं की समीक्षा, केंद्र से ₹6,800 करोड़ की उम्मीद

सारांश

देश के 40% बांध होने के बावजूद महाराष्ट्र का 50% हिस्सा सूखाग्रस्त है — यही विरोधाभास CM फडणवीस के दिल्ली दौरे की असली पृष्ठभूमि है। ₹6,800 करोड़ की केंद्रीय सहायता और सीएसआर-मनरेगा एकीकरण के साथ, राज्य इस बार 'सूखा मुक्त' लक्ष्य को ज़मीन पर उतारने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 27 मई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ उच्च स्तरीय बैठक की।
महाराष्ट्र को पाइपलाइन और जल अवसंरचना परियोजनाओं के लिए केंद्र से लगभग ₹6,800 करोड़ मिलने की उम्मीद है।
50 से 75% और 75% से अधिक पूर्ण हो चुकी सिंचाई योजनाओं को निधि आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।
राज्य और केंद्रीय अधिकारी 90% योजनाओं की गहन समीक्षा कर चुके हैं।
देश के 40% बांध महाराष्ट्र में होने के बावजूद राज्य का 50% हिस्सा सूखाग्रस्त है।
'जल तारा' और 'जलयुक्त शिवर' को सीएसआर फंड और मनरेगा के साथ एकीकृत कर विस्तार की योजना।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 27 मई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद घोषणा की कि राज्य सरकार जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) और राज्य स्तरीय जल संरक्षण पहलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। इस बैठक में लंबित जल परियोजनाओं में तेज़ी लाने के लिए महाराष्ट्र को केंद्र से लगभग ₹6,800 करोड़ मिलने की उम्मीद जताई गई है।

बैठक में क्या हुआ

मुख्यमंत्री फडणवीस ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में पीएमकेएसवाई के तहत चल रही सिंचाई परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त निधि का अनुरोध किया गया था और केंद्र सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता का आश्वासन प्राप्त हुआ है। पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य और केंद्रीय अधिकारी पहले ही 90 प्रतिशत योजनाओं की गहन समीक्षा कर चुके हैं।

निधि आवंटन की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री के अनुसार, जिन योजनाओं का कार्य 50 से 75 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है, उनके साथ ही 75 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो चुकी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर निधि आवंटित की जाएगी। पूर्ण हो चुकी जल आपूर्ति योजनाओं का ग्राम, ग्राम पंचायत, तालुका और जिला स्तर पर सटीक सत्यापन किया जाएगा। फडणवीस ने कहा, 'हम पहचानी गई कमियों को दूर कर रहे हैं और उच्च गुणवत्ता वाले कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोतों को मजबूत कर रहे हैं।'

महाराष्ट्र की अनूठी चुनौती

मुख्यमंत्री फडणवीस ने महाराष्ट्र की एक विरोधाभासी स्थिति की ओर ध्यान दिलाया — देश के लगभग 40 प्रतिशत बांध महाराष्ट्र में होने के बावजूद राज्य का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा सूखाग्रस्त है। यह ऐसे समय में आया है जब मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे क्षेत्र वर्षों से जल संकट झेल रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दीर्घकालिक जल संरक्षण और जन भागीदारी ही एकमात्र स्थायी समाधान हैं।

जन भागीदारी और सीएसआर का एकीकरण

राज्य सरकार 'जल तारा' और 'जलयुक्त शिवर' जैसी पहलों को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के साथ एकीकृत करके उनका विस्तार करने की योजना बना रही है। गौरतलब है कि 'जलयुक्त शिवर' योजना पहले भी महाराष्ट्र में जल संरक्षण के लिए चर्चित रही है, और इसे नए सिरे से व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है।

आगे की राह

केंद्र से अपेक्षित ₹6,800 करोड़ की राशि पाइपलाइन और जल अवसंरचना परियोजनाओं में तेज़ी लाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बांध क्षमता और सूखाग्रस्त क्षेत्र के बीच की खाई को पाटने के लिए अंतिम-मील जल वितरण और भूजल पुनर्भरण पर भी समान ध्यान देना होगा। राज्य सरकार का यह कदम 'सूखा मुक्त महाराष्ट्र' के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अंतिम-मील जल वितरण और भूजल प्रबंधन की है — और इस पर बैठक में कोई ठोस रोडमैप सामने नहीं आया। ₹6,800 करोड़ की अपेक्षित राशि और 90% योजनाओं की समीक्षा उत्साहजनक है, लेकिन 'जलयुक्त शिवर' जैसी योजनाएं पहले भी चर्चित रही हैं और उनके दीर्घकालिक प्रभाव पर सवाल उठते रहे हैं। सीएसआर-मनरेगा एकीकरण एक नवाचारी सोच है, पर बिना स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के यह भी कागज़ी लक्ष्य बनकर रह सकती है। असली परीक्षा यह होगी कि ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाने वाला सत्यापन कितना पारदर्शी और जवाबदेह होगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूखा मुक्त महाराष्ट्र अभियान क्या है?
यह महाराष्ट्र सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसके तहत जल जीवन मिशन, पीएमकेएसवाई और राज्य स्तरीय जल संरक्षण योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसका उद्देश्य राज्य के लगभग 50% सूखाग्रस्त भूभाग को दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्रदान करना है।
महाराष्ट्र को केंद्र सरकार से कितनी राशि मिलने की उम्मीद है?
पाइपलाइन और जल अवसंरचना परियोजनाओं में तेज़ी लाने के लिए महाराष्ट्र को केंद्र सरकार से लगभग ₹6,800 करोड़ मिलने की उम्मीद है। CM फडणवीस ने बताया कि केंद्र ने वित्तीय और अवसंरचना संबंधी मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
किन जल परियोजनाओं को पहले निधि मिलेगी?
जिन योजनाओं का कार्य 50 से 75% और 75% से अधिक पूरा हो चुका है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निधि आवंटित की जाएगी। पूर्ण योजनाओं का ग्राम, ग्राम पंचायत, तालुका और जिला स्तर पर सटीक सत्यापन भी किया जाएगा।
महाराष्ट्र में इतने बांध होने के बावजूद सूखा क्यों है?
CM फडणवीस के अनुसार, देश के लगभग 40% बांध महाराष्ट्र में होने के बावजूद राज्य का करीब 50% हिस्सा सूखाग्रस्त है। यह विरोधाभास अंतिम-मील जल वितरण की कमज़ोरी और असमान भौगोलिक जल वितरण को दर्शाता है।
'जलयुक्त शिवर' और 'जल तारा' योजनाओं का विस्तार कैसे होगा?
राज्य सरकार इन दोनों पहलों को सीएसआर फंड और मनरेगा के साथ एकीकृत कर उनका विस्तार करने की योजना बना रही है। इससे जन भागीदारी बढ़ेगी और जल संरक्षण कार्यों को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन मिलेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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