महाराष्ट्र सरकार ने राजस्व विभाग की नई संरचना को दी मंजूरी, 35,876 पदों का विस्तार
सारांश
Key Takeaways
- 35,876 नए पदों का गठन
- राजस्व विभाग की नई संरचना
- नागरिकों के लिए तेज सेवाएं
- प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
- उमाकांत दांगट समिति की सिफारिशें
मुंबई, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नागरिकों को तेज और सुविधाजनक सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से और राजस्व प्रशासन में बढ़ते कार्यभार को ध्यान में रखते हुए, महाराष्ट्र सरकार ने राजस्व विभाग की संशोधित पदसंरचना को अनुमोदित किया है।
यह महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बवणकुले की विशेष पहल से लिया गया है। यह पिछले 20 वर्षों में विभाग की यह पहली व्यापक पुनर्गठन प्रक्रिया है।
नई मंजूरी प्राप्त संरचना में कुल 35,876 पद शामिल हैं, जिसमें स्टाम्प ड्यूटी, भूमि रिकॉर्ड और राजस्व विभाग के विभिन्न पद शामिल हैं। इसमें 34,576 नियमित पद और 1,300 आउटसोर्सेड पद शामिल हैं।
राजस्व विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों की पुरानी संरचना 2006 में स्थापित की गई थी। पिछले दो दशकों में राजस्व और गैर-राजस्व कार्यों में काफी वृद्धि हुई है। इस संदर्भ में, राजस्व मंत्री बवणकुले ने मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल और अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खारगे के साथ विस्तृत चर्चा की।
इसके पश्चात, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति ने संशोधित संरचना को मंजूरी दी, और आज इसका आधिकारिक सरकारी आदेश जारी किया गया।
संशोधित संरचना में विभागीय, जिला और तहसील स्तर पर आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की स्थापना की गई है, जिसमें 6 विभागीय आयुक्त कार्यालय, 36 जिलाधिकारी कार्यालय, 192 राजस्व उप-जिला कार्यालय, और 360 तहसीलदार कार्यालय शामिल हैं।
क्षेत्रीय स्तर पर, सरकार ने 2,625 सर्कल (मंडल) कार्यालय और 15,747 तलाठी पद को मंजूरी दी है।
इसके अलावा, 11 नए अतिरिक्त जिलाधिकारी कार्यालय, 8 नए उप-जिला कार्यालय, 2 नए तहसीलदार कार्यालय, और 69 अतिरिक्त तहसीलदार कार्यालय को भी मंजूरी दी गई है। यह संशोधित संरचना उमाकांत दांगट समिति की सिफारिशों के अनुरूप तैयार की गई है। अब नए कार्यालयों का मुख्यालय और क्षेत्रीय जिम्मेदारी जिला स्तर पर निर्धारित की जाएगी।
इस पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बवणकुले ने कहा, "राजस्व विभाग प्रशासन की रीढ़ है। बढ़ते कार्यभार और लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह नया ढांचा अनुमोदित किया गया है। इससे प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा और नए कार्यालयों के निर्माण से नागरिकों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे कार्य तेजी से संपन्न होंगे। यह एक पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"