महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स 2026 लागू: CM फडणवीस को मंत्रियों के फैसले पलटने का कानूनी अधिकार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में प्रशासनिक शक्तियों के व्यापक पुनर्गठन के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अब यह कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया है कि वे जनहित में किसी भी कैबिनेट मंत्री के निर्णय में हस्तक्षेप कर सकते हैं, उसे संशोधित कर सकते हैं या पूरी तरह निरस्त कर सकते हैं। राज्य सरकार ने 14 अगस्त 2026 को आधिकारिक राजपत्र में महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस, 2026 अधिसूचित किए, जो प्रकाशन के साथ ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गए।
नए नियमों का ढाँचा
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 166(2) और 166(3) के तहत अधिसूचित इस नए ढाँचे ने राज्य के सभी पुराने प्रशासनिक नियमों और प्रक्रियाओं का स्थान ले लिया है। इसमें मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, मुख्य सचिव और विभागीय सचिवों की शक्तियों व कार्यप्रणाली को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
नियम 13(5) के तहत मुख्यमंत्री को सार्वजनिक हित में विभागीय मंत्रियों के निर्णयों को बदलने, संशोधित करने या रद्द करने का अधिकार दिया गया है। हालाँकि, अर्ध-न्यायिक मामलों को इस अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है। किसी मंत्री के फैसले को पलटने पर मुख्यमंत्री के लिए लिखित कारण दर्ज करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री की अन्य प्रमुख शक्तियाँ
नए नियमों के अनुसार, मुख्यमंत्री किसी भी समय किसी भी विभाग से आधिकारिक दस्तावेज़, फाइलें या अभिलेख मँगवा सकते हैं और संबंधित मंत्री व विभागीय सचिव कानूनी रूप से इनका पालन करने के लिए बाध्य होंगे। नियम 2(सी) में 'मामले' की परिभाषा को विस्तारित कर राज्य के ई-ऑफिस सिस्टम में संसाधित डिजिटल नोट्स, ई-दस्तावेज़ और डिजिटल फाइलें भी शामिल की गई हैं।
नियमित प्रशासनिक कार्य और विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रभारी मंत्री के पास ही बनी रहेगी। गौरतलब है कि यह नियम कार्यपालिका की दैनिक कार्यप्रणाली में बदलाव लाता है, न कि मंत्री की संवैधानिक स्थिति में।
वित्तीय अनुशासन और मुख्य सचिव की भूमिका
नियम 17(2) और नियम 39 के तहत कोई भी प्रशासनिक विभाग वित्त विभाग की पूर्व सहमति के बिना राजस्व परित्याग, भूमि अनुदान, रियायतें या अनिर्धारित व्यय से जुड़े आदेश जारी नहीं कर सकता। नियम 16(1) के अनुसार, मुख्य सचिव को यह अधिकार है कि वे मुख्यमंत्री या मंत्रियों को सतर्क करें यदि कोई प्रस्तावित कार्रवाई वैधानिक प्रावधानों या स्थापित नीति का उल्लंघन करती हो।
इसके अलावा, भारत सरकार या अन्य राज्य सरकारों से किसी भी संभावित विवाद की सूचना मुख्यमंत्री और राज्यपाल को तत्काल देना अनिवार्य किया गया है। राज्य सरकार को मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव की अध्यक्षता में अधिकृत समितियाँ गठित करने की भी अनुमति दी गई है।
गठबंधन राजनीति पर असर
अधिकारियों के अनुसार, इस अधिसूचना ने राजनीतिक गलियारों में चिंताएँ बढ़ा दी हैं। राज्य मंत्रिमंडल में विभागों का बँटवारा भारतीय जनता पार्टी (BJP), एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सुनेत्रा पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सहित सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के प्रमुख सहयोगियों के बीच किया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री फडणवीस सहयोगी दलों के मंत्रियों के निर्णयों को पलटने के लिए इस अधिकार का प्रयोग करते हैं, तो इससे गठबंधन के भीतर आंतरिक राजनीतिक मतभेद उभर सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब महायुति सरकार को गठबंधन सहयोगियों के बीच समन्वय को लेकर पहले से ही सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
आगे क्या होगा
नए नियम 14 अगस्त 2026 से लागू हो चुके हैं। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री फडणवीस इस अधिकार का व्यावहारिक उपयोग किस हद तक और किन परिस्थितियों में करते हैं — और क्या गठबंधन सहयोगी इसे प्रशासनिक सुधार मानते हैं या सत्ता के केंद्रीकरण की कोशिश।