महाराष्ट्र कैबिनेट का बड़ा फैसला: 2029 तक ड्रग्स मुक्त राज्य बनाने की व्यापक नीति मंजूर
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में 2029 तक राज्य को नशीले पदार्थों और सिंथेटिक ड्रग्स से पूरी तरह मुक्त करने की एक बहु-विभागीय नीति को मंजूरी दी। इस निर्णय के साथ महाराष्ट्र केंद्र सरकार के राष्ट्रीय नशा मुक्त भारत अभियान के तहत इतने बड़े पैमाने पर समन्वित राज्य-स्तरीय अभियान शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
नीति की मुख्य संरचना
नई नीति में 'संपूर्ण सरकार' दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसके तहत ग्राम पंचायत से लेकर जिला, डिवीजन और मंत्रालय स्तर तक सभी प्रशासनिक इकाइयों के बीच अनिवार्य समन्वय सुनिश्चित किया गया है। जवाबदेही को पुख्ता करने के लिए प्रत्येक सरकारी विभाग एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के साथ सीधे समन्वय के लिए उप सचिव रैंक के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करेगा।
नीति में चार मुख्य स्तंभ निर्धारित किए गए हैं: प्रभावी प्रवर्तन, आपूर्ति में कटौती, माँग में कमी, तथा नशामुक्ति एवं पुनर्वास। सरकारी बयान के अनुसार, 'राज्य में गैर-कानूनी ड्रग्स की खेती, उत्पादन, परिवहन, बिक्री और प्राकृतिक तथा सिंथेटिक ड्रग्स के सेवन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
शिक्षा और जागरूकता अभियान
नीति के तहत शैक्षणिक वर्ष 2027 से कक्षा 5 और उससे ऊपर के पाठ्यक्रम में ड्रग्स के दुष्प्रभावों पर एक अनिवार्य अध्याय जोड़ा जाएगा। 'मुख्यमंत्री माझी शाला, सुंदर शाला' योजना के फेज-3 में ड्रग-विरोधी जागरूकता गतिविधियों के लिए अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग को सभी कॉलेज परिसरों को ड्रग-मुक्त बनाए रखने के लिए बाध्य किया गया है।
'मुख्यमंत्री समृद्धि पंचायत राज अभियान' और 'माझा गांव, आरोग्य संपन्न गांव अभियान' में भी ड्रग-मुक्ति के लिए अतिरिक्त अंकों का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक वर्ष 26 जून को सर्वश्रेष्ठ ड्रग-मुक्त जिले को पुरस्कृत किया जाएगा, जिसके लिए 2 अक्टूबर से 30 अप्रैल तक जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा।
विभागीय जिम्मेदारियाँ
नीति में विभिन्न विभागों को स्पष्ट भूमिकाएँ सौंपी गई हैं। गृह, परिवहन, बंदरगाह और कानून एवं न्याय विभाग प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालेंगे। राजस्व, कृषि और वन विभाग ड्रग्स की आपूर्ति रोकने के लिए काम करेंगे। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और उद्योग विभाग सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध उत्पादन पर कार्रवाई करेंगे।
माँग में कमी लाने की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, खेल, ग्रामीण विकास, जन स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कौशल एवं उद्यमिता तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को सौंपी गई है। नशामुक्ति, उपचार और पुनर्वास के लिए सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता, जन स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और शहरी विकास विभाग जिम्मेदार होंगे।
राष्ट्रीय संदर्भ में महत्त्व
यह नीति ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार का नशा मुक्त भारत अभियान देशभर में गति पकड़ रहा है और कई राज्यों में ड्रग्स तस्करी के मामले बढ़ने की रिपोर्टें सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र, विशेषकर मुंबई और तटीय क्षेत्र, ड्रग्स तस्करी के संवेदनशील मार्गों में शामिल रहे हैं। इस दृष्टि से यह नीति राज्य के लिए एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है।
नीति का वास्तविक परीक्षण इसके क्रियान्वयन में होगा — विशेषकर यह देखना होगा कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय ज़मीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है और 2029 की समयसीमा कितनी व्यावहारिक है।