महाराष्ट्र की ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाएं होंगी सौर ऊर्जा चालित, CM फडणवीस ने दिए निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार, 12 जून 2026 को निर्देश दिया कि राज्य की समस्त ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को चरणबद्ध रूप से सौर ऊर्जा पर स्थानांतरित किया जाए। यह निर्देश उस गंभीर समस्या की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें राज्यभर की कई जल आपूर्ति योजनाओं पर बिजली बिल बकाया होने के कारण उनके संचालन पर संकट मंडरा रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री ने विभाग को इस संक्रमण के लिए एक व्यापक सौर ऊर्जा नीति तैयार करने का भी आदेश दिया।
सौर ऊर्जा नीति का खाका
फडणवीस ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र ऊर्जा विकास एजेंसी (MEDA) सभी योजनाओं के लिए एकीकृत सौर ऊर्जा नीति तैयार करे। इस नीति में जल स्रोत, लाभार्थियों की संख्या, मोटर पंपों की क्षमता और आवश्यक कुल बिजली इकाइयों जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाना अनिवार्य होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिजली बिल न चुकाए जाने की वजह से राज्य में कोई भी जल आपूर्ति योजना बंद नहीं होनी चाहिए।
गौरतलब है कि जल जीवन मिशन के तहत 11,643 योजनाओं के मूल अनुमानों में सौर प्रणालियाँ पहले ही शामिल की जा चुकी हैं, और राज्यभर में 22,185 जल आपूर्ति योजनाओं के लिए सौर प्रणालियों का प्रस्ताव किया गया है।
55 लीटर प्रतिदिन का मानदंड अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी योजनाओं को केंद्र सरकार के प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पानी उपलब्ध कराने के मानदंड के अनुसार पूरा किया जाए। यह मानक ग्रामीण जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बुनियादी शर्त है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के कई ग्रामीण इलाकों में गर्मियों में जल संकट की स्थिति बनती रही है।
तालुका स्तर पर रखरखाव इकाइयाँ
फडणवीस ने आदेश दिया कि सभी क्षेत्रीय और स्वतंत्र ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं की मरम्मत व रखरखाव के लिए तालुका स्तर पर विशेष इकाइयाँ स्थापित की जाएं, जिनमें ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाए। रखरखाव और मरम्मत का खर्च जल कर संग्रह से पूरा किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में जल कर वसूली कम है, वहाँ स्थानीय स्वशासन संस्थाओं से निधि उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अतिरिक्त, ग्राम सभाओं द्वारा पारित प्रस्तावों के आधार पर तालुका स्तर पर एजेंसियों का एक पैनल तैयार किया जाएगा, जो रखरखाव कार्य संपन्न करेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरम्मत की कमी के कारण कोई योजना ठप न पड़े।
जल स्रोतों की स्थायित्व पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं के लिए जल स्रोत टिकाऊ होने चाहिए। थोड़े-थोड़े अंतराल पर बार-बार नए स्रोत खोजने की प्रवृत्ति से पिछली योजनाओं में किए गए निवेश का महत्व कम होता है। उन्होंने निर्देश दिया कि वीबीजी रामजी योजना के तहत उपलब्ध धनराशि का उपयोग मौजूदा जल स्रोतों को सुदृढ़ करने में किया जाए।
अधूरी योजनाओं को पूरा करने का आदेश
पुनर्स्थापन और पुनः कनेक्शन योजनाओं के संदर्भ में फडणवीस ने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं का 50 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है, उन्हें आवश्यक धनराशि देकर शीघ्र पूर्ण किया जाए। साथ ही, जल जीवन मिशन के तहत 100 प्रतिशत पूर्ण घोषित की जा चुकी योजनाओं का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए। यह कदम योजनाओं की जमीनी हकीकत और कागज़ी आँकड़ों के बीच की खाई को पाटने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।