मुफ्ती वजाहत कासमी का बड़ा बयान: इटली बुर्का बैन, AIMPLB धरना और हामिद अंसारी पर खुलकर बोले
सारांश
मुख्य बातें
इस्लामिक विद्वान मुफ्ती वजाहत कासमी ने 21 सितंबर 2026 को तीन अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी — इटली के स्कूलों में बुर्का बैन, नई दिल्ली में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के यूसीसी-विरोधी धरने का स्थगित होना और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की 'हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता' वाली टिप्पणी। कासमी ने तीनों मुद्दों पर सीधे और बेबाक शब्दों में अपना पक्ष रखा, जो मुस्लिम समुदाय के भीतर से आने वाली असहमति की दृष्टि से उल्लेखनीय है।
इटली बुर्का बैन पर कासमी का रुख
इटली के स्कूलों में बुर्का पर प्रतिबंध के मुद्दे पर मुफ्ती कासमी ने कहा, 'हर मुल्क अपनी रक्षा-सुरक्षा में या अपने आप को सही करने के लिए कुछ चीज़ें करता है, तो हमें उस मुल्क के कानून का एहतराम करना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा, 'जाहिर सी बात है, इटली ने कोई कानून बनाया है तो वह अपने देश के हालात के मद्देनज़र बनाएगा, और इसलिए हम उसका सम्मान करेंगे।' यह रुख उन मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया से अलग है जो ऐसे प्रतिबंधों को धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं।
AIMPLB धरना स्थगित: कासमी की तीखी आलोचना
दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति न मिलने के बाद AIMPLB ने अपना प्रस्तावित यूसीसी (समान नागरिक संहिता) विरोधी धरना स्थगित कर दिया। इस पर कासमी ने बोर्ड की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हमेशा ट्रिपल तलाक से लेकर वक्फ बिल तक के मुद्दों पर भड़काता रहा है। बोर्ड के कई लोग हमेशा पीएम और सरकार के खिलाफ मुसलमानों को उकसाते रहे हैं और इस तरह की घटिया बयानबाज़ी की राजनीति करते हैं, जो नफरत फैलाने वाली है।'
कासमी ने यह भी कहा कि अनुमति न मिलने के बावजूद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर माहौल गर्म करने की कोशिश निंदनीय है। उनके अनुसार, 'मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को अपने अंदर भी झाँकना चाहिए कि उसमें जो लोग बैठे हैं, वे इस देश के लिए, इस कौम के लिए — खासतौर से मुस्लिम कौम के लिए — अच्छे लोग नहीं हैं।' गौरतलब है कि AIMPLB पिछले कई वर्षों से यूसीसी, ट्रिपल तलाक और वक्फ संशोधन जैसे मुद्दों पर आंदोलनकारी रुख अपनाता रहा है।
हामिद अंसारी की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की 'हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता' वाली टिप्पणी पर मुफ्ती कासमी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'जब से वह संवैधानिक पदों से हटे हैं, तब से लगातार हिन्दुओं को टारगेट कर रहे हैं। हामिद अंसारी को इस तरह की बयानबाज़ी शोभा नहीं देती।' कासमी ने यह भी कहा कि उन्हें तब ज़्यादा खुशी होती अगर अंसारी पहलगाम जैसी आतंकी घटनाओं, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के खिलाफ इतनी मुखरता से बोलते।
कासमी ने आगे कहा, 'यह अरब के पैसे पर चलने वाला देश नहीं है, यह तो टैक्स से चलने वाला और अपने हालात पर चलने वाला देश है। देश से सारी सुविधाएँ पाईं उन्होंने, और अब तक पा रहे हैं — फिर भी वह हमेशा हिन्दुओं को टारगेट करते रहे हैं। उन्हें नसीहत लेनी होगी और इस तरह की बयानबाज़ी से बचना होगा।' उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अंसारी के बयान को 'भारत की छवि खराब करने के एजेंडे का हिस्सा' बताए जाने पर कासमी ने सहमति जताई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
मुफ्ती कासमी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूसीसी, वक्फ संशोधन और मुस्लिम पर्सनल लॉ जैसे मुद्दों पर देश में व्यापक बहस चल रही है। कासमी जैसे इस्लामिक विद्वानों की ओर से AIMPLB की आलोचना असामान्य है और यह संकेत देती है कि समुदाय के भीतर भी बोर्ड की रणनीति पर मतभेद हैं। आलोचकों का कहना है कि बोर्ड की भड़काऊ राजनीति से मुस्लिम समुदाय की मुख्यधारा की छवि प्रभावित होती है।
आगे क्या
AIMPLB के धरने के स्थगन के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि बोर्ड यूसीसी के खिलाफ अपनी अगली कार्रवाई कब और कैसे करेगा। हामिद अंसारी की टिप्पणी पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ जारी हैं और यह मामला आने वाले दिनों में और चर्चा में रहने की संभावना है।