AIMPLB के देशव्यापी आंदोलन में सभी समुदाय शामिल होंगे: जमात-ए-इस्लामी हिंद
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के देशव्यापी आंदोलन की घोषणा के बाद जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने 23 जून को स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए हिंदू सहित सभी धार्मिक समुदायों को इसमें शामिल किया जाएगा। उनके अनुसार, यह अभियान स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा, न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक सिद्धांतों की सुरक्षा के लिए है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और आवश्यकता
मलिक मोतासिम खान ने कहा कि AIMPLB एक महत्वपूर्ण संस्था है और यदि उसने इस आंदोलन का ऐलान नहीं भी किया होता, तब भी वर्तमान परिस्थितियों में इस प्रकार का अभियान चलाना आवश्यक था। उनके अनुसार, देश में कई ऐसे मुद्दे एक साथ उभरे हैं जिनके कारण समाज में चिंता और असुरक्षा का वातावरण बना हुआ है।
समान नागरिक संहिता पर चिंता
खान ने कहा कि देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, गुजरात और उत्तराखंड में इसे लागू किया जा चुका है, जबकि असम में भी इसी दिशा में कदम उठाए गए हैं और मध्य प्रदेश में तैयारियाँ जारी हैं। उनका मानना है कि यह एक ऐसा विषय है जिस पर व्यापक संवाद और जनजागरूकता की आवश्यकता है।
मस्जिद ध्वस्तीकरण और गिरफ्तारियों पर आरोप
मलिक मोतासिम खान ने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों में मस्जिदों को तोड़े जाने की घटनाएँ सामने आ रही हैं और ध्वस्तीकरण की कार्रवाइयाँ जारी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उन्हें लंबे समय तक जमानत नहीं मिल पा रही है। इन परिस्थितियों के कारण लोगों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हुआ है।
अभियान का उद्देश्य और व्यापकता
खान ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करने के लिए प्रेरित करना और उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा करना है। उन्होंने कहा कि AIMPLB और अन्य सामाजिक संगठन विभिन्न समुदायों के लोगों से संवाद करेंगे और उन्हें साथ लेकर चलेंगे। यह आंदोलन चाहे किसी भी संगठन के नेतृत्व में हो, इसमें मुसलमानों के साथ-साथ हिंदू और अन्य समुदायों के लोग भी भागीदारी करेंगे।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब UCC को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि AIMPLB पहले भी कई बार संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अभियान चला चुका है, लेकिन इस बार का आंदोलन बहु-समुदायिक भागीदारी पर जोर देने के कारण अलग स्वरूप लेता दिख रहा है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि यह गठबंधन व्यापक जन-समर्थन जुटाने में कितना सफल होता है।