3 अगस्त 2026
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जमात-ए-इस्लामी हिंद की माँग: देशभर के विध्वंस अभियान तुरंत रोके जाएँ, सूरत में 106 मकान ढहाए गए

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जमात-ए-इस्लामी हिंद की माँग: देशभर के विध्वंस अभियान तुरंत रोके जाएँ, सूरत में 106 मकान ढहाए गए

सारांश

जमात-ए-इस्लामी हिंद ने देशभर के विध्वंस अभियानों पर गंभीर चिंता जताई है — सूरत में 3 दिन में 106 मकान और जयपुर में नूरानी मस्जिद ध्वस्त। संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय के पुनर्वास निर्देशों का हवाला देते हुए अभियान रोकने और प्रभावित परिवारों को राहत देने की माँग की।

मुख्य बातें

जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIIH) ने 16 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रेस वार्ता कर देशभर के विध्वंस अभियान तत्काल रोकने की माँग की।
सूरत के नासिर नगर में तीन दिनों में 106 मकान ध्वस्त; जयपुर में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर नूरानी मस्जिद गिराई गई।
प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास के बिना बेघर किया जा रहा है; सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही कहा है कि बिना पुनर्वास बेदखली नहीं होनी चाहिए।
JIIH उपाध्यक्ष सलीम इंजीनियर ने राज्यसभा उम्मीदवार के नामांकन खारिज होने को कथित तौर पर 'इतिहास में पहली बार' बताते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
APCR के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान ने पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद राजनीतिक हिंसा और दबाव की खबरों पर चिंता जताई।

जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIIH) के नेताओं ने मंगलवार, 16 जून 2026 को नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए देशभर में चल रहे विध्वंस अभियानों को तत्काल रोकने की माँग की। संगठन ने कहा कि दिल्ली, मुंबई, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में चलाए जा रहे इन अभियानों में प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास के बिना बेघर किया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

JIIH के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में दिल्ली, बांद्रा, फरीदाबाद, विरामगाम (गुजरात), गोरेगांव (महाराष्ट्र), वाराणसी, संभल, जयपुर, भायंदर, पीसीएमसी और इटावा में तोड़फोड़ अभियान चलाए गए। पिंपरी चिंचवड में अधिकारियों ने कई धार्मिक ढाँचों को नोटिस जारी किए और देर रात चलाए गए अभियान में उन्हें ध्वस्त कर दिया।

सूरत के नासिर नगर में महज तीन दिनों में 106 मकान ध्वस्त किए गए। जयपुर में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के नाम पर नूरानी मस्जिद को गिरा दिया गया। मोतसिम खान के अनुसार, कई प्रभावित परिवार बिना किसी उचित आश्रय और पुनर्वास की जानकारी के बेसहारा छोड़ दिए गए हैं।

आम जनता पर असर

संगठन ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच चलाए गए इन अभियानों ने पहले ही गहरी मुश्किलें पैदा कर दी हैं और मानसून के आगमन के साथ स्थिति और विकट होने की आशंका है। JIIH ने यह भी याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उचित पुनर्वास के बिना बेदखली नहीं की जानी चाहिए। संगठन ने नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों से प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता दिखाने का आग्रह किया।

राज्यसभा चुनाव और लोकतांत्रिक चिंताएँ

JIIH के उपाध्यक्ष सलीम इंजीनियर ने राज्यसभा चुनावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त, धन बल के दुरुपयोग, विधायकों को डराने-धमकाने और क्रॉस वोटिंग के आरोप बार-बार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में विपक्ष के एक राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन खारिज होना, जो कथित तौर पर इतिहास में पहली बार हुआ है, प्रक्रियात्मक निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है और एक खतरनाक मिसाल कायम करता है।

पश्चिम बंगाल की स्थिति पर चिंता

नागरिक अधिकार संरक्षण संघ (APCR) के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक निष्ठाओं को जबरन बदलने, विपक्षी दलों को तोड़ने और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सड़क स्तर पर हिंसा की खबरें आ रही हैं, जिससे भय और दबाव का माहौल बन रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संगठन का रुख

अमेरिका-ईरान शांति समझौते का स्वागत करते हुए सलीम इंजीनियर ने आशा व्यक्त की कि सभी पक्ष समझौते के प्रावधानों का पूर्णतः पालन करेंगे। उन्होंने भारत सरकार से शांति और संवाद को बढ़ावा देने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह गाजा और फिलिस्तीन में जारी मानवीय उल्लंघनों को नजरअंदाज न करे। JIIH ने संवैधानिक और लोकतांत्रिक ढाँचे के तहत सभी नागरिकों के अधिकारों, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा को राष्ट्रीय दायित्व बताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार आँकड़े ठोस हैं — सूरत में तीन दिन में 106 मकान और जयपुर में एक मस्जिद। सर्वोच्च न्यायालय के पुनर्वास निर्देशों के बावजूद यदि प्रभावित परिवार बेसहारा छोड़े जा रहे हैं, तो यह केवल एक समुदाय का नहीं, संवैधानिक प्रक्रिया का प्रश्न है। राज्यसभा नामांकन खारिज होने का मुद्दा और पश्चिम बंगाल में कथित राजनीतिक हिंसा — ये तीनों मुद्दे मिलकर एक बड़े सवाल की ओर इशारा करते हैं: क्या संस्थागत जवाबदेही के तंत्र उतनी तेज़ी से काम कर रहे हैं जितनी तेज़ी से ज़मीन पर घटनाएँ हो रही हैं?
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमात-ए-इस्लामी हिंद ने किन विध्वंस अभियानों पर आपत्ति जताई है?
JIIH ने दिल्ली, बांद्रा, फरीदाबाद, विरामगाम, गोरेगांव, वाराणसी, संभल, जयपुर, भायंदर, पिंपरी चिंचवड और इटावा में चलाए गए विध्वंस अभियानों पर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास के बिना बेघर किया जा रहा है।
सूरत के नासिर नगर में क्या हुआ?
सूरत के नासिर नगर में अधिकारियों ने तीन दिनों के भीतर 106 मकान ध्वस्त किए। JIIH उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान के अनुसार, प्रभावित परिवारों को पर्याप्त नोटिस या पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना यह कार्रवाई की गई।
सर्वोच्च न्यायालय ने विध्वंस और पुनर्वास पर क्या कहा है?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उचित पुनर्वास के बिना नागरिकों को बेदखल नहीं किया जाना चाहिए। JIIH ने इसी निर्देश का हवाला देते हुए माँग की है कि चल रहे विध्वंस अभियानों में इस आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए।
JIIH ने राज्यसभा चुनावों पर क्या चिंता जताई?
सलीम इंजीनियर ने कहा कि विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त, धन बल और डराने-धमकाने के आरोप चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं। विपक्ष के एक उम्मीदवार का नामांकन खारिज होना, जो कथित तौर पर इतिहास में पहली बार हुआ, को संगठन ने खतरनाक मिसाल बताया।
पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद की स्थिति पर JIIH का क्या कहना है?
APCR के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक निष्ठाएँ जबरन बदलवाने, विपक्षी दलों को तोड़ने और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सड़क स्तर पर हिंसा की खबरें आ रही हैं। उनके अनुसार इससे भय और दबाव का माहौल बन रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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