5 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंजाब में पराली जलाने के 2,347 मामले, पीपीसीबी ने ₹40.37 लाख जुर्माना लगाया; तरनतारन सबसे आगे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंजाब में पराली जलाने के 2,347 मामले, पीपीसीबी ने ₹40.37 लाख जुर्माना लगाया; तरनतारन सबसे आगे

सारांश

पंजाब में धान की कटाई जोरों पर है और साथ ही पराली जलाने की घटनाएँ भी — 4 नवंबर तक 2,347 मामले दर्ज, ₹40.37 लाख जुर्माना, 647 एफआईआर। तरनतारन सबसे ऊपर 558 मामलों के साथ। 85% कटाई पूरी होने के बाद भी आग थमी नहीं।

मुख्य बातें

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की 4 नवंबर 2026 तक की रिपोर्ट में राज्य में पराली जलाने की 2,347 घटनाएँ दर्ज।
कुल ₹40.37 लाख का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया; अब तक ₹23.05 लाख की वसूली।
प्रशासन ने 647 एफआईआर दर्ज कीं, 723 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री, 689 चेतावनी नोटिस जारी।
तरनतारन में सर्वाधिक 558 मामले; इसके बाद फिरोजपुर (316), अमृतसर (207), बठिंडा (167), संगरूर (163)।
राज्य के 32.87 लाख हेक्टेयर धान क्षेत्र में से 85.10% में कटाई पूरी, शेष क्षेत्र में और घटनाओं की आशंका।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की 4 नवंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पराली जलाने की कुल 2,347 घटनाएँ दर्ज की जा चुकी हैं और इन मामलों में ₹40.37 लाख का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है। धान की कटाई के बीच पराली प्रबंधन प्रशासन के लिए अब भी एक अनसुलझी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि राज्य के कुल 32.87 लाख हेक्टेयर धान क्षेत्र में से 85.10 प्रतिशत में कटाई पूरी हो जाने के बावजूद खेतों में आग की घटनाएँ थमी नहीं हैं।

मुख्य आँकड़े और कार्रवाई

पीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक ₹23.05 लाख की वसूली की जा चुकी है। विभाग ने राज्यभर में 1,942 खेतों का निरीक्षण किया, जिनमें 868 स्थानों पर आग लगने की पुष्टि हुई। 801 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है।

प्रशासनिक कार्रवाई के तहत 647 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि 723 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। इसके अतिरिक्त 689 चेतावनी नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। आँकड़े बताते हैं कि निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई के बावजूद खेतों में आग पर पूर्ण नियंत्रण अभी भी दूर है।

सर्वाधिक प्रभावित जिले

तरनतारन जिले में पराली जलाने की सर्वाधिक 558 घटनाएँ दर्ज हुई हैं, जो राज्य में सबसे ऊपर है। इसके बाद फिरोजपुर में 316, अमृतसर में 207, बठिंडा में 167 और संगरूर में 163 मामले सामने आए हैं।

यह वितरण दर्शाता है कि पराली जलाने की समस्या किसी एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के कई प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में एक साझा चुनौती है।

पटियाला की स्थिति

पटियाला में अब तक पराली जलाने की 110 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। विभाग ने 67 स्थानों का निरीक्षण किया, जिनमें 24 स्थानों पर आग की पुष्टि हुई। 15 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है।

जिले में कुल ₹80,000 का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से ₹35,000 की वसूली हो चुकी है। इसके साथ ही 21 एफआईआर दर्ज की गई हैं, 10 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है और 25 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि पराली जलाना हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में उत्तर भारत में, विशेषतः दिल्ली-एनसीआर में, वायु प्रदूषण को गंभीर स्तर तक पहुँचाने का एक प्रमुख कारण माना जाता रहा है। पंजाब में धान का विशाल उत्पादन क्षेत्र और कटाई के बाद पराली निपटान के सीमित विकल्प इस समस्या को बल देते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें दोनों किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक साधन — जैसे बायो-डीकंपोज़र, हैप्पी सीडर और बेलिंग मशीनें — उपलब्ध कराने पर करोड़ों खर्च कर रही हैं। इसके बावजूद तत्काल और सस्ते उपाय के रूप में आग लगाना किसानों की पहली पसंद बनी हुई है।

आगे की राह

पीपीसीबी के आँकड़ों के अनुसार, शेष 14.90 प्रतिशत धान क्षेत्र में कटाई अभी बाकी है, जिसका अर्थ है कि आने वाले दिनों में पराली जलाने की और घटनाएँ सामने आ सकती हैं। विभाग की ओर से निरीक्षण, एफआईआर, रेड एंट्री और चेतावनी नोटिस जारी करने का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2,347 घटनाओं के सामने यह दंडात्मक ढाँचा बेहद पतला पड़ता है। असली सवाल यह है कि वैकल्पिक पराली प्रबंधन के लिए सरकारी सब्सिडी और मशीनें किसानों तक पर्याप्त मात्रा में पहुँच पाई हैं या नहीं — क्योंकि जब तक खेत खाली करना महँगा और समय लेने वाला रहेगा, आग सबसे आसान रास्ता बनी रहेगी। तरनतारन और फिरोजपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में सबसे अधिक घटनाएँ यह भी संकेत देती हैं कि जागरूकता अभियान और संसाधन वितरण में भौगोलिक असमानता बनी हुई है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में पराली जलाने की कितनी घटनाएँ दर्ज हुई हैं?
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 4 नवंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पराली जलाने की कुल 2,347 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इनमें सर्वाधिक 558 मामले तरनतारन जिले में हैं।
पीपीसीबी ने पराली जलाने पर कितना जुर्माना लगाया है?
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पराली जलाने के मामलों में ₹40.37 लाख का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। इसमें से अब तक ₹23.05 लाख की वसूली की जा चुकी है।
प्रशासन ने पराली जलाने पर क्या कार्रवाई की है?
प्रशासन ने 647 एफआईआर दर्ज की हैं, 723 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है और 689 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा 1,942 खेतों का निरीक्षण और 801 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है।
पटियाला में पराली जलाने की स्थिति क्या है?
पटियाला में अब तक 110 घटनाएँ दर्ज हुई हैं। कुल ₹80,000 जुर्माना लगाया गया है जिसमें से ₹35,000 की वसूली हो चुकी है, 21 एफआईआर दर्ज हैं और 25 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।
पंजाब में धान की कटाई कितनी पूरी हुई है?
पीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुल 32.87 लाख हेक्टेयर धान क्षेत्र में से 85.10 प्रतिशत में कटाई पूरी हो चुकी है। शेष क्षेत्र में कटाई जारी रहने के साथ पराली जलाने की और घटनाएँ आने की आशंका बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 22 घंटे पहले
  2. 5 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 4 सप्ताह पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले