महाराष्ट्र में प्रशासनिक पुनर्गठन: विभागों की संख्या 33 से बढ़कर 45, फडणवीस कैबिनेट का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 9 जून 2026 को राज्य के मंत्रालयी प्रशासनिक ढाँचे में व्यापक बदलाव करते हुए विभागों की संख्या 33 से बढ़ाकर 45 करने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल बैठक में यह फैसला लिया गया, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना, निर्णय प्रक्रिया को गति देना और कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
पुनर्गठन की मुख्य संरचना
अब तक मुंबई स्थित राज्य मंत्रालय में 33 विभाग कार्यरत थे, जिनमें से कई के अंतर्गत दो से तीन उप-विभाग एक ही विभाग प्रमुख के अधीन काम करते थे। इस व्यवस्था के कारण मानव संसाधन के वितरण और प्रशासनिक समन्वय में कठिनाइयाँ आती थीं। नए ढाँचे के तहत इन उप-विभागों को स्वतंत्र सचिवों के अधीन अलग-अलग विभागों का दर्जा दिया जाएगा।
प्रत्येक नए विभाग को अपना स्वतंत्र प्रशासनिक ढाँचा, नकद शाखा और रजिस्ट्रेशन शाखा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि कामकाज में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित हो सके।
नए पद नहीं, मौजूदा संसाधनों का पुनर्वितरण
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस पुनर्गठन में कोई नया पद सृजित नहीं किया जाएगा। मौजूदा स्वीकृत और रिक्त पदों का ही नए विभागों में अनुपातिक रूप से पुनर्वितरण होगा। इस बदलाव से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना प्रशासनिक सुधार, नवाचार, उद्यमिता और सुधार उप-विभाग द्वारा जारी की जाएगी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस नीति को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और 'ईज ऑफ लिविंग' की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय अधिक प्रभावी होगा।
मंत्रिमंडल के अन्य प्रमुख निर्णय
विभाग पुनर्गठन के अलावा, मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम, 2016 में संशोधन को मंजूरी दी, जो शैक्षणिक वर्ष 2026–27 के लिए नए कॉलेजों की अंतिम स्वीकृति, नए संकाय, पाठ्यक्रम और विषयों से संबंधित है।
इसके साथ ही, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अनुरूप महाराष्ट्र वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में भी संशोधन को मंजूरी दी गई, ताकि राज्य और केंद्र के कर प्रावधानों में एकरूपता बनी रहे।
MIDC की उधारी सीमा और पुरंदर हवाई अड्डा
मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र औद्योगिक विकास अधिनियम, 1961 में संशोधन को भी हरी झंडी दी, जिसके तहत महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) की उधारी सीमा बढ़ाई जाएगी। सरकार पहले ही MIDC के लिए ₹6,000 करोड़ के ऋण को मंजूरी दे चुकी है, जिसका उपयोग पुरंदर हवाई अड्डा परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में किया जा रहा है।
आगे क्या होगा
आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद नए विभागों का औपचारिक गठन शुरू होगा। यह पुनर्गठन महायुति सरकार के उस व्यापक शासन-सुधार एजेंडे का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें प्रशासनिक जवाबदेही और सेवा वितरण को प्राथमिकता दी गई है।