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पंजाब में पराली जलाने के 2,787 मामले दर्ज, ₹46.10 लाख जुर्माना और 710 FIR; तरनतारन सबसे आगे

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पंजाब में पराली जलाने के 2,787 मामले दर्ज, ₹46.10 लाख जुर्माना और 710 FIR; तरनतारन सबसे आगे

सारांश

कागज़ पर कार्रवाई बड़ी है — 2,787 घटनाएँ, ₹46.10 लाख जुर्माना, 710 FIR — लेकिन 87% फसल कट चुकने के बाद भी पंजाब में पराली जलाना थमा नहीं। तरनतारन, फिरोज़पुर और संगरूर सबसे आगे हैं। असली सवाल यह है कि दंडात्मक उपाय बिना ठोस विकल्प के कितने कारगर हैं।

मुख्य बातें

PPCB की 5 नवंबर 2026 तक की रिपोर्ट में पंजाब में पराली जलाने की कुल 2,787 घटनाएँ दर्ज।
914 मामलों में ₹46.10 लाख का पर्यावरणीय मुआवज़ा; अब तक ₹24.85 लाख वसूले गए।
BNS धारा 223 के तहत 710 FIR दर्ज; 829 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री।
तरनतारन 586 घटनाओं के साथ सर्वाधिक प्रभावित जिला; इसके बाद फिरोज़पुर ( 361 ) और संगरूर ( 240 )।
पंजाब के कुल 32.87 लाख हेक्टेयर धान रकबे में से 87.60% की कटाई 5 नवंबर तक पूरी।
18 मामलों में अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन कार्रवाई प्रारंभ; 786 चेतावनी नोटिस जारी।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) द्वारा 5 नवंबर 2026 तक जारी आँकड़ों के अनुसार, राज्य में धान की पराली जलाने की कुल 2,787 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। प्रशासन ने इन मामलों में ₹46.10 लाख का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया है और 710 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं — फिर भी राज्य के कई जिलों में खेतों में आग लगाने की घटनाएँ थमती नहीं दिख रहीं।

मुख्य आँकड़े एवं कार्रवाई

PPCB की रिपोर्ट के अनुसार 2,194 स्थानों पर फील्ड निरीक्षण किया गया, जिनमें से 994 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। कुल 914 मामलों में पर्यावरणीय मुआवज़े के तहत जुर्माना लगाया गया, जिसमें से अब तक ₹24.85 लाख की वसूली हो चुकी है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के अंतर्गत 710 FIR दर्ज की गई हैं, जबकि 829 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। इसके अतिरिक्त 786 चेतावनी नोटिस अथवा कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और 18 मामलों में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई प्रारंभ हुई है।

जिलावार स्थिति: तरनतारन सबसे ऊपर

जिलावार आँकड़ों में तरनतारन जिला 586 घटनाओं के साथ सर्वाधिक प्रभावित है, जहाँ 553 स्थानों का निरीक्षण हुआ और 294 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। इसके बाद फिरोज़पुर में 361, संगरूर में 240, अमृतसर में 221 और बठिंडा में 216 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। फिरोज़पुर में 163 और संगरूर में 49 स्थानों पर जलाने की पुष्टि हुई है।

पटियाला में स्थानीय कार्रवाई

पटियाला में पराली जलाने की 156 घटनाएँ दर्ज हुई हैं। इनमें से 103 स्थानों का फील्ड निरीक्षण किया गया और 59 स्थानों पर पुष्टि हुई। जिले में 42 मामलों में कुल ₹2.15 लाख का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया, जिसमें से ₹70 हजार की वसूली हो चुकी है। 27 FIR दर्ज की गई हैं, 16 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है और 25 चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए हैं।

फसल कटाई की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में धान का कुल रकबा 32.87096 लाख हेक्टेयर है। 5 नवंबर 2026 तक इसमें से 87.60 प्रतिशत क्षेत्र में फसल की कटाई पूरी हो चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तरों पर पहुँच रहा है और पराली जलाने को इस प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।

आगे की राह: चुनौती बरकरार

गौरतलब है कि PPCB के बहु-आयामी दृष्टिकोण — निरीक्षण, जुर्माना, FIR और रेड एंट्री — के बावजूद घटनाएँ जारी हैं। आलोचकों का कहना है कि किसानों के पास पराली प्रबंधन के वैकल्पिक साधनों तक पहुँच और उनकी आर्थिक व्यवहार्यता सुनिश्चित किए बिना केवल罚ात्मक कार्रवाई टिकाऊ समाधान नहीं दे सकती। आने वाले हफ्तों में, जैसे-जैसे शेष 12.40 प्रतिशत रकबे की कटाई होगी, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या प्रवर्तन का दबाव घटनाओं की संख्या में वास्तविक गिरावट ला पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर यह भी उजागर करते हैं कि दंडात्मक उपाय अकेले पर्याप्त नहीं हैं — ₹46.10 लाख के जुर्माने में से आधे से भी कम वसूल हो पाए हैं। गौरतलब है कि पंजाब में पराली जलाने पर सख्ती का यह सिलसिला वर्षों से चल रहा है, फिर भी हर सीज़न में हज़ारों घटनाएँ सामने आती हैं। इसकी जड़ में आर्थिक मजबूरी है — धान की कटाई के बाद रबी बुआई के लिए किसान के पास समय कम होता है और पराली प्रबंधन की मशीनरी सभी तक नहीं पहुँचती। जब तक सस्ती और सुलभ वैकल्पिक तकनीक हर छोटे किसान तक नहीं पहुँचती, तब तक FIR और रेड एंट्री की यह सालाना कवायद एक लाक्षणिक उपचार ही बनी रहेगी।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में इस सीज़न पराली जलाने की कितनी घटनाएँ दर्ज हुई हैं?
PPCB की 5 नवंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पराली जलाने की कुल 2,787 घटनाएँ दर्ज हुई हैं। इनमें से 994 स्थानों पर फील्ड निरीक्षण में पराली जलाने की पुष्टि भी हो चुकी है।
पराली जलाने पर कितना जुर्माना लगाया गया है और वसूली कितनी हुई?
914 मामलों में पर्यावरणीय मुआवज़े के तहत कुल ₹46.10 लाख का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से 5 नवंबर तक ₹24.85 लाख की वसूली हो चुकी है, यानी आधे से थोड़ा अधिक।
पराली जलाने पर FIR किस कानून के तहत दर्ज की जा रही है?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत राज्यभर में 710 FIR दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 829 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी की गई है।
पंजाब में सबसे अधिक पराली जलाने की घटनाएँ किस जिले में हुई हैं?
तरनतारन जिला 586 घटनाओं के साथ सबसे आगे है, जहाँ 294 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। इसके बाद फिरोज़पुर (361), संगरूर (240), अमृतसर (221) और बठिंडा (216) का स्थान है।
पंजाब में धान की फसल कटाई की स्थिति क्या है?
पंजाब में धान का कुल रकबा 32.87 लाख हेक्टेयर है। 5 नवंबर 2026 तक इसमें से 87.60 प्रतिशत क्षेत्र में कटाई पूरी हो चुकी है। शेष रकबे की कटाई के साथ आने वाले हफ्तों में पराली जलाने की घटनाओं में और बदलाव संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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