अमित शाह करनाल में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च का नेतृत्व करेंगे, अंबाला में शहीद स्मारक का उद्घाटन भी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को हरियाणा के करनाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च में भाग लेंगे। यह अभियान BJP द्वारा पूरे देश में चलाया जा रहा है, जिसका मूल उद्देश्य भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के प्रचार अभियान का जवाब देना है।
मार्च का मार्ग और कार्यक्रम
करनाल में यह 'पदयात्रा' सेक्टर-12 से शुरू होकर दयानंद चौक तक निकाली जाएगी। गृह मंत्री के इस दौरे को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यह आयोजन BJP के उस व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसे विपक्ष के चुनाव आयोग-विरोधी बयानों के जवाब में शुरू किया गया है।
अंबाला में शहीद स्मारक का उद्घाटन
करनाल कार्यक्रम के बाद गृह मंत्री शाह अंबाला रवाना होंगे, जहाँ वे आधुनिक शहीद स्मारक का औपचारिक उद्घाटन करेंगे और पूरे परिसर का दौरा करेंगे। यह अंबाला छावनी (अंबाला कैंट) में उनका पहला दौरा होगा — हालाँकि अंबाला ज़िले में यह उनकी तीसरी यात्रा है। इससे पहले वे दो बार चुनावी रैलियों को संबोधित करने के लिए यहाँ आ चुके हैं।
गौरतलब है कि यह दौरा किसी राजनीतिक मंच के लिए नहीं, बल्कि देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम (1857) के शहीद नायकों को श्रद्धांजलि देने के लिए है। यह आयोजन हरियाणा के 60वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत है।
हरियाणा स्थापना दिवस पर शाह की शुभकामनाएँ
1 नवंबर 2026 को हरियाणा के 60वें स्थापना दिवस पर गृह मंत्री शाह ने राज्य को बधाई देते हुए एक्स पर लिखा, 'वीरता, परिश्रम और समृद्धि की भूमि, हरियाणा के स्थापना दिवस पर राज्य के सभी निवासियों को हार्दिक बधाई।' उन्होंने सीमाओं पर देश की रक्षा, खेल के मैदान में तिरंगे का मान और कृषि-पशुपालन क्षेत्र में हरियाणा के 'अद्वितीय योगदान' का उल्लेख किया।
शाह ने यह भी कहा, 'राज्य के वीर सैनिकों, प्रतिभाशाली खिलाड़ियों और मेहनती किसानों ने हमेशा देश के गौरव और समृद्धि में नई ऊर्जा का संचार किया है।'
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक के कई नेता चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं। BJP का यह राष्ट्रव्यापी मार्च उन आरोपों का संगठित जवाब है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के अभियान चुनाव-पूर्व ध्रुवीकरण को बढ़ाते हैं, जबकि BJP नेताओं का तर्क है कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए अनिवार्य कदम है। करनाल और अंबाला दोनों दौरों के साथ शाह का यह हरियाणा दिवस आगे की राजनीतिक सक्रियता का संकेत देता है।