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एआईएमपीएलबी का राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान: मस्जिद-मदरसा विध्वंस और हाशियाकरण के खिलाफ

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एआईएमपीएलबी का राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान: मस्जिद-मदरसा विध्वंस और हाशियाकरण के खिलाफ

सारांश

एआईएमपीएलबी ने मस्जिदों-मदरसों के विध्वंस और मुसलमानों के हाशियाकरण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। साथ ही बोर्ड ने यूसीसी और वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के प्रयासों को संविधान के अनुच्छेद 25 के विरुद्ध बताते हुए कानूनी लड़ाई का संकल्प लिया।

मुख्य बातें

एआईएमपीएलबी ने 22 जून 2026 को मस्जिद-मदरसा विध्वंस और मुसलमानों के हाशियाकरण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की।
बोर्ड अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में समन्वय के लिए अलग कार्य समिति गठित की गई।
उत्तराखंड के यूसीसी कानून को नैनीताल उच्च न्यायालय में चुनौती देने के बाद बोर्ड ने असम , मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी कानूनी कार्रवाई का संकल्प लिया।
वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के प्रयासों को अनुच्छेद 25 का उल्लंघन बताते हुए बोर्ड ने न्यायालय जाने की चेतावनी दी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के वंदे मातरम अनिवार्यता पर अंतरिम रोक के आदेश का बोर्ड ने स्वागत किया।

अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने 22 जून 2026 को मुसलमानों के सामाजिक-राजनीतिक हाशियाकरण, मस्जिदों और मदरसों के विध्वंस तथा अन्य कथित अतिक्रमणों के विरुद्ध एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया। बोर्ड की कार्यकारी समिति की बैठक में यह संकल्प पारित किया गया और समन्वय के लिए एक अलग कार्य समिति गठित की गई।

बैठक में क्या हुआ

बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी की अध्यक्षता में हुई कार्यकारी समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। समिति ने 'घृणा और शत्रुता को बढ़ावा देने, सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाने तथा मुसलमानों के जीवन, संपत्ति, सम्मान और गरिमा पर हमलों' को उजागर करने को इस आंदोलन का केंद्रीय उद्देश्य बताया। बोर्ड ने लोकतंत्र-प्रेमी और शांतिप्रिय समाज के वर्गों के साथ मिलकर काम करने का भी इरादा जाहिर किया।

यूसीसी पर एआईएमपीएलबी का रुख

बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के विपरीत बताया गया। कार्यकारी समिति ने भाजपा-शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने की विधायी कोशिशों पर गहरी चिंता जताई। बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी यूसीसी लागू करने की तैयारियाँ चल रही हैं। बोर्ड ने संकल्प लिया कि जिस प्रकार उसने उत्तराखंड सरकार के यूसीसी कानून को नैनीताल उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, उसी तर्ज पर अन्य राज्यों में भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वंदे मातरम विवाद

बोर्ड ने वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के प्रयासों को भी संविधान के अनुच्छेद 25 के विरुद्ध करार दिया। बोर्ड का कहना है कि वंदे मातरम की विषयवस्तु इस्लाम के तौहीद (ईश्वर की एकता) के सिद्धांत से मेल नहीं खाती, इसलिए इस्लामी कानून में इसकी अनुमति नहीं है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार संसद के माध्यम से सभी नागरिकों या स्कूली छात्रों के लिए वंदे मातरम को अनिवार्य करने का कोई कदम उठाती है, तो वह न्यायालयों का रुख करेगा। इसी क्रम में, कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा पश्चिम बंगाल के स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य करने वाले निर्देश पर दिए गए अंतरिम रोक के आदेश का बोर्ड ने स्वागत किया।

मुसलमानों से अपील

बोर्ड ने मुसलमानों से आह्वान किया कि वे सहिष्णुता या देशभक्ति के नाम पर अपनी आस्था और धार्मिक विश्वासों से किसी भी प्रकार का समझौता न करें। गौरतलब है कि यह आंदोलन ऐसे समय में घोषित किया गया है जब देश में धार्मिक स्थलों के विध्वंस और यूसीसी को लेकर बहस तेज हो गई है। आने वाले हफ्तों में बोर्ड की कार्य समिति आंदोलन की रूपरेखा और रणनीति तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक संस्थागत रास्ता है; लेकिन जन-आंदोलन की घोषणा राजनीतिक दबाव की रणनीति भी हो सकती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बारीकियत को चूक जाती है कि वंदे मातरम और यूसीसी के मुद्दे कानूनी और धार्मिक दोनों धरातलों पर एक साथ लड़े जा रहे हैं — और इन दोनों मोर्चों पर न्यायालयों का रुख ही असली परिणाम तय करेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएमपीएलबी का राष्ट्रव्यापी आंदोलन किस मुद्दे पर है?
एआईएमपीएलबी ने मस्जिदों और मदरसों के विध्वंस, मुसलमानों के सामाजिक-राजनीतिक हाशियाकरण तथा यूसीसी और वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के प्रयासों के खिलाफ यह आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। बोर्ड की कार्यकारी समिति ने 22 जून 2026 को यह संकल्प पारित किया।
एआईएमपीएलबी यूसीसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कहाँ-कहाँ करेगा?
बोर्ड ने पहले ही उत्तराखंड के यूसीसी कानून को नैनीताल उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। अब उसने असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी इसी तरह के कानूनी कदम उठाने का संकल्प लिया है।
बोर्ड ने वंदे मातरम पर क्या रुख अपनाया है?
बोर्ड का कहना है कि वंदे मातरम की विषयवस्तु इस्लाम के तौहीद सिद्धांत से मेल नहीं खाती, इसलिए इसे अनिवार्य बनाना संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है। यदि केंद्र सरकार इसे संसद के माध्यम से अनिवार्य करती है, तो बोर्ड न्यायालय जाएगा।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के किस आदेश का बोर्ड ने स्वागत किया?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम गाने को अनिवार्य करने वाले सरकारी निर्देश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। एआईएमपीएलबी ने इस आदेश का स्वागत किया है।
एआईएमपीएलबी की कार्य समिति का क्या काम होगा?
कार्यकारी समिति ने आंदोलन के समन्वय के लिए एक अलग कार्य समिति गठित की है, जो लोकतंत्र-प्रेमी और शांतिप्रिय समाज के वर्गों के साथ मिलकर आंदोलन की रणनीति तय करेगी। इसकी विस्तृत रूपरेखा आने वाले हफ्तों में सामने आने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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