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महाराष्ट्र के किसानों को साल के अंत तक 100% दिन में बिजली: सीएम फडणवीस का विधान परिषद में ऐलान

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महाराष्ट्र के किसानों को साल के अंत तक 100% दिन में बिजली: सीएम फडणवीस का विधान परिषद में ऐलान

सारांश

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने विधान परिषद में साफ कहा — साल खत्म होने से पहले राज्य का हर किसान दिन में बिजली पाएगा। 10 लाख सोलर पंप, ₹25,000 करोड़ का RDSS निवेश और 2032 तक 78,000 मेगावाट का लक्ष्य — महाराष्ट्र कृषि ऊर्जा की दिशा में बड़ा दांव खेल रहा है।

मुख्य बातें

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने 24 जून को विधान परिषद में घोषणा की कि साल के अंत तक महाराष्ट्र के 100% किसानों को दिन में बिजली मिलेगी।
अभी राज्य के 75% किसानों को दिन में बिजली मिल रही है; शेष 25% को ग्रिड से जोड़ने का काम जारी है।
पिछले तीन वर्षों में 10 लाख से अधिक सोलर एग्रीकल्चर पंप स्थापित किए गए।
केंद्र की RDSS योजना के तहत ₹25,000 करोड़ के बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट प्रगति पर हैं।
ट्रांसमिशन क्षेत्र में अगले तीन वर्षों में ₹60,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित; 2031-32 तक 78,000 मेगावाट क्षमता का लक्ष्य।
मुंबई आइलैंडिंग प्रोजेक्ट पूर्ण; अतिरिक्त 3,000 मेगावाट की आपूर्ति क्षमता जुड़ी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार, 24 जून को महाराष्ट्र विधान परिषद में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य 2025 के अंत तक प्रदेश के समस्त किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। फिलहाल राज्य के लगभग 75 प्रतिशत किसानों को पहले से ही दिन में बिजली मिल रही है, जबकि शेष 25 प्रतिशत को ग्रिड से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।

मुख्य घटनाक्रम

विधायक सदाभाऊ खोत के प्रश्न तथा सदस्यों बच्चू कडू एवं प्रवीण दरेकर के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए फडणवीस ने सदन को आश्वस्त किया कि महाराष्ट्र में बिजली की कोई कमी नहीं है। राज्य के नियमों के अनुसार कृषि पंपों को प्रतिदिन आठ घंटे बिजली प्रदान की जाती है।

मई की शुरुआत में आई अल्पकालिक बिजली कटौती के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ पावर प्लांट में एक साथ तकनीकी खराबी आने से अस्थायी व्यवधान उत्पन्न हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य के किसी भी हिस्से में बिजली कटौती नहीं हो रही है।

सोलर एग्रीकल्चर पंप योजना की उपलब्धियाँ

फडणवीस ने 'सोलर एग्रीकल्चर पंप स्कीम' की सफलता को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछले तीन वर्षों में पूरे महाराष्ट्र में 10 लाख से अधिक सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं और किसानों की ओर से इसे उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।

विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विशेष मॉडल अपनाए हैं। गहरे जल स्रोतों, नदी तटों और बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में मोनोपोल और बूस्टर पंप का उपयोग किया जा रहा है, जबकि नहरों और खुले जलाशयों में 'फ्लोटिंग सोलर पंप स्कीम' प्रभावी रूप से लागू की गई है। 'डार्क जोन' क्षेत्रों में उच्च क्षमता वाले मॉडल और बूस्टर पंप के लिए विशेष सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।

बुनियादी ढाँचे में ₹25,000 करोड़ का निवेश

राज्य के वितरण नेटवर्क की कमियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार की 'रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम' (RDSS) के अंतर्गत लगभग ₹25,000 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर कार्य प्रगति पर है। इसमें फीडर पृथक्करण, नए सब-स्टेशनों का निर्माण, अतिरिक्त वितरण ट्रांसफॉर्मर की स्थापना और नेटवर्क का आधुनिकीकरण शामिल है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन सुधारों से अगले तीन वर्षों में ट्रांसफॉर्मर खराबी की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।

2031-32 तक 78,000 मेगावाट का लक्ष्य

राज्य की बढ़ती ऊर्जा माँग को देखते हुए महाराष्ट्र ने वित्त वर्ष 2031-32 तक 78,000 मेगावाट की बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने की योजना तैयार की है। इस क्षमता के कुशल ट्रांसमिशन के लिए टैरिफ-बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (TBCB) फ्रेमवर्क के अंतर्गत ₹16,000 करोड़ का कार्य पहले ही आरंभ हो चुका है। अगले तीन वर्षों में ट्रांसमिशन क्षेत्र में ₹60,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।

मुंबई आइलैंडिंग परियोजना

फडणवीस ने 'मुंबई आइलैंडिंग प्रोजेक्ट' की जानकारी देते हुए बताया कि इसे राज्य की राजधानी के ग्रिड को आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मुख्य ट्रांसमिशन कॉरिडोर पूर्ण हो चुके हैं, जिससे मुंबई में अतिरिक्त 3,000 मेगावाट बिजली की आपूर्ति संभव होगी। यह प्रणाली क्षेत्रीय ग्रिड विफलता की स्थिति में भी मुंबई की निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र में कृषि क्षेत्र की ऊर्जा आवश्यकताएँ और ग्रामीण विद्युतीकरण की गुणवत्ता लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रही हैं। आने वाले महीनों में RDSS परियोजनाओं की प्रगति और सोलर पंप योजना के विस्तार से यह स्पष्ट होगा कि सरकार का यह लक्ष्य समय-सीमा के भीतर पूरा हो पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि RDSS परियोजनाएँ अभी भी प्रगति पर हैं। ₹25,000 करोड़ का बुनियादी ढाँचा निवेश प्रभावशाली दिखता है, परंतु फीडर पृथक्करण जैसी परियोजनाएँ ऐतिहासिक रूप से देरी से पूरी होती हैं। 2031-32 तक 78,000 मेगावाट का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, और इसकी विश्वसनीयता तब सिद्ध होगी जब ट्रांसमिशन निवेश के साथ-साथ वितरण स्तर पर भी किसानों को वास्तविक राहत मिले।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार किसानों को दिन में बिजली देने का लक्ष्य कब तक पूरा करेगी?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य 2025 के अंत तक राज्य के सभी किसानों को दिन में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। अभी 75% किसानों को यह सुविधा मिल रही है और शेष 25% को ग्रिड से जोड़ने का काम चल रहा है।
महाराष्ट्र की सोलर एग्रीकल्चर पंप योजना क्या है और इसकी उपलब्धि क्या रही है?
यह योजना किसानों को सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा चालित पंप उपलब्ध कराती है, जिससे उन्हें बिजली बिल की समस्या नहीं होती। पिछले तीन वर्षों में महाराष्ट्र में 10 लाख से अधिक सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। गहरे जल स्रोतों, नहरों और बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग विशेष मॉडल अपनाए गए हैं।
RDSS योजना के तहत महाराष्ट्र में कितना निवेश हो रहा है?
केंद्र सरकार की 'रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम' (RDSS) के अंतर्गत महाराष्ट्र में लगभग ₹25,000 करोड़ के बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इनमें फीडर पृथक्करण, नए सब-स्टेशन, अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर और नेटवर्क आधुनिकीकरण शामिल हैं।
मुंबई आइलैंडिंग प्रोजेक्ट क्या है और इसका क्या फायदा होगा?
मुंबई आइलैंडिंग प्रोजेक्ट मुंबई के पावर ग्रिड को क्षेत्रीय ग्रिड विफलता या आपातकालीन परिस्थितियों से सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है। मुख्य ट्रांसमिशन कॉरिडोर पूर्ण हो चुके हैं, जिससे मुंबई में अतिरिक्त 3,000 मेगावाट बिजली पहुँचाई जा सकेगी।
महाराष्ट्र का 2031-32 तक बिजली उत्पादन लक्ष्य क्या है?
महाराष्ट्र ने वित्त वर्ष 2031-32 तक 78,000 मेगावाट की बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने की योजना बनाई है। इसके लिए TBCB फ्रेमवर्क के तहत ₹16,000 करोड़ का कार्य शुरू हो चुका है और अगले तीन वर्षों में ट्रांसमिशन क्षेत्र में ₹60,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।
राष्ट्र प्रेस
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