मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का देशव्यापी आंदोलन का ऐलान, यूसीसी और वंदे मातरम पर कानूनी लड़ाई की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने 22 जून 2026 को नई दिल्ली में हुई कार्यकारिणी बैठक में मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्थलों और पर्सनल लॉ पर कथित हमलों को लेकर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का फैसला किया। बोर्ड ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी), वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के प्रयासों और भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के हालिया फैसले पर गहरी चिंता जताई।
बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले
बोर्ड की कार्यकारिणी ने निर्णय लिया कि मुस्लिम समुदाय की मौजूदा स्थिति, सांप्रदायिक तनाव और मौलिक अधिकारों के कथित उल्लंघन का एक विस्तृत दस्तावेज तैयार कर प्रकाशित किया जाएगा। बोर्ड के अनुसार, इस दस्तावेज के ज़रिए देश के लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखने वाले नागरिकों का ध्यान इन मुद्दों की ओर आकर्षित किया जाएगा।
देशव्यापी आंदोलन के संचालन के लिए एक एक्शन कमेटी गठित की जाएगी, जो विभिन्न सामाजिक और लोकतांत्रिक समूहों के साथ मिलकर रणनीति तय करेगी। बोर्ड ने यह भी कहा कि कई धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल इन मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए हैं, जो चिंताजनक है।
वंदे मातरम विवाद और कानूनी चेतावनी
बैठक में वंदे मातरम को सभी नागरिकों या छात्रों के लिए अनिवार्य बनाने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध किया गया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार या कोई राज्य सरकार इसे अनिवार्य करती है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
पश्चिम बंगाल में स्कूलों और सहायता प्राप्त मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य करने के सरकारी फैसले को बोर्ड ने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। बोर्ड ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश का स्वागत किया, जिसमें इस सरकारी अधिसूचना पर रोक लगाई गई है।
यूसीसी पर बोर्ड का रुख
बोर्ड ने उत्तराखंड और गुजरात के बाद अन्य राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारियों पर गंभीर चिंता जताई। बोर्ड का कहना है कि यूसीसी कोई अनिवार्य संवैधानिक प्रावधान नहीं है और यह धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
बोर्ड ने कहा कि जिस प्रकार उत्तराखंड के यूसीसी कानून को अदालत में चुनौती दी गई है, उसी प्रकार अन्य राज्यों में भी ऐसे कानूनों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था जिसने यूसीसी लागू किया।
भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद
कार्यकारिणी ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के हालिया फैसले पर चिंता व्यक्त की, जिसे बोर्ड ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की भावना के अनुरूप नहीं बताया। बोर्ड ने कमाल मौला मस्जिद कमेटी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर चुनौती का स्वागत करते हुए हर संभव कानूनी सहयोग देने का आश्वासन दिया।
नेतृत्व और उपस्थिति
बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने की, जबकि संचालन महासचिव मौलाना फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने किया। बैठक में अरशद मदनी, असदुद्दीन ओवैसी, सैयद सदातुल्लाह हुसैनी सहित देशभर से बोर्ड के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देश में यूसीसी, धार्मिक स्थलों के स्वामित्व विवाद और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज़ हो रही है। एक्शन कमेटी के गठन और आंदोलन की रूपरेखा तय होने के बाद आगे की कार्ययोजना स्पष्ट होगी।