महाराष्ट्र के किसानों को साल के अंत तक 100% दिन में बिजली: सीएम फडणवीस का विधान परिषद में ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार, 24 जून को महाराष्ट्र विधान परिषद में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य 2025 के अंत तक प्रदेश के समस्त किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। फिलहाल राज्य के लगभग 75 प्रतिशत किसानों को पहले से ही दिन में बिजली मिल रही है, जबकि शेष 25 प्रतिशत को ग्रिड से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
विधायक सदाभाऊ खोत के प्रश्न तथा सदस्यों बच्चू कडू एवं प्रवीण दरेकर के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए फडणवीस ने सदन को आश्वस्त किया कि महाराष्ट्र में बिजली की कोई कमी नहीं है। राज्य के नियमों के अनुसार कृषि पंपों को प्रतिदिन आठ घंटे बिजली प्रदान की जाती है।
मई की शुरुआत में आई अल्पकालिक बिजली कटौती के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ पावर प्लांट में एक साथ तकनीकी खराबी आने से अस्थायी व्यवधान उत्पन्न हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य के किसी भी हिस्से में बिजली कटौती नहीं हो रही है।
सोलर एग्रीकल्चर पंप योजना की उपलब्धियाँ
फडणवीस ने 'सोलर एग्रीकल्चर पंप स्कीम' की सफलता को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछले तीन वर्षों में पूरे महाराष्ट्र में 10 लाख से अधिक सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं और किसानों की ओर से इसे उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।
विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विशेष मॉडल अपनाए हैं। गहरे जल स्रोतों, नदी तटों और बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में मोनोपोल और बूस्टर पंप का उपयोग किया जा रहा है, जबकि नहरों और खुले जलाशयों में 'फ्लोटिंग सोलर पंप स्कीम' प्रभावी रूप से लागू की गई है। 'डार्क जोन' क्षेत्रों में उच्च क्षमता वाले मॉडल और बूस्टर पंप के लिए विशेष सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
बुनियादी ढाँचे में ₹25,000 करोड़ का निवेश
राज्य के वितरण नेटवर्क की कमियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार की 'रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम' (RDSS) के अंतर्गत लगभग ₹25,000 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर कार्य प्रगति पर है। इसमें फीडर पृथक्करण, नए सब-स्टेशनों का निर्माण, अतिरिक्त वितरण ट्रांसफॉर्मर की स्थापना और नेटवर्क का आधुनिकीकरण शामिल है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन सुधारों से अगले तीन वर्षों में ट्रांसफॉर्मर खराबी की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।
2031-32 तक 78,000 मेगावाट का लक्ष्य
राज्य की बढ़ती ऊर्जा माँग को देखते हुए महाराष्ट्र ने वित्त वर्ष 2031-32 तक 78,000 मेगावाट की बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने की योजना तैयार की है। इस क्षमता के कुशल ट्रांसमिशन के लिए टैरिफ-बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (TBCB) फ्रेमवर्क के अंतर्गत ₹16,000 करोड़ का कार्य पहले ही आरंभ हो चुका है। अगले तीन वर्षों में ट्रांसमिशन क्षेत्र में ₹60,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।
मुंबई आइलैंडिंग परियोजना
फडणवीस ने 'मुंबई आइलैंडिंग प्रोजेक्ट' की जानकारी देते हुए बताया कि इसे राज्य की राजधानी के ग्रिड को आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मुख्य ट्रांसमिशन कॉरिडोर पूर्ण हो चुके हैं, जिससे मुंबई में अतिरिक्त 3,000 मेगावाट बिजली की आपूर्ति संभव होगी। यह प्रणाली क्षेत्रीय ग्रिड विफलता की स्थिति में भी मुंबई की निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र में कृषि क्षेत्र की ऊर्जा आवश्यकताएँ और ग्रामीण विद्युतीकरण की गुणवत्ता लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रही हैं। आने वाले महीनों में RDSS परियोजनाओं की प्रगति और सोलर पंप योजना के विस्तार से यह स्पष्ट होगा कि सरकार का यह लक्ष्य समय-सीमा के भीतर पूरा हो पाता है या नहीं।