17 सितंबर 2026
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महाराष्ट्र में केलकर पैनल गठित: 2047 तक ₹5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय रोडमैप

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महाराष्ट्र में केलकर पैनल गठित: 2047 तक ₹5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय रोडमैप

सारांश

महाराष्ट्र के सामने राजकोषीय दबाव और महत्त्वाकांक्षी विकास लक्ष्यों के बीच नाज़ुक संतुलन की चुनौती है। CM फडणवीस ने डॉ. विजय केलकर की अगुआई में उच्चस्तरीय पैनल बनाया — 2030 तक 1 ट्रिलियन और 2047 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का रोडमैप तैयार होगा।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने 17 सितंबर 2026 को 'महाराष्ट्र सस्टेनेबल पब्लिक फाइनेंस कमेटी' के गठन की घोषणा की।
पैनल की अध्यक्षता著名 अर्थशास्त्री एवं पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव डॉ.
राज्य की अर्थव्यवस्था को 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य।
एफआरबीएम के तहत राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 2.8%-3.0% और राजस्व घाटा 0.7% से कम रखने का लक्ष्य।
कार्तिक मुरलीधरन, डॉ.
आशिमा गोयल सदस्य हैं।
लक्ष्यों की निगरानी CM की अध्यक्षता वाली 'विज़न मैनेजमेंट यूनिट' हर तिमाही करेगी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 17 सितंबर 2026 को राज्य की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को साकार करने के उद्देश्य से 'महाराष्ट्र सस्टेनेबल पब्लिक फाइनेंस कमेटी' के गठन की घोषणा की।著名 अर्थशास्त्री एवं पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव डॉ. विजय केलकर की अध्यक्षता वाले इस उच्चस्तरीय पैनल को टैक्स एवं नॉन-टैक्स राजस्व में टिकाऊ वृद्धि के उपाय सुझाने का दायित्व सौंपा गया है। यह घोषणा बुधवार देर शाम की गई।

पैनल का उद्देश्य और कार्यक्षेत्र

केलकर कमेटी को कई महत्त्वपूर्ण कार्य सौंपे गए हैं। पैनल को राज्य की टैक्स प्रणाली को आधुनिक बनाने, राजस्व क्षरण रोकने और टैक्स दरों, शुल्क व छूट को तर्कसंगत बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, राजस्व के नए स्रोत चिह्नित करने और सार्वजनिक परिसंपत्तियों तथा सरकारी उद्यमों से अधिकतम रिटर्न सुनिश्चित करने का काम भी इसी पैनल का होगा।

इसके अतिरिक्त, वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और कल्याणकारी योजनाओं जैसे अनिवार्य व्ययों में संतुलन बनाते हुए सरकारी खर्च को सुव्यवस्थित करना, तथा अवसंरचना परियोजनाओं एवं बजट घाटे के लिए ऋण-निर्भरता कम करने हेतु वित्तीय रूप से जवाबदेह रोडमैप तैयार करना भी इस पैनल की प्राथमिकताओं में शामिल है।

पैनल की संरचना

केलकर कमेटी में विशेषज्ञों की एक प्रतिष्ठित टीम शामिल है। इनमें प्रो. कार्तिक मुरलीधरन (संस्थापक-निदेशक, सीईजीआईएस), डॉ. नितिन करीर (पूर्व मुख्य सचिव, महाराष्ट्र), टी. रबी शंकर (पूर्व उप-गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक) और डॉ. आशिमा गोयल (अध्यक्ष, द इंडियन इकोनोमेट्रिक सोसाइटी) सम्मिलित हैं। यह संरचना स्पष्ट करती है कि राज्य सरकार इस सुधार प्रक्रिया को नीति-निर्माण और शैक्षणिक दोनों दृष्टिकोणों से संचालित करना चाहती है।

'विकसित महाराष्ट्र 2047' विज़न से जुड़ाव

यह पैनल राज्य सरकार के 'विकसित महाराष्ट्र 2047' विज़न डॉक्यूमेंट का अभिन्न हिस्सा है। इस दस्तावेज़ में राज्य की अर्थव्यवस्था को 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचाने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है — यह लक्ष्य भारत की स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगाँठ के साथ समयबद्ध है। विज़न डॉक्यूमेंट में सार्वजनिक व्यय नीति को दीर्घकालिक पूंजी निर्माण से जोड़ने और वित्तपोषण के वैकल्पिक मॉडल व निजी पूंजी प्रवाह की पहचान करने का सुझाव भी शामिल है।

एफआरबीएम लक्ष्य और वित्तीय चुनौतियाँ

महाराष्ट्र के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य 'फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट' (एफआरबीएम) अधिनियम के दायरे में तय हैं। इनमें जीएसडीपी के 2.8% से 3.0% के बीच राजकोषीय घाटा और जीएसडीपी के 0.7% से कम राजस्व घाटा बनाए रखने का लक्ष्य है। इन लक्ष्यों की त्रैमासिक निगरानी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली 'विज़न मैनेजमेंट यूनिट' द्वारा की जाती है।

गौरतलब है कि कल्याणकारी योजनाओं के बढ़ते व्यय और ऋण चुकाने की लागत के कारण एफआरबीएम के तहत निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करना लगातार कठिन रहा है। नतीजतन, सरकार को अक्सर पूंजी परियोजनाओं के वित्तपोषण और अल्पकालिक नकदी की कमी दूर करने के लिए बाज़ार से ऋण लेना पड़ता है।

पैनल का महत्त्व और आगे की राह

यह पैनल ऐसे समय में गठित किया गया है जब महाराष्ट्र अवसंरचना, मानव संसाधन विकास, जल सुरक्षा, शहरी प्रबंधन और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में निवेश-आधारित विकास रणनीति पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है, साथ ही बढ़ती वित्तीय चुनौतियों से भी जूझ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य राजकोषीय अनुशासन और जनकल्याण खर्च के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। केलकर कमेटी की सिफारिशें महाराष्ट्र के वित्तीय भविष्य की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा सिफारिशों के क्रियान्वयन की होगी — खासकर तब जब कल्याणकारी योजनाओं के खर्च में कटौती की राजनीतिक कीमत बेहद ऊंची होती है। राज्य में मुफ्त योजनाओं की लंबी परंपरा और एफआरबीएम लक्ष्यों के बीच का तनाव किसी पैनल की सिफारिशों से अपने आप नहीं सुलझता। 2047 का 5 ट्रिलियन डॉलर का आँकड़ा प्रेरक है, परंतु यह तभी वास्तविक बनेगा जब राजस्व सुधार की अनुशंसाएँ बजट चक्रों में समयबद्ध रूप से लागू हों — जो महाराष्ट्र सहित अधिकांश राज्यों के लिए ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर कड़ी रही है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सस्टेनेबल पब्लिक फाइनेंस कमेटी क्या है?
यह महाराष्ट्र सरकार द्वारा 17 सितंबर 2026 को गठित उच्चस्तरीय वित्त सुधार समिति है, जिसकी अध्यक्षता डॉ. विजय केलकर करेंगे। इसका उद्देश्य टैक्स और नॉन-टैक्स राजस्व बढ़ाने, सरकारी खर्च को सुव्यवस्थित करने और ऋण-निर्भरता कम करने के उपाय सुझाना है।
केलकर कमेटी में कौन-कौन शामिल हैं?
पैनल में अध्यक्ष डॉ. विजय केलकर के अलावा प्रो. कार्तिक मुरलीधरन (सीईजीआईएस), डॉ. नितिन करीर (पूर्व मुख्य सचिव, महाराष्ट्र), टी. रबी शंकर (पूर्व उप-गवर्नर, RBI) और डॉ. आशिमा गोयल (अध्यक्ष, द इंडियन इकोनोमेट्रिक सोसाइटी) सम्मिलित हैं। यह एक बहु-अनुशासनात्मक विशेषज्ञ टीम है।
महाराष्ट्र का 'विकसित महाराष्ट्र 2047' विज़न क्या है?
यह राज्य सरकार का दीर्घकालिक विकास रोडमैप है, जिसमें 2030 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य है। यह लक्ष्य भारत की स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगाँठ के साथ समयबद्ध है।
महाराष्ट्र के राजकोषीय घाटे की क्या स्थिति है?
एफआरबीएम अधिनियम के तहत राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 2.8% से 3.0% और राजस्व घाटा 0.7% से कम रखने का लक्ष्य है। कल्याणकारी योजनाओं के बढ़ते खर्च और ऋण चुकाने की लागत के कारण इन लक्ष्यों को हासिल करना कठिन रहा है।
यह पैनल अभी क्यों बनाया गया है?
राज्य अवसंरचना, जल सुरक्षा, शहरी प्रबंधन और ऊर्जा परिवर्तन में भारी निवेश कर रहा है, जबकि साथ ही वित्तीय दबाव भी बढ़ रहे हैं। पैनल का गठन इसी दोहरी चुनौती — महत्त्वाकांक्षी विकास और राजकोषीय अनुशासन — के बीच संतुलन बनाने के लिए किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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