नशा मुक्त युवा अभियान को जयशंकर का समर्थन, बोले — नशामुक्त युवा पीढ़ी ही विकसित भारत की नींव
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 3 अगस्त 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' के प्रति अपना दृढ़ समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने इस 100 सप्ताह के राष्ट्रव्यापी अभियान को देश की युवा शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक पहल बताया।
जयशंकर का संदेश
जयशंकर ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा कि वे इस अभियान के आह्वान का दृढ़ता से समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान देश के युवाओं को सशक्त बनाने के सामूहिक संकल्प को दर्शाता है। उनके अनुसार, भारत के युवा ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति हैं और एक नशामुक्त, स्वस्थ तथा आत्मविश्वासी युवा पीढ़ी ही देश को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है।
अभियान का शुभारंभ
इससे एक दिन पहले, 2 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में देशभर के 28,000 से अधिक स्थानों से एक करोड़ से अधिक युवा जुड़े। प्रधानमंत्री ने इसे केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सामूहिक प्रतिबद्धता बताया।
अभियान की पृष्ठभूमि और विस्तार
गौरतलब है कि इस अभियान की शुरुआत पिछले वर्ष काशी से एक पायलट परियोजना के रूप में हुई थी। काशी घोषणा के तहत 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठनों और अनेक गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से यह जनआंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में युवाओं के बीच नशे की लत एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनती जा रही है।
अभियान की कार्ययोजना
प्रधानमंत्री ने बताया कि अगले 100 सप्ताह तक प्रत्येक रविवार को कला, संस्कृति, खेल, योग और ध्यान जैसी गतिविधियों के माध्यम से अधिक से अधिक युवाओं को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। नशा विरोधी शपथ लेने वाले युवाओं से आह्वान किया गया कि वे अपने विद्यालयों, महाविद्यालयों और समुदायों में नशामुक्त जीवन का संदेश फैलाएँ।
विकसित भारत से जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने युवाओं को भारत की 'अमृत पीढ़ी' बताते हुए कहा कि उनकी ऊर्जा, नवाचार और प्रतिभा ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के व्यापक हितों से जुड़ा हुआ है। शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सशक्त और नशीले पदार्थों से मुक्त युवा पीढ़ी को विकसित भारत की अनिवार्य शर्त बताया गया।