26 जून 2026
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महाराष्ट्र सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए अपने कोष से ₹22,898 करोड़ मंजूर किए, फडणवीस कैबिनेट का बड़ा फैसला

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महाराष्ट्र सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए अपने कोष से ₹22,898 करोड़ मंजूर किए, फडणवीस कैबिनेट का बड़ा फैसला

सारांश

फंड की कमी से अटकी जल जीवन मिशन परियोजनाओं को पटरी पर लाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के अपने कोष से ₹22,898 करोड़ मंजूर किए — केंद्रीय निधि का इंतजार किए बिना। फडणवीस कैबिनेट का यह फैसला ग्रामीण जल आपूर्ति में तेजी लाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में 26 जून 2026 को राज्य कैबिनेट ने ₹22,898 करोड़ के आवंटन को मंजूरी दी।
जल जीवन मिशन के लिए कुल उपलब्ध राशि लगभग ₹44,000 करोड़ होगी — ₹11,000 करोड़ केंद्र से, ₹11,000 करोड़ राज्य का नियमित अंश, और ₹22,898 करोड़ राज्य के अपने कोष से।
सबसे बड़ा हिस्सा ₹10,079.53 करोड़ रेट्रोफिटिंग परियोजनाओं के लिए और ₹8,233.23 करोड़ संशोधित जल आपूर्ति योजनाओं के लिए।
75% से 99% तक पूर्ण परियोजनाओं के लिए ₹5,934 करोड़ और पूर्ण परियोजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए ₹3,769 करोड़ स्वीकृत।
यह निर्णय राज्य की ₹97,706.40 करोड़ की पूरक मांगों के कुछ ही दिन बाद आया है।

महाराष्ट्र सरकार ने जल जीवन मिशन की अटकी परियोजनाओं को गति देने के लिए राज्य के अपने कोष से ₹22,898 करोड़ से अधिक के आवंटन को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में 26 जून 2026 को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा अपेक्षित राज्य के नियमित हिस्से से अलग और अतिरिक्त है।

कुल वित्तीय ढाँचा

अधिकारियों के अनुसार, जल जीवन मिशन के लिए कुल उपलब्ध धनराशि लगभग ₹44,000 करोड़ होगी। इसमें ₹11,000 करोड़ केंद्र सरकार देगी, ₹11,000 करोड़ राज्य का नियमित अंशदान होगा, और शेष ₹22,898 करोड़ राज्य सरकार अपने स्वयं के कोष से वहन करेगी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार ने कुछ ही दिन पहले वित्तीय संकट के बीच ₹97,706.40 करोड़ की पूरक मांगें विधानसभा में प्रस्तुत की थीं।

₹22,898 करोड़ का विभाजन

अधिकारियों के अनुसार, यह राशि कई तकनीकी, संरचनात्मक और सामुदायिक घटकों में वितरित की गई है। सबसे बड़ा हिस्सा — ₹10,079.53 करोड़ — रेट्रोफिटिंग परियोजनाओं के लिए है। इसके बाद ₹8,233.23 करोड़ संशोधित जल आपूर्ति योजनाओं के लिए, ₹2,337.62 करोड़ सामुदायिक योगदान के लिए, और ₹1,138.60 करोड़ जल गुणवत्ता सुधार के लिए आवंटित किए गए हैं।

इसके अलावा, ₹692 करोड़ इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पहलों के लिए, ₹328.63 करोड़ इलेक्ट्रोक्लोरीनेशन इकाइयों (EC) के लिए, और ₹89.04 करोड़ राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) योजनाओं के लिए रखे गए हैं।

लगभग पूर्ण परियोजनाओं को प्राथमिकता

मंत्रिमंडल ने उन योजनाओं को विशेष प्राथमिकता दी है जो भौतिक रूप से पूर्णता के उन्नत चरण में हैं। 75% से 99% तक पूरी हो चुकी योजनाओं के लिए राज्य कोष से ₹5,934 करोड़ उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि इन्हें प्राथमिकता के आधार पर अंतिम रूप दिया जा सके। पूर्ण रूप से तैयार परियोजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए ₹3,769 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

दोनों श्रेणियों की परियोजनाओं के लिए सहायक घटकों और जल गुणवत्ता निगरानी हेतु ₹680 करोड़ अलग से स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, वित्त आयोग के आवंटन और अन्य अनुदानों के माध्यम से पूर्ण परियोजनाओं के लिए ₹543 करोड़ और 75%-99% पूर्ण परियोजनाओं के लिए ₹816 करोड़ का सामुदायिक योगदान भी प्रदान किया जाएगा।

आम जनता पर असर

जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण घरों को नल से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। महाराष्ट्र में फंड की कमी के कारण अनेक गाँवों में यह सुविधा अधर में लटकी हुई थी। इस आवंटन से उन गाँवों को सीधा लाभ मिलेगा जहाँ पाइपलाइन बिछ चुकी है लेकिन जल आपूर्ति अभी शुरू नहीं हुई। गौरतलब है कि केंद्रीय निधि प्राप्त होने से पहले ही राज्य अग्रिम रूप से अपनी निधि जारी करेगा, जो परियोजना कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

आगे की राह

यह निर्णय राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाता है, क्योंकि ₹97,706 करोड़ से अधिक की पूरक मांगों के कुछ ही दिन बाद इतने बड़े आवंटन को मंजूरी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि IoT और इलेक्ट्रोक्लोरीनेशन जैसे तकनीकी घटकों में निवेश दीर्घकालिक जल गुणवत्ता और निगरानी के लिहाज़ से सकारात्मक संकेत है। परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता ही इस फैसले की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

898 करोड़ का यह आवंटन दिखने में साहसी कदम है, लेकिन संदर्भ असहज करने वाला है — राज्य ने कुछ ही दिन पहले ₹97,706 करोड़ की पूरक मांगें पेश की थीं, जो वित्तीय दबाव का संकेत देती हैं। सवाल यह है कि केंद्रीय निधि की प्रतीक्षा किए बिना अग्रिम राज्य व्यय की यह रणनीति टिकाऊ है या नहीं। IoT और इलेक्ट्रोक्लोरीनेशन जैसे घटकों में निवेश तकनीकी दूरदर्शिता दर्शाता है, परंतु अतीत में ऐसी ग्रामीण बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में क्रियान्वयन की धीमी गति और निगरानी की कमी बड़ी चुनौती रही है। असली परीक्षा यह होगी कि 75%-99% पूर्ण परियोजनाएँ वास्तव में कब तक गाँवों तक पानी पहुँचाती हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए कितनी राशि मंजूर की है?
महाराष्ट्र कैबिनेट ने 26 जून 2026 को जल जीवन मिशन परियोजनाओं के लिए राज्य के अपने कोष से ₹22,898 करोड़ के आवंटन को मंजूरी दी है। यह राशि केंद्र और राज्य के नियमित अंशदान से अलग और अतिरिक्त है, जिससे कुल उपलब्ध राशि लगभग ₹44,000 करोड़ हो जाएगी।
यह निर्णय क्यों लिया गया और इससे किसे फायदा होगा?
फंड की कमी के कारण जल जीवन मिशन की कई परियोजनाएँ अधूरी पड़ी थीं, जिससे ग्रामीण घरों को नल से पेयजल नहीं मिल पा रहा था। इस आवंटन से विशेष रूप से उन गाँवों को लाभ मिलेगा जहाँ परियोजनाएँ 75% से अधिक पूर्ण हो चुकी हैं और केवल अंतिम वित्त की आवश्यकता थी।
₹22,898 करोड़ की राशि किन-किन मदों में खर्च होगी?
इस राशि में ₹10,079.53 करोड़ रेट्रोफिटिंग परियोजनाओं के लिए, ₹8,233.23 करोड़ संशोधित जल आपूर्ति योजनाओं के लिए, ₹2,337.62 करोड़ सामुदायिक योगदान के लिए, ₹1,138.60 करोड़ जल गुणवत्ता सुधार के लिए, और शेष राशि IoT पहलों, इलेक्ट्रोक्लोरीनेशन इकाइयों व NRDWP योजनाओं के लिए आवंटित है।
लगभग पूर्ण परियोजनाओं के लिए क्या विशेष प्रावधान किए गए हैं?
75% से 99% तक पूर्ण परियोजनाओं के लिए ₹5,934 करोड़ और पूर्ण रूप से तैयार परियोजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए ₹3,769 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा सहायक घटकों और जल गुणवत्ता निगरानी के लिए ₹680 करोड़ अतिरिक्त दिए जाएंगे।
यह फैसला महाराष्ट्र की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में कितना महत्वपूर्ण है?
यह निर्णय उस समय आया है जब राज्य सरकार ने ₹97,706.40 करोड़ की पूरक मांगें प्रस्तुत की थीं, जो वित्तीय दबाव का संकेत देती हैं। राज्य का केंद्रीय निधि की प्रतीक्षा किए बिना अग्रिम आवंटन करने का निर्णय परियोजनाओं में देरी रोकने की प्राथमिकता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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