17 जुलाई 2026
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वंदे मातरम् पर जबरदस्ती का विरोध: सैयद सैफ अब्बास नकवी बोले — कहने और न कहने दोनों के अधिकार का हो सम्मान

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वंदे मातरम् पर जबरदस्ती का विरोध: सैयद सैफ अब्बास नकवी बोले — कहने और न कहने दोनों के अधिकार का हो सम्मान

सारांश

शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने वंदे मातरम् को जबरदस्ती कहलवाने की कोशिश को संविधान की भावना के खिलाफ बताया। साथ ही झारखंड के एक मौलाना के विवादित बयान को 'निंदनीय' कहा और कोलकाता एयरपोर्ट मस्जिद विवाद पर भी धार्मिक नेताओं ने अपनी राय रखी।

मुख्य बातें

सैयद सैफ अब्बास नकवी ने 17 जुलाई 2026 को लखनऊ में कहा कि वंदे मातरम् पर बाध्यकारी कानून संविधान की भावना के खिलाफ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् कहने और न कहने — दोनों के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान भी नहीं होना चाहिए।
झारखंड के मौलाना जरजिस अंसारी के कथित विवादित बयान — जिसमें भगवान कृष्ण को मुस्लिम बताया गया — को नकवी ने 'दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय' करार दिया और माफी माँगने की अपील की।
कोलकाता एयरपोर्ट की 136 साल पुरानी बांकरा मस्जिद में प्रवेश पर रोक को मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने संविधान विरुद्ध बताया।
धार्मिक नेताओं ने राजनीतिक बहसों के धार्मिक मुद्दों की ओर मुड़ने से समाज में बढ़ते विभाजन पर चिंता जताई।

शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने 17 जुलाई 2026 को लखनऊ में स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् को लेकर कोई बाध्यकारी कानून नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जो लोग वंदे मातरम् कहते हैं उनका सम्मान होना चाहिए, और जो नहीं कहते उनके संवैधानिक अधिकारों की भी रक्षा होनी चाहिए।

वंदे मातरम् विवाद पर नकवी का रुख

नकवी ने कहा, 'वंदे मातरम् को मुद्दा बनाकर और लोगों से इसे जबरदस्ती कहलवाने की कोशिश करना हमारे संविधान की भावना के खिलाफ है। संविधान शिक्षा और आजादी की बात करता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी नागरिक को राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान नहीं करना चाहिए — यह भी उतना ही आवश्यक है।

उनके अनुसार, राजनीतिक बहसें अक्सर धार्मिक मुद्दों की ओर मुड़ जाती हैं, जिससे समाज में विभाजन गहरा होता है, जबकि देश में कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सख्त कानूनों और तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत है।

झारखंड वायरल वीडियो मामले पर प्रतिक्रिया

झारखंड से सामने आए एक वायरल वीडियो में मौलाना जरजिस अंसारी द्वारा कथित तौर पर भगवान कृष्ण को मुस्लिम और नमाज पढ़ने वाला बताए जाने पर नकवी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने उस बयान और वीडियो को 'दुर्भाग्यपूर्ण तथा निंदनीय' करार दिया।

नकवी ने कहा कि किसी भी धर्म की मान्यताओं और आस्थाओं को ठेस पहुँचाने वाले बयान नहीं दिए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योग और नमाज की तुलना करना तथा भगवद गीता के संदर्भ में ऐसी टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने मौलाना जरजिस अंसारी से सार्वजनिक रूप से अपना बयान वापस लेने और माफी माँगने की अपील की।

कोलकाता एयरपोर्ट मस्जिद विवाद

कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में स्थित 136 साल पुरानी बांकरा मस्जिद में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के मुद्दे पर इस्लामिक सेंटर के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों के हवाई अड्डों पर यात्रियों के लिए अलग प्रेयर रूम और नमाज की व्यवस्था होती है, और भारत में भी कई हवाई अड्डों पर ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में मौजूद मस्जिद को हटाने या वहाँ नमाज पर रोक लगाने की माँग संविधान की भावना के विरुद्ध है। उनके अनुसार, किसी धार्मिक स्थल को एकतरफा हटाना समाज में गलत संदेश देता है और मुसलमानों की पहचान को लेकर चिंता पैदा करता है।

व्यापक संदर्भ और महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने की माँग कई राज्यों में उठ रही है। गौरतलब है कि भारत के संविधान में वंदे मातरम् को राष्ट्रगान का दर्जा नहीं दिया गया है — यह राष्ट्रीय गीत है — और इसे गाने या न गाने को लेकर कोई केंद्रीय कानून अभी तक नहीं है। धार्मिक नेताओं की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि इस मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय के भीतर भी सूक्ष्म और विविध दृष्टिकोण मौजूद हैं।

आने वाले दिनों में इन बयानों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और संसदीय चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि धार्मिक असहमति। लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि झारखंड वायरल वीडियो की उनकी निंदा और कोलकाता मस्जिद मामले पर उनकी चुप्पी यह दर्शाती है कि धार्मिक नेता भी अपनी प्राथमिकताएँ चुनते हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बारीकी को चूक जाती है — वंदे मातरम् बहस को 'हिंदू बनाम मुस्लिम' के चश्मे से देखती है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या किसी लोकतंत्र में राष्ट्रीय प्रतीकों को कानूनी बाध्यता बनाया जा सकता है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैयद सैफ अब्बास नकवी ने वंदे मातरम् पर क्या कहा?
नकवी ने कहा कि वंदे मातरम् को जबरदस्ती कहलवाने की कोशिश संविधान की भावना के खिलाफ है। उनके अनुसार, जो लोग इसे कहते हैं उनका सम्मान हो और जो नहीं कहते उनके अधिकारों की भी रक्षा होनी चाहिए — साथ ही राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान भी नहीं होना चाहिए।
झारखंड वायरल वीडियो विवाद क्या है जिस पर नकवी ने प्रतिक्रिया दी?
झारखंड से एक वायरल वीडियो में मौलाना जरजिस अंसारी द्वारा कथित तौर पर भगवान कृष्ण को मुस्लिम और नमाज पढ़ने वाला बताया गया। नकवी ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय' बताते हुए मौलाना अंसारी से सार्वजनिक माफी माँगने की अपील की।
कोलकाता एयरपोर्ट की बांकरा मस्जिद विवाद क्या है?
कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में स्थित 136 साल पुरानी बांकरा मस्जिद में प्रवेश पर रोक लगाए जाने की माँग उठी है। इस्लामिक सेंटर के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने इसे संविधान की भावना के विरुद्ध बताया और कहा कि कई देशों के हवाई अड्डों पर नमाज की व्यवस्था होती है।
क्या भारत में वंदे मातरम् कहना कानूनी रूप से अनिवार्य है?
नहीं, वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है, राष्ट्रगान नहीं, और इसे गाने या न गाने को लेकर कोई केंद्रीय कानून अभी तक नहीं बना है। इसे अनिवार्य बनाने की माँग कई राज्यों में उठती रही है, लेकिन संवैधानिक विशेषज्ञ इस पर विभाजित हैं।
धार्मिक नेताओं के इन बयानों का क्या महत्व है?
ये बयान दर्शाते हैं कि मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व के भीतर भी राष्ट्रीय प्रतीकों, अंतर-धार्मिक संवाद और संवैधानिक अधिकारों पर सूक्ष्म और विविध दृष्टिकोण मौजूद हैं। नकवी जैसे नेताओं का यह स्वर राजनीतिक ध्रुवीकरण को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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