6 नवंबर 2026
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राम कुमार सिंह हत्याकांड: मुख्य शूटर पवन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल, ₹7 लाख की सुपारी का खुलासा

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राम कुमार सिंह हत्याकांड: मुख्य शूटर पवन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल, ₹7 लाख की सुपारी का खुलासा

सारांश

भोजपुर में कस्टम अधिकारी राम कुमार सिंह की ₹7 लाख की सुपारी देकर हत्या का मुख्य शूटर पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ। अब तक पाँच गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। हत्या की जड़ में सिंगही की विवादित जमीन है, जिसकी पावर ऑफ अटॉर्नी के ज़रिये रजिस्ट्री विपक्षी पक्ष ने कराई थी।

मुख्य बातें

6 नवंबर 2026 को सारंगपुर मोड़ के निकट पुलिस मुठभेड़ में राम कुमार सिंह हत्याकांड का मुख्य शूटर पवन यादव (22 वर्ष) घायल।
हत्या की सुपारी करीब ₹7 लाख में तय हुई थी; पहली किस्त में ₹2 लाख हथियार खरीदने के लिए दिए गए।
अब तक 5 आरोपी गिरफ्तार — मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की, चंदन सिंह, अभिषेक कुमार, टीपू और पिंटू कुमार; चंदन व अभिषेक को कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा गया।
हत्या की मूल वजह सिंगही स्थित 14 कट्ठा जमीन का विवाद; वर्ष 2025 में विपक्षी पक्ष ने पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर रजिस्ट्री व म्यूटेशन कराया।
मामले में एसडीपीओ सदर-1 के नेतृत्व में एसआईटी गठित; भोजपुर एसपी अवधेश दीक्षित खुद जाँच की निगरानी कर रहे हैं।
फरार शूटरों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की छापेमारी जारी।

भोजपुर जिले में कस्टम विभाग के सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमिश्नर राम कुमार सिंह हत्याकांड में बिहार पुलिस को 6 नवंबर 2026 की अलसुबह बड़ी सफलता हाथ लगी, जब बहोरनपुर थाना क्षेत्र के सारंगपुर मोड़ के निकट हुई मुठभेड़ में मामले का मुख्य शूटर घायल हो गया। घायल शूटर की पहचान नवादा थाना क्षेत्र के चंदवा हाउसिंग निवासी निर्मल यादव के 22 वर्षीय पुत्र पवन यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे तत्काल आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसके दाहिने पैर में घुटने के नीचे लगी गोली का उपचार चल रहा है।

मुठभेड़ का घटनाक्रम

भोजपुर पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने मौके पर पहुँचकर बताया कि पवन यादव ने पूछताछ के दौरान हत्या में इस्तेमाल हथियार छिपाने की जगह का खुलासा किया था। पुलिस टीम उसे हथियार बरामदगी के लिए उसी स्थान पर लेकर गई थी। इसी दौरान मौका पाकर पवन यादव ने पुलिस दल पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की ओर से चेतावनी दिए जाने के बावजूद गोलीबारी जारी रहने पर आत्मरक्षा में पुलिसकर्मियों ने उसके पैर में गोली मारी।

₹7 लाख की सुपारी और हत्या की साजिश

एसपी दीक्षित ने खुलासा किया कि मुख्य आरोपी चंदन सिंह समेत अन्य नामजद अभियुक्तों ने मिलकर राम कुमार सिंह की हत्या की सुपारी दी थी। कुल सुपारी की रकम करीब ₹7 लाख तय हुई थी, जिसमें से पहली किस्त में ₹2 लाख पिस्टल और अन्य सामग्री खरीदने के लिए अग्रिम रूप से दिए गए। हत्या से पहले सभी आरोपियों ने एक साथ बैठकर पूरी साजिश रची थी। गौरतलब है कि 15 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 6 बजे आरा के नवादा थाना क्षेत्र अंतर्गत कनकपुरी मोहल्ले में जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के निकट राम कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

अब तक पाँच गिरफ्तारियाँ, एसआईटी जाँच जारी

इस मामले में अब तक पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पहले मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की को घटना के तुरंत बाद पकड़ा गया था। इसके बाद छापेमारी में चंदन सिंह और अभिषेक कुमार को कोलकाता एयरपोर्ट से, तथा टीपू (पिता रामाधार सिंह, चंदवा हाउसिंग कॉलोनी) को भोजपुर के टाउन इलाके से पकड़ा गया। इससे पहले भोजपुर के कोईलवर इलाके से शूटर पिंटू कुमार को भी गिरफ्तार किया गया था, जो चंदन सिंह का दोस्त है। पिंटू के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास और शराब मामलों समेत करीब दस संगीन मामले दर्ज हैं। उसके घर से एक देशी कट्टा और दो कारतूस भी बरामद हुए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ सदर-1 के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई है।

जमीन विवाद — हत्या की जड़

जाँच में सामने आया है कि हत्या की मूल वजह भोजपुर के सिंगही में स्थित विवादित जमीन है। वर्ष 2006 से यह जमीन राम कुमार सिंह के बेटे के नाम पर थी और वर्ष 2020 में उन्होंने जमीन की घेराबंदी भी कराई थी। पुलिस जाँच के अनुसार, विपक्षी पक्ष ने वर्ष 2025 में इस जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल की और उसके आधार पर अलग-अलग व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री व म्यूटेशन करा लिया। एसपी दीक्षित ने कहा कि पुलिस यह जाँच कर रही है कि जब राम कुमार सिंह का दीर्घकाल से जमीन पर कब्जा था, तब यह रजिस्ट्री और म्यूटेशन किस आधार पर सम्भव हुई। 14 कट्ठा जमीन में जितने भी लोगों की हिस्सेदारी है, उन सभी को चिह्नित कर लिया गया है।

आगे क्या होगा

एसपी अवधेश दीक्षित ने कहा है कि पकड़े गए शूटर पवन यादव की जानकारी के आधार पर फरार अन्य शूटरों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है और जल्द ही पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया जाएगा। इस मामले का व्यापक नेटवर्क — सुपारी देने वाले, हथियार मुहैया कराने वाले और साजिश में शामिल अन्य व्यक्ति — अभी भी पुलिस की जाँच के दायरे में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसके जीवित रहते विपक्षी पक्ष ने पावर ऑफ अटॉर्नी के ज़रिये रजिस्ट्री और म्यूटेशन करा लिया — यह राजस्व विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कोलकाता एयरपोर्ट से आरोपियों की गिरफ्तारी यह भी संकेत देती है कि अपराध के बाद भागने का नेटवर्क सुनियोजित था। असली परीक्षा अब यह है कि क्या जाँच सुपारी देने वाले के पीछे के असली सूत्रधारों तक पहुँचेगी, या केवल निचले स्तर के शूटरों तक ही सीमित रहेगी।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम कुमार सिंह की हत्या कब और कहाँ हुई थी?
15 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 6 बजे आरा के नवादा थाना क्षेत्र अंतर्गत कनकपुरी मोहल्ले में जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के पास राम कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या की गई थी। वे कस्टम विभाग के सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमिश्नर थे।
शूटर पवन यादव को कैसे घायल किया गया?
पवन यादव को पुलिस हथियार की बरामदगी के लिए सारंगपुर मोड़ ले गई थी, जहाँ मौका पाकर उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। चेतावनी के बावजूद गोलीबारी जारी रहने पर आत्मरक्षा में पुलिस ने उसके दाहिने पैर में गोली मारी और उसे आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इस हत्याकांड में सुपारी की रकम कितनी थी?
भोजपुर एसपी अवधेश दीक्षित के अनुसार, राम कुमार सिंह की हत्या के लिए करीब ₹7 लाख की सुपारी दी गई थी। पहली किस्त में ₹2 लाख हथियार और अन्य ज़रूरी सामान खरीदने के लिए अग्रिम दिए गए थे।
हत्या की मुख्य वजह क्या थी?
पुलिस जाँच में हत्या की मुख्य वजह भोजपुर के सिंगही में स्थित 14 कट्ठा जमीन का विवाद सामने आई है। विपक्षी पक्ष ने वर्ष 2025 में पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर उस जमीन की रजिस्ट्री और म्यूटेशन अलग-अलग लोगों के नाम करा लिया था, जबकि वर्ष 2006 से यह जमीन राम कुमार सिंह के बेटे के नाम थी।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक पाँच आरोपी गिरफ्तार हुए हैं — मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की, चंदन सिंह, अभिषेक कुमार, टीपू और शूटर पिंटू कुमार। चंदन सिंह और अभिषेक को कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा गया, जबकि मुठभेड़ में घायल शूटर पवन यादव को मिलाकर यह संख्या अब छह हो गई है। फरार अन्य शूटरों की तलाश जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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