नशा मुक्त मुंबई अभियान: CM फडणवीस का आह्वान — युवाओं को नशे से बचाना राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 30 जुलाई 2026 को मुंबई में 'नशा मुक्त मुंबई' पहल की औपचारिक शुरुआत करते हुए हर नागरिक से 'नशा मुक्त मुंबई', 'नशा मुक्त महाराष्ट्र' और 'नशा मुक्त भारत' के निर्माण का सामूहिक संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशीली दवाओं के विरुद्ध यह लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य से सीधे जुड़ी एक निर्णायक कोशिश है।
युवाओं को निशाना बनाने की साजिश
मुख्यमंत्री फडणवीस ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष अनुसंधान और रक्षा क्षेत्र में भारत की तीव्र प्रगति का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि देश को अंदर से कमज़ोर करने के लिए उसके युवाओं को नशे की गिरफ्त में फँसाने की एक खतरनाक साजिश सक्रिय है। उन्होंने नशीली दवाओं को इस गुप्त युद्ध का सबसे घातक हथियार बताया और कहा कि इस चुनौती का सामना करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र और विशेष रूप से मुंबई में नशीले पदार्थों की तस्करी और युवाओं में उनके बढ़ते उपयोग को लेकर कई रिपोर्टें सामने आ चुकी हैं।
बहु-आयामी रणनीति: पुलिस से लेकर पाठशाला तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा मुक्त समाज बनाने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य सेवा प्रणाली, सामाजिक न्याय विभाग, स्कूली शिक्षा विभाग, माता-पिता, शिक्षक, छात्र और समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने घोषणा की कि अवैध नशीली दवाओं के निर्माण, तस्करी और बिक्री में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेष रूप से, स्कूलों और कॉलेजों के आसपास सक्रिय ड्रग सिंडिकेट को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया गया। राज्य भर के सभी स्कूलों और कॉलेजों के प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों को 'नशा-मुक्त कैंपस' और 'नशा-मुक्त स्कूल' पहल लागू करने हेतु आधिकारिक सूचनाएँ भेजी जाएँगी।
सूचना देने वालों को इनाम, पहचान गुप्त
मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह भी घोषणा की कि नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे नशे के सेवन और तस्करी की सूचनाएँ देकर 'समाज की आँख और कान' की भूमिका निभाएँ।
21-22 वर्ष की उम्र तक नशे से दूर रहना निर्णायक
नशे की लत के शिकार युवाओं के पुनर्वास और उन्हें मुख्यधारा में लाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि युवा 21 से 22 वर्ष की आयु तक नशे से दूर रहते हैं, तो उनके जीवन भर नशा-मुक्त रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने युवाओं से प्रलोभनों को दृढ़ता से अस्वीकार करने का आग्रह किया।
राज्य सरकार ने अगले दो से चार वर्षों में मुंबई को नशा-मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
स्वामी विवेकानंद और शिवाजी महाराज के आदर्शों का आह्वान
स्वामी विवेकानंद का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा राष्ट्र-निर्माण की शक्ति बननी चाहिए, न कि विनाश का माध्यम। छत्रपति शिवाजी महाराज और भारत रत्न डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आदर्शों का स्मरण कराते हुए उन्होंने उपस्थित जनसमूह को नशा-मुक्त रहने की शपथ दिलाई और इस संकल्प को ठोस कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया।
यह अभियान महाराष्ट्र सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जो नशीली दवाओं की समस्या को केवल अपराध के नज़रिए से नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में देखती है।