दक्षिण अफ्रीका ने अमेरिकी वीजा पाबंदियों को किया खारिज, मंत्री लमोला बोले — संप्रभुता का सम्मान करे वॉशिंगटन
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध और सहयोग मंत्री रोनाल्ड लमोला ने 16 सितंबर 2026 को अमेरिकी वीजा पाबंदियों को दृढ़ता से अस्वीकार करते हुए कहा कि यह कदम उनके देश की घरेलू नीतियों की गलत व्याख्या पर आधारित है और कूटनीतिक संवाद को कमज़ोर करता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को एक नई नीति की घोषणा की थी, जिसके तहत 'नस्ल-आधारित भेदभाव' में कथित तौर पर संलिप्त दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
लमोला का बयान: किन बातों पर जताई आपत्ति
मंत्री लमोला ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिका का यह ऐलान उन हाशिए के समूहों की गलत व्याख्या के अनुरूप है, जो खुद को 'अल्पसंख्यकों' और सामान्य रूप से अफ्रीकानर्स का प्रतिनिधि बताते हैं। उन्होंने कहा, 'हम सभी दक्षिण अफ्रीकियों के लिए एक अधिक समान और समावेशी समाज बनाने के मकसद से अपने संवैधानिक संस्थानों, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और कानून के शासन के ज़रिए इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'
लमोला ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रिटोरिया अपेक्षा करता है कि वॉशिंगटन उसकी संप्रभुता, लोकतंत्र और संविधान का सम्मान करे — भले ही दोनों देशों के बीच नीतिगत मतभेद हों।
अमेरिकी पक्ष: रुबियो ने क्या कहा
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीकानर्स और अन्य अल्पसंख्यक आबादी के खिलाफ 'नस्लीय अपराधों और सरकार-प्रायोजित भेदभाव' को लेकर गहरी चिंता में है। रुबियो ने तीन मुद्दों का विशेष उल्लेख किया — नस्ल-आधारित भेदभावपूर्ण कानून, बिना मुआवज़े के ज़मीन जब्त करने की कथित धमकियाँ, और नस्लीय हिंसा भड़काने वाले नारों व भाषण।
गौरतलब है कि अफ्रीकानर्स दक्षिण अफ्रीका का एक श्वेत जातीय समूह है, जो मुख्यतः 17वीं सदी के बाद से केप क्षेत्र में आकर बसे डच, फ्रेंच और जर्मन मूल के लोगों के वंशज हैं।
द्विपक्षीय तनाव की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के संबंध पहले से ही कई मोर्चों पर तनावपूर्ण हैं। अमेरिकी प्रशासन ने दक्षिण अफ्रीकी सरकार पर श्वेत नागरिकों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है, जबकि प्रिटोरिया ने इन दावों को सिरे से नकार दिया है।
दक्षिण अफ्रीकी सरकार का कहना है कि न तो वह ज़मीन जब्त कर रही है और न ही 'लोगों के किसी खास वर्ग के साथ बुरा बर्ताव' हो रहा है। यह पहली बार नहीं है जब दोनों देशों के बीच घरेलू नीतियों को लेकर कूटनीतिक तनाव उभरा हो।
कूटनीति पर ज़ोर: लमोला का रचनात्मक संवाद का आह्वान
लमोला ने स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय संबंधों में आने वाली चुनौतियों को केवल कूटनीतिक माध्यमों से, दोनों सरकारों के प्रतिनिधियों के बीच रचनात्मक बातचीत के ज़रिए ही सुलझाया जा सकता है — एकतरफा कदमों से नहीं। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि चल रही द्विपक्षीय वार्ता यह दर्शाती है कि दोनों देश स्थायी समाधान को कितना महत्व देते हैं।
आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश कूटनीतिक चैनलों के ज़रिए इस विवाद को सुलझाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं।