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ग्रिड सपोर्ट चार्ज आम उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए: CM फडणवीस का विधान परिषद में स्पष्टीकरण

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ग्रिड सपोर्ट चार्ज आम उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए: CM फडणवीस का विधान परिषद में स्पष्टीकरण

सारांश

मुख्यमंत्री फडणवीस ने विधान परिषद में साफ किया कि ग्रिड सपोर्ट चार्ज आम उपभोक्ताओं की ढाल है, न बोझ — यह केवल 0.13% सोलर उपभोक्ताओं पर लागू है। साथ ही MERC के ₹40,000 करोड़ की डबल-काउंटिंग वाले फैसले पर रोक और 2029-30 तक 52% नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य सामने आया।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 24 जून को महाराष्ट्र विधान परिषद में ग्रिड सपोर्ट चार्ज का बचाव किया।
यह शुल्क केवल 0.13 प्रतिशत उपभोक्ताओं पर लागू है और 1 फरवरी 2016 से प्रभावी है।
MERC ने ₹40,000 करोड़ की डबल-काउंटिंग त्रुटि सामने आने के बाद अपने फैसले पर रोक लगाई, पुनः सुनवाई जारी।
महाराष्ट्र का औद्योगिक बिजली टैरिफ ₹8.19 प्रति यूनिट (2025-26), तमिलनाडु, तेलंगाना और मध्य प्रदेश से कम।
राज्य में बिजली मांग पिछले दो वर्षों में 20 प्रतिशत बढ़ी; नवीकरणीय ऊर्जा हिस्सेदारी 2029-30 तक 52% करने का लक्ष्य।
महाराष्ट्र देश के 60 प्रतिशत सोलर कृषि पंप स्थापित कर राष्ट्रीय 'मॉडल राज्य' बना।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार, 24 जून को महाराष्ट्र विधान परिषद में स्पष्ट किया कि ग्रिड सपोर्ट चार्ज का उद्देश्य सोलर एनर्जी के बढ़ते उपयोग से पावर ग्रिड पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को आम बिजली उपभोक्ताओं तक पहुँचने से रोकना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह शुल्क केवल 0.13 प्रतिशत ग्राहकों पर लागू होता है और यह किसी का नुकसान नहीं, बल्कि कुछ उपभोक्ताओं के अतिरिक्त लाभ में मामूली कटौती है।

विधान परिषद में उठा सवाल

मुख्यमंत्री फडणवीस विधान परिषद सदस्य सतेज पाटिल द्वारा राज्य में औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिक्री कर में बढ़ोतरी के संबंध में उठाए गए सवाल का जवाब दे रहे थे। भाई जगताप, एकनाथ खडसे और डॉ. नीलम गोरे सहित अन्य सदस्यों ने भी इस चर्चा में सक्रिय भागीदारी की।

ग्रिड सपोर्ट चार्ज की पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्रिड सपोर्ट चार्ज 1 फरवरी 2016 से लागू है और इसे पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (MERC) की कुछ गणनाओं में ₹40,000 करोड़ की 'डबल-काउंटिंग' की त्रुटि सामने आने के बाद आयोग ने अपने फैसले पर स्वतः रोक लगा दी है और मामले की पुनः सुनवाई शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि सोलर एनर्जी की तकनीकी संरचना इस चार्ज की असली वजह है। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में उत्पादित सौर ऊर्जा का केवल 35 प्रतिशत दिन में उपयोग होता है, जबकि शेष 65 प्रतिशत 'एनर्जी बैंकिंग' के माध्यम से रात में वापस लिया जाता है, जिससे वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

महाराष्ट्र की बिजली दरें और औद्योगिक विकास

बिजली की ऊँची दरों के दावों को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में औद्योगिक बिजली दरें तमिलनाडु, तेलंगाना और मध्य प्रदेश की तुलना में कम हैं। 2025-26 में राज्य का टैरिफ ₹8.19 प्रति यूनिट है। मल्टी-ईयर टैरिफ फ्रेमवर्क के अंतर्गत दरें 2029-30 तक निर्धारित कर दी गई हैं।

उन्होंने तर्क दिया, "अगर महाराष्ट्र में बिजली की दरें सचमुच अधिक होतीं तो उद्योग दूसरे राज्यों में चले गए होते। इसके विपरीत बड़े उद्योग महाराष्ट्र में भारी निवेश कर रहे हैं।" राज्य में पिछले दो वर्षों में बिजली की मांग में 20 प्रतिशत की वृद्धि इसी तथ्य को रेखांकित करती है।

नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार और सरकारी लक्ष्य

2022 में राज्य के कुल बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत थी। सरकार का लक्ष्य है कि विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से इसे 2029-30 तक 52 प्रतिशत तक पहुँचाया जाए। इस दिशा में अभी 38,000 मेगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ विकसित की जा रही हैं।

एनर्जी स्टोरेज की चुनौती से निपटने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की स्थापना तेज़ी से कर रही है।

सोलर कृषि पंप और आगे की राह

महाराष्ट्र देश के लगभग 60 प्रतिशत सोलर कृषि पंप स्थापित करके राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बन चुका है, जिसके चलते केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों से 'महाराष्ट्र मॉडल' अपनाने का आग्रह किया है। पीएम सूर्य घर और सोलर एग्रीकल्चरल पंप योजना के तहत अधिकृत वेंडर और शिकायत निवारण की समर्पित व्यवस्था बनाई गई है। इन पंपों के साथ बीमा कवर और पाँच वर्ष का गारंटीड रखरखाव अनुबंध भी दिया जाता है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार ग्रिड सपोर्ट चार्ज और 'टाइम ऑफ डे' नीति पर सोलर पावर उत्पादकों के साथ नई बातचीत के लिए तैयार है, और आम उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ कम रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जब MERC जैसी स्वायत्त संस्था के आदेश में ₹40,000 करोड़ की गणना-त्रुटि सामने आती है, तो नियामकीय निगरानी की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। 0.13% उपभोक्ताओं पर शुल्क का तर्क सुनने में न्यायसंगत लगता है, लेकिन सोलर निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता — जो 'टाइम ऑफ डे' नीति और बदलते नियमों से उपजी है — महाराष्ट्र की नवीकरणीय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं के लिए दीर्घकालिक जोखिम बन सकती है। 2029-30 तक 52% नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य तभी संभव है जब नीतिगत स्थिरता और निवेशक विश्वास दोनों एक साथ बने रहें।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रिड सपोर्ट चार्ज क्या है और यह क्यों लगाया गया है?
ग्रिड सपोर्ट चार्ज एक शुल्क है जो 1 फरवरी 2016 से महाराष्ट्र में लागू है। इसका उद्देश्य सोलर एनर्जी के बढ़ते उपयोग से पावर ग्रिड पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को आम बिजली उपभोक्ताओं तक पहुँचने से रोकना है। CM फडणवीस के अनुसार यह केवल 0.13% उपभोक्ताओं पर लागू होता है।
MERC के ₹40,000 करोड़ की डबल-काउंटिंग विवाद का क्या मामला है?
महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (MERC) की कुछ गणनाओं में ₹40,000 करोड़ की एक ही रकम को दो बार गिनने की त्रुटि सामने आई। इस पर ध्यान दिलाए जाने के बाद MERC ने स्वयं अपने फैसले पर रोक लगा दी है और मामले की पुनः सुनवाई शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र में औद्योगिक बिजली दरें अन्य राज्यों की तुलना में कैसी हैं?
CM फडणवीस के अनुसार महाराष्ट्र का औद्योगिक बिजली टैरिफ 2025-26 में ₹8.19 प्रति यूनिट है, जो तमिलनाडु, तेलंगाना और मध्य प्रदेश से कम है। मल्टी-ईयर टैरिफ फ्रेमवर्क के तहत दरें 2029-30 तक निर्धारित कर दी गई हैं।
महाराष्ट्र का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
2022 में राज्य के कुल बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत थी। सरकार का लक्ष्य है कि 2029-30 तक इसे 52 प्रतिशत तक पहुँचाया जाए, जिसके लिए 38,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएँ विकसित की जा रही हैं।
सोलर कृषि पंप योजना में महाराष्ट्र की क्या भूमिका है?
महाराष्ट्र देश के लगभग 60 प्रतिशत सोलर कृषि पंप स्थापित कर राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बना है। केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों से 'महाराष्ट्र मॉडल' अपनाने का आग्रह किया है। इन पंपों के साथ बीमा कवर और पाँच वर्ष का गारंटीड रखरखाव अनुबंध भी दिया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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