नशा मुक्त युवा अभियान: मनोज सिन्हा बोले — भारत की 65% युवा आबादी है असली ताकत
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2 अगस्त 2026 को श्रीनगर में आयोजित एक केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय समारोह में कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा पीढ़ी में निहित है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 65 प्रतिशत है। यह समारोह 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' के शुभारंभ के अवसर पर युवा मामले एवं खेल विभाग और SKUAST-कश्मीर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।
अभियान का शुभारंभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से इस 100 सप्ताह के मेगा अभियान का उद्घाटन किया, जो नशीले पदार्थों के खतरे को जड़ से समाप्त कर युवाओं को सशक्त बनाने के राष्ट्रव्यापी संकल्प का प्रतीक है। देशभर में लगभग 10,000 स्थानों पर 1 करोड़ से अधिक युवा इस अभियान से जुड़ रहे हैं। इसमें 35,000 से अधिक 'MY भारत' युवा क्लब, नेहरू युवा केंद्र, स्कूल, कॉलेज और उद्योग संगठन प्रतिभागी हैं, जो हर रविवार को युवाओं को एकजुट करते हैं।
युवाओं की भूमिका और राष्ट्र निर्माण
उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 37 करोड़ युवा राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य इन युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और विकास में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि 2020 में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया नशा मुक्त भारत अभियान महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि मादक पदार्थों के खिलाफ एक व्यापक सामाजिक आंदोलन है।
जम्मू-कश्मीर अभियान की उपलब्धियाँ
उपराज्यपाल ने 11 अप्रैल से 20 जुलाई तक चले 100 दिवसीय नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान की प्रमुख उपलब्धियाँ गिनाईं। इस दौरान लगभग 2,300 एफआईआर दर्ज की गईं, 2,600 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 1,500 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए। नशा तस्करों और आतंकवादियों से जुड़ी 331 से अधिक संपत्तियाँ जब्त की गईं, जिनका मूल्य लगभग ₹200 करोड़ बताया गया है। इसके अतिरिक्त, 370 से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस और 750 वाहन पंजीकरण रद्द किए गए तथा लगभग 3,000 आधार कार्ड रद्द करने की सिफारिशें की गई हैं।
पुनर्वास योजना की घोषणा
सिन्हा ने घोषणा की कि प्रशासन जल्द ही 'नशा मुक्ति पीड़ितों के लिए पुनर्वास एवं सामाजिक-आर्थिक एकीकरण योजना, 2026' शुरू करेगा। यह प्रायोगिक परियोजना कश्मीर और जम्मू डिवीजनों के सर्वाधिक प्रभावित जिलों से आरंभ होगी। तीन वर्षीय पुनर्वास चक्र के रूप में तैयार इस योजना में चिकित्सा उपचार, परामर्श, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और दीर्घकालिक निगरानी पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'मैं नशे से प्रभावित युवाओं को पीड़ित मानता हूँ और हमें उनकी गरिमा, आजीविका और एक सार्थक भविष्य सुनिश्चित करना होगा।'
समाज की सामूहिक जिम्मेदारी
उपराज्यपाल ने परिवारों, शिक्षकों और युवा संगठनों से युवाओं के मार्गदर्शन में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, धार्मिक नेताओं और नागरिकों के संयुक्त प्रयासों ने यह साबित किया है कि साझा उद्देश्य से बड़ी से बड़ी चुनौती पर भी काबू पाया जा सकता है। समारोह में उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को नशा मुक्त युवा शपथ भी दिलाई। इस अवसर पर SKUAST-कश्मीर के कुलपति प्रो. नजीर अहमद गनई, युवा सेवा एवं खेल विभाग के आयुक्त/सचिव डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी, कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग और MY भारत जम्मू-कश्मीर के निदेशक नितिन हैंग्लू सहित बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे। यह अभियान आने वाले महीनों में जम्मू-कश्मीर से पूरे देश के लिए एक मॉडल बनने की क्षमता रखता है।