10 अगस्त 2026
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एआईएमपीएलबी के देशव्यापी आंदोलन को जमात-ए-इस्लामी हिंद का समर्थन, हिंदू भाई भी होंगे शामिल

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एआईएमपीएलबी के देशव्यापी आंदोलन को जमात-ए-इस्लामी हिंद का समर्थन, हिंदू भाई भी होंगे शामिल

सारांश

एआईएमपीएलबी के देशव्यापी आंदोलन को जमात-ए-इस्लामी हिंद ने समर्थन दिया है। जमात उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने कहा — यूसीसी, मस्जिद तोड़फोड़ और मुसलमानों के हाशियाकरण के खिलाफ यह अभियान मुस्लिम और गैर-मुस्लिम दोनों मिलकर चलाएंगे। एक्शन कमेटी का गठन हो चुका है।

मुख्य बातें

जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने 23 जून को एआईएमपीएलबी के देशव्यापी आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।
एआईएमपीएलबी ने लोकतंत्र-प्रेमी वर्गों के साथ मिलकर एक एक्शन कमेटी बनाई है।
अभियान में मुसलमानों के साथ-साथ न्याय के पक्षधर हिंदू नागरिक भी शामिल होंगे।
बोर्ड ने यूसीसी को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया।
कार्यकारी समिति ने गुजरात, उत्तराखंड, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने की कोशिशों पर चिंता जताई।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) द्वारा मुसलमानों के कथित सामाजिक-राजनीतिक हाशियाकरण और मस्जिदों व मदरसों की तोड़फोड़ के विरुद्ध शुरू किए जा रहे देशव्यापी आंदोलन को जमात-ए-इस्लामी हिंद ने अपना समर्थन दे दिया है। जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने मंगलवार, 23 जून को नई दिल्ली में कहा कि यह अभियान केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि न्याय के पक्षधर हिंदू नागरिक भी इसमें भागीदार होंगे।

मुख्य घटनाक्रम

एआईएमपीएलबी की कार्यकारी समिति ने समाज के लोकतंत्र-प्रेमी और शांति-प्रेमी वर्गों के साथ मिलकर एक एक्शन कमेटी गठित की है। बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय किया गया कि इस आंदोलन का उद्देश्य 'नफरत और दुश्मनी को बढ़ावा देने, सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाने और मुसलमानों की जान, माल, सम्मान व गरिमा पर हो रहे हमलों' को सार्वजनिक रूप से उजागर करना है।

बैठक में यह भी कहा गया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को जबरन लागू करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी के विरुद्ध है। कार्यकारी समिति ने भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी के नाम पर जारी विधायी प्रयासों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।

जमात उपाध्यक्ष का बयान

मलिक मोतासिम खान ने कहा, "मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक महत्वपूर्ण संस्था है। अगर उन्होंने यह घोषणा नहीं भी की होती, तब भी यह काम तो करना ही था।" उन्होंने आगे कहा कि देश में यूसीसी को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है — गुजरात और उत्तराखंड के बाद अब असम में भी इसे लागू किया गया है और मध्य प्रदेश में तैयारियाँ जारी हैं।

उन्होंने कहा, "देश भर में मस्जिदें गिराई जा रही हैं, इसी तरह तोड़फोड़ जारी है। मुद्दा सिर्फ एक नहीं है। कई लोगों को गिरफ्तार किया जाता है और उन्हें जमानत नहीं मिलती — डर का माहौल है।"

अभियान का स्वरूप और उद्देश्य

मोतासिम खान के अनुसार इस अभियान का मकसद लोगों में 'भरोसा जगाना और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान बहाल करना' है। उन्होंने स्पष्ट किया, "यह अभियान सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं है — इसमें वे हिंदू भाई भी शामिल होंगे जो न्याय के पक्ष में खड़े हैं।" अभियान का व्यापक लक्ष्य स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, न्याय और धार्मिक आज़ादी की संवैधानिक गारंटियों की रक्षा करना बताया गया है।

आम जनता पर असर

यह आंदोलन ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में यूसीसी को लेकर बहस तेज़ है और धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच अपने व्यक्तिगत कानूनों के भविष्य को लेकर आशंकाएँ गहरी हो रही हैं। गौरतलब है कि एआईएमपीएलबी की इस पहल में यदि व्यापक गैर-मुस्लिम भागीदारी जुड़ती है, तो यह इसे एक संकीर्ण सामुदायिक आंदोलन से अलग पहचान दे सकती है।

आगे क्या होगा

एक्शन कमेटी के गठन के बाद अब देशभर में इस अभियान के तहत जन-संपर्क कार्यक्रम, संवाद और प्रदर्शन आयोजित किए जाने की संभावना है। बोर्ड की ओर से अभी तक आंदोलन की विस्तृत कार्ययोजना और तिथियों की घोषणा नहीं की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर एआईएमपीएलबी की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते रहे हैं क्योंकि यह निकाय सुधार की बजाय यथास्थिति का पक्षधर रहा है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस विरोधाभास को नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएमपीएलबी का देशव्यापी आंदोलन किसके खिलाफ है?
यह आंदोलन मुसलमानों के कथित सामाजिक-राजनीतिक हाशियाकरण, मस्जिदों व मदरसों की तोड़फोड़ और यूनिफॉर्म सिविल कोड को जबरन लागू किए जाने के विरुद्ध है। बोर्ड का कहना है कि यूसीसी संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी का उल्लंघन करता है।
जमात-ए-इस्लामी हिंद ने इस आंदोलन में क्या भूमिका निभाई है?
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने 23 जून को इस आंदोलन को औपचारिक समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह अभियान एआईएमपीएलबी की घोषणा से पहले भी ज़रूरी था और जमात इसमें सक्रिय भागीदार रहेगी।
क्या इस अभियान में गैर-मुस्लिम भी शामिल होंगे?
हाँ, मलिक मोतासिम खान ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल मुसलमानों के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि न्याय के पक्षधर हिंदू नागरिक भी इसमें शामिल होंगे और यह देश में असंवैधानिक कदमों के विरुद्ध एक साझा मंच होगा।
एआईएमपीएलबी की एक्शन कमेटी क्या है?
एआईएमपीएलबी की कार्यकारी समिति ने लोकतंत्र-प्रेमी और शांति-प्रेमी वर्गों के साथ मिलकर एक एक्शन कमेटी गठित की है, जो इस आंदोलन की रणनीति और कार्यक्रम तय करेगी। बोर्ड अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।
किन राज्यों में यूसीसी लागू किए जाने पर बोर्ड ने आपत्ति जताई है?
एआईएमपीएलबी की कार्यकारी समिति ने गुजरात, उत्तराखंड और असम में यूसीसी लागू किए जाने तथा मध्य प्रदेश में जारी तैयारियों पर चिंता व्यक्त की है। बोर्ड का कहना है कि भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी के नाम पर विधायी कोशिशें संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हैं।
राष्ट्र प्रेस
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