वंदे मातरम पर दंडात्मक कानून नहीं, संवाद ज़रूरी: शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास
सारांश
मुख्य बातें
शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने 17 जुलाई 2026 को लखनऊ में कई संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी — जिनमें 'वंदे मातरम' के अपमान पर सज़ा का प्रावधान करने वाला प्रस्तावित विधेयक, जौहर यूनिवर्सिटी पर संभावित बुलडोजर कार्रवाई और कांवड़ यात्रा शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धार्मिक और संवेदनशील मामलों का समाधान राजनीति या भेदभाव से नहीं, बल्कि संविधान और कानून के दायरे में होना चाहिए।
वंदे मातरम विधेयक पर रुख
प्रस्तावित विधेयक — जो 'वंदे मातरम' के अपमान पर दंडात्मक प्रावधान करता है — पर मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि मातृभूमि का सम्मान हर नागरिक का कर्तव्य है। उनके अनुसार, 'वंदे मातरम' का अर्थ है 'हे मातृभूमि, हम तुम्हें नमन करते हैं' और इस्लाम भी वतन से मोहब्बत की शिक्षा देता है।
हालांकि, उन्होंने दंडात्मक कानून का विरोध करते हुए कहा कि देशभक्ति किसी डर या सज़ा से नहीं, बल्कि स्वेच्छा और सम्मान की भावना से उत्पन्न होती है। उनके अनुसार, इस मामले में जागरूकता और संवाद अधिक प्रभावी उपाय हैं।
जौहर यूनिवर्सिटी और छात्रों का भविष्य
रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी में कथित अवैध निर्माण को लेकर संभावित बुलडोजर कार्रवाई पर मौलाना ने कहा कि उनकी चिंता किसी व्यक्ति विशेष का बचाव करना नहीं, बल्कि वहाँ अध्ययनरत छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखना है।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई कानूनी विवाद है, तो सरकार विश्वविद्यालय को अपने अधीन लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करे और जहाँ संभव हो, अवैध निर्माण को नियमों के अनुरूप वैध बनाने का प्रयास करे — ताकि छात्रों की शिक्षा बाधित न हो।
कांवड़ यात्रा पर अपील
कांवड़ यात्रा के संदर्भ में मौलाना यासूब अब्बास ने आम जनता और कांवड़ यात्रियों दोनों से जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर स्थानीय लोगों को श्रद्धालुओं को सुगमता से रास्ता देना चाहिए।
साथ ही, उन्होंने कांवड़ यात्रियों से भी अनुरोध किया कि वे किसी प्रकार का हुड़दंग, तोड़फोड़ या हिंसक व्यवहार न करें। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक वाहनों को हर परिस्थिति में रास्ता दिया जाना चाहिए, क्योंकि कांवड़ यात्रा आस्था का प्रतीक है — न कि व्यवधान का।
कोलकाता एयरपोर्ट मस्जिद और सहारनपुर विवाद
कोलकाता एयरपोर्ट के अंदर स्थित मस्जिद में प्रवेश पर अस्थायी रोक के संदर्भ में मौलाना ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सरकार बदल गई है और ऐसे फ़ैसले राजनीतिक वोट बैंक की दृष्टि से लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि नमाज़ को कोई नहीं रोक सकता और राज्य सरकार को नमाज़ियों के लिए उचित प्रेयर रूम की व्यवस्था करनी चाहिए।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित लगभग 70 वर्ष पुरानी मस्जिद को 30 दिनों के भीतर हटाने के अदालती आदेश पर मौलाना ने आपत्ति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि यदि निर्माण वास्तव में सरकारी भूमि पर हुआ था, तो उस समय संबंधित अधिकारियों ने इसे रोका क्यों नहीं — और ऐसे मामलों में अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
श्रीकृष्ण विवाद पर कार्रवाई का समर्थन
भगवान श्रीकृष्ण को 'पाँच वक्त का नमाज़ी' बताने वाले मौलवी पर दर्ज एफआईआर के बारे में मौलाना यासूब अब्बास ने कानूनी कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे धर्मगुरु जो सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करते हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, इस प्रकार की टिप्पणियाँ इस्लाम और धर्म दोनों की छवि को नुकसान पहुँचाती हैं और किसी के लिए लाभकारी नहीं हैं।
मौलाना का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक पहचान और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर कई विधायी और न्यायिक विमर्श एक साथ चल रहे हैं। आगे यह देखना होगा कि 'वंदे मातरम' विधेयक संसद में किस रूप में प्रस्तुत होता है और उस पर व्यापक राजनीतिक सहमति बन पाती है या नहीं।