2 अगस्त 2026
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नशा मुक्त युवा अभियान: PM मोदी ने किया 100-हफ्ते के राष्ट्रीय संकल्प अभियान का शुभारंभ

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नशा मुक्त युवा अभियान: PM मोदी ने किया 100-हफ्ते के राष्ट्रीय संकल्प अभियान का शुभारंभ

सारांश

PM मोदी ने 100 हफ्तों के 'नशा मुक्त युवा से विकसित भारत संकल्प अभियान' का शुभारंभ किया — यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2047 के विकसित भारत की नींव रखने की कोशिश है, जिसमें 1 करोड़ से अधिक युवा पहले ही दिन जुड़े।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त 2026 को ' नशा मुक्त युवा से विकसित भारत संकल्प अभियान ' का शुभारंभ किया।
अभियान 100 हफ्तों (100 रविवार) तक चलेगा और नशीले पदार्थों के सेवन के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी जागरूकता फैलाएगा।
लॉन्च के दिन 1 करोड़ से अधिक युवा — स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और 'मायभारत' वॉलंटियर्स — ऑनलाइन जुड़े।
मोदी ने परिवारों से नशे की समस्या को सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में न छिपाने और चिकित्सकीय सहायता लेने की अपील की।
सरकार ने दावा किया कि पहले की तुलना में कई गुना अधिक गिरफ्तारियाँ और हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त हुई हैं।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को 2047 के विकसित भारत की 'अमृतपीढ़ी' बताते हुए नशामुक्त जीवन को राष्ट्र-निर्माण से जोड़ा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में 'नशा मुक्त युवा से विकसित भारत संकल्प अभियान' का औपचारिक शुभारंभ किया — एक ऐसा राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन जो 100 हफ्तों तक चलेगा और नशीले पदार्थों के सेवन के विरुद्ध देश के युवाओं को एकजुट करने का लक्ष्य रखता है। इस अवसर पर 1 करोड़ से अधिक युवा स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और 'मायभारत' मंच के माध्यम से ऑनलाइन जुड़े।

अभियान की रूपरेखा और संकल्प

प्रधानमंत्री ने अभियान का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा, 'विकसित भारत संकल्प अभियान के लिए नशामुक्त युवा — इस मूवमेंट का नाम ही इसके संकल्प को स्पष्ट करता है।' उन्होंने जोर दिया कि जब देश ने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है, तो इसके लिए युवाओं का तन-मन से स्वस्थ और आत्मविश्वास से भरपूर होना अनिवार्य है।

मोदी ने कहा कि आने वाले 100 रविवार 'नशा मुक्त भारत' की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो युवा किसी कारणवश नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उनके लिए भी रास्ते बंद नहीं हैं — उन्हें चिकित्सकीय सहायता और पुनर्वास केंद्रों की मदद से मुक्त किया जा सकता है।

सामूहिक शक्ति पर बल

प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत प्रयास और सामूहिक अभियान के बीच अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि जब करोड़ों लोग कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं, तो वह ऊर्जा अकेले व्यक्ति की क्षमता से कहीं अधिक होती है। उन्होंने युवाओं को इस आंदोलन का 'लीडर' बताते हुए कहा, 'आप भारत की अमृतपीढ़ी हैं। आप ही 2047 में देश को विकसित भारत की मंजिल तक ले जाएंगे।'

गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवक और 'मायभारत' के लाखों वॉलंटियर्स भी शामिल हुए, जो अभियान की व्यापक जमीनी पहुँच को दर्शाता है।

शिक्षकों और परिवारों से आह्वान

मोदी ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों से विशेष अपील की कि वे पाठ्यक्रम के साथ-साथ छात्रों से ड्रग्स के खतरों पर खुलकर बात करें और अपने परिसरों में एक जागरूकता आंदोलन खड़ा करें। उन्होंने परिवारों को भी सलाह दी कि यदि घर का कोई बच्चा नशे का शिकार हो, तो इसे सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में न छिपाएँ, बल्कि तत्काल चिकित्सकीय मदद लें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवार में बच्चों से खुले संवाद की संस्कृति विकसित करना उतना ही जरूरी है, जितना नशे के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई।

सरकार की कार्रवाई और उपलब्धियाँ

मोदी ने बताया कि सरकार नशे के कारोबारियों के विरुद्ध सख्त कदम उठा रही है — पहले की तुलना में कई गुना अधिक गिरफ्तारियाँ हुई हैं और हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की गई हैं। उन्होंने योग और ध्यान को नशे के विरुद्ध आंतरिक शक्ति का स्रोत बताया और पुनर्वास केंद्रों की उपलब्धता का उल्लेख किया।

यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देश में मादक पदार्थों की तस्करी और युवाओं में नशे की लत की समस्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रही है। प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे को केवल कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के व्यापक एजेंडे से जोड़कर देख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि 100 रविवारों के बाद जमीन पर क्या बदला। भारत में नशामुक्ति के लिए पुनर्वास केंद्रों की संख्या और उनकी गुणवत्ता अभी भी माँग के अनुपात में बेहद कम है — यह अंतर सरकारी आँकड़ों में भी स्वीकार किया गया है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जागरूकता कार्यक्रम केवल मंच-भाषणों तक सीमित न रहें, बल्कि जिला और पंचायत स्तर पर ठोस पुनर्वास ढाँचे से जुड़ें। 1 करोड़ युवाओं की भागीदारी प्रभावशाली है, लेकिन बिना मापने योग्य परिणामों के यह संख्या भी महज एक आँकड़ा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'नशा मुक्त युवा से विकसित भारत संकल्प अभियान' क्या है?
यह PM नरेंद्र मोदी द्वारा 2 अगस्त 2026 को शुरू किया गया 100-हफ्ते का राष्ट्रीय अभियान है, जिसका उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के खतरों के प्रति जागरूक करना और उन्हें नशामुक्त जीवन की ओर प्रेरित करना है। यह 'विकसित भारत संकल्प अभियान' की एक प्रमुख पहल है।
यह अभियान कितने समय तक चलेगा और इसमें कौन शामिल है?
अभियान 100 रविवारों यानी लगभग दो वर्षों तक चलेगा। इसमें स्कूल-कॉलेज के छात्र, NSS स्वयंसेवक और 'मायभारत' के लाखों वॉलंटियर्स शामिल हैं — लॉन्च के दिन 1 करोड़ से अधिक युवा ऑनलाइन जुड़े।
यदि कोई युवा पहले से नशे की लत में है तो क्या करें?
PM मोदी ने स्पष्ट किया कि नशे की गिरफ्त में आने का मतलब सभी रास्तों का बंद होना नहीं है। परिवारों को सलाह दी गई कि इसे सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में न छिपाएँ और तत्काल चिकित्सकीय सहायता व पुनर्वास केंद्रों की मदद लें।
सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की है?
सरकार के अनुसार, नशे के कारोबारियों के विरुद्ध पहले की तुलना में कई गुना अधिक गिरफ्तारियाँ हुई हैं और हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की गई हैं। प्रधानमंत्री ने इसे ड्रग्स के विरुद्ध सरकार की सख्त नीति का प्रमाण बताया।
इस अभियान का विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से क्या संबंध है?
PM मोदी ने युवाओं को 'अमृतपीढ़ी' बताते हुए कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर है। नशामुक्त और स्वस्थ युवा शक्ति को उन्होंने इस लक्ष्य की अनिवार्य शर्त बताया।
राष्ट्र प्रेस
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