पंजाब में पराली जलाने के 2,787 मामले दर्ज, ₹46.10 लाख जुर्माना और 710 FIR; तरनतारन सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) द्वारा 5 नवंबर 2026 तक जारी आँकड़ों के अनुसार, राज्य में धान की पराली जलाने की कुल 2,787 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। प्रशासन ने इन मामलों में ₹46.10 लाख का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया है और 710 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं — फिर भी राज्य के कई जिलों में खेतों में आग लगाने की घटनाएँ थमती नहीं दिख रहीं।
मुख्य आँकड़े एवं कार्रवाई
PPCB की रिपोर्ट के अनुसार 2,194 स्थानों पर फील्ड निरीक्षण किया गया, जिनमें से 994 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। कुल 914 मामलों में पर्यावरणीय मुआवज़े के तहत जुर्माना लगाया गया, जिसमें से अब तक ₹24.85 लाख की वसूली हो चुकी है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के अंतर्गत 710 FIR दर्ज की गई हैं, जबकि 829 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। इसके अतिरिक्त 786 चेतावनी नोटिस अथवा कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और 18 मामलों में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई प्रारंभ हुई है।
जिलावार स्थिति: तरनतारन सबसे ऊपर
जिलावार आँकड़ों में तरनतारन जिला 586 घटनाओं के साथ सर्वाधिक प्रभावित है, जहाँ 553 स्थानों का निरीक्षण हुआ और 294 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। इसके बाद फिरोज़पुर में 361, संगरूर में 240, अमृतसर में 221 और बठिंडा में 216 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। फिरोज़पुर में 163 और संगरूर में 49 स्थानों पर जलाने की पुष्टि हुई है।
पटियाला में स्थानीय कार्रवाई
पटियाला में पराली जलाने की 156 घटनाएँ दर्ज हुई हैं। इनमें से 103 स्थानों का फील्ड निरीक्षण किया गया और 59 स्थानों पर पुष्टि हुई। जिले में 42 मामलों में कुल ₹2.15 लाख का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया, जिसमें से ₹70 हजार की वसूली हो चुकी है। 27 FIR दर्ज की गई हैं, 16 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है और 25 चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए हैं।
फसल कटाई की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में धान का कुल रकबा 32.87096 लाख हेक्टेयर है। 5 नवंबर 2026 तक इसमें से 87.60 प्रतिशत क्षेत्र में फसल की कटाई पूरी हो चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तरों पर पहुँच रहा है और पराली जलाने को इस प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।
आगे की राह: चुनौती बरकरार
गौरतलब है कि PPCB के बहु-आयामी दृष्टिकोण — निरीक्षण, जुर्माना, FIR और रेड एंट्री — के बावजूद घटनाएँ जारी हैं। आलोचकों का कहना है कि किसानों के पास पराली प्रबंधन के वैकल्पिक साधनों तक पहुँच और उनकी आर्थिक व्यवहार्यता सुनिश्चित किए बिना केवल罚ात्मक कार्रवाई टिकाऊ समाधान नहीं दे सकती। आने वाले हफ्तों में, जैसे-जैसे शेष 12.40 प्रतिशत रकबे की कटाई होगी, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या प्रवर्तन का दबाव घटनाओं की संख्या में वास्तविक गिरावट ला पाता है।