महाराष्ट्र NHM के 15,010 संविदा कर्मचारियों का समायोजन तय, ₹1,153.60 करोड़ वार्षिक व्यय को मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत राज्यभर में कार्यरत 15,010 संविदा कर्मचारियों के सेवा समायोजन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। 25 जून 2026 की कैबिनेट बैठक के निर्णय के आधार पर जारी शासनादेश में 10 वर्ष या उससे अधिक की निरंतर सेवा पूरी कर चुके इन कर्मचारियों के लिए समकक्ष वेतनमान पर बहुसंख्यक पद सृजित करने और इस हेतु ₹1,153.60 करोड़ के वार्षिक व्यय को स्वीकृति दी गई है। यह निर्णय वर्षों से नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
निर्णय की पृष्ठभूमि
इस समायोजन की नींव 14 मार्च 2024 को रखी गई थी, जब मंत्रिमंडल ने 10 वर्ष से अधिक सेवा देने वाले NHM संविदा कर्मचारियों के समायोजन का सैद्धांतिक निर्णय लिया था। इसके बाद 4 नवंबर 2025 को इस निर्णय में संशोधन किया गया और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-विभागीय समिति गठित की गई। उस समिति की सिफारिशों और 25 जून 2026 की कैबिनेट बैठक के फैसले के आधार पर अंततः यह शासनादेश जारी हुआ।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर तथा राज्य मंत्री मेघना साकोरे बोर्डीकर ने इस दिशा में विशेष पहल की, जिसके परिणामस्वरूप यह फैसला संभव हो सका।
समायोजन की शर्तें और वेतन लाभ
शासनादेश के अनुसार, 25 जून 2026 तक तकनीकी अवकाश (टेक्निकल ब्रेक) को छोड़कर लगातार 10 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी कर चुके 15,010 कर्मचारियों को एकमुश्त विशेष प्रकरण के रूप में समकक्ष वेतनमान वाले पदों पर नियुक्त किया जाएगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के नियमित स्वीकृत पदों के अनुरूप संविदा पदों की समकक्षता तय होगी; आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों के पदों पर भी विचार किया जाएगा।
पदों की समकक्षता निर्धारित करते समय कार्य की प्रकृति, जिम्मेदारियाँ, शैक्षणिक योग्यता, सेवा प्रवेश नियम, वर्तमान वेतनमान और सातवें वेतन आयोग के अनुरूप लागू वेतनमान को आधार बनाया जाएगा। पात्र कर्मचारियों को समकक्ष पद के वेतनमान के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन, महंगाई भत्ता (DA) और यात्रा भत्ता (TA) मिलेगा, साथ ही उनका वर्तमान वेतन भी सुरक्षित रखा जाएगा।
क्या नहीं मिलेगा — सीमाएँ स्पष्ट
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन कर्मचारियों को पदोन्नति, आश्वासित प्रगति योजना (ACP/ASSP), पेंशन या पारिवारिक पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। उनके लिए केवल NHM के तहत वर्तमान में लागू अवकाश नियम ही प्रभावी रहेंगे।
इसके अतिरिक्त, सृजित किए जाने वाले पद व्यक्तिगत (पर्सनल) पद होंगे — अर्थात संबंधित कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने, इस्तीफा देने या किसी अन्य कारण से सेवा समाप्त होने पर ये पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे और इन पर पुनः नियुक्ति नहीं होगी। आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ भी नहीं मिलेगा।
भविष्य की नीति — आउटसोर्सिंग की ओर रुख
भविष्य में ऐसे नियमितीकरण के मामलों से बचने के लिए सरकार ने नीतिगत दिशा भी स्पष्ट कर दी है। NHM के तहत मानव संसाधन की नियुक्तियाँ अब मुख्यतः आउटसोर्सिंग या सेवा अनुबंध (सर्विस कॉन्ट्रैक्ट) के माध्यम से की जाएंगी। भविष्य में नए पदों के सृजन से जुड़े निर्णय वित्त विभाग की उच्चस्तरीय सचिव समिति की मंजूरी के बाद ही लिए जाएंगे। यह कदम दर्शाता है कि सरकार एक ओर मौजूदा कर्मचारियों को राहत दे रही है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में इस तरह की स्थिति न दोहराई जाए, इसके लिए संरचनात्मक बदलाव भी कर रही है।