अमित शाह 5 नवंबर को अंबाला छावनी में करेंगे ₹800 करोड़ के शहीद स्मारक का उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर 2026 को अंबाला छावनी में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को समर्पित राष्ट्रीय स्मारक का उद्घाटन करेंगे। लगभग ₹800 करोड़ की लागत से निर्मित यह स्मारक 6 नवंबर से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। हरियाणा के परिवहन एवं ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बुधवार, 28 अक्टूबर को अंबाला क्लब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पदाधिकारियों की एक समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी।
उद्घाटन कार्यक्रम और जनसभा
उद्घाटन समारोह के बाद मंत्री अनिल विज गांधी मैदान, अंबाला छावनी में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। विज ने लोगों से अपील की कि वे इस अवसर पर बड़ी संख्या में शामिल हों, क्योंकि यह केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के स्मारक के सम्मान में आयोजित एक ऐतिहासिक कार्यक्रम है। इस बैठक की अध्यक्षता राज्य पार्टी अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने की।
अंबाला: 1857 विद्रोह की पहली चिंगारी
मंत्री विज ने दावा किया कि दस्तावेज़ी प्रमाण बताते हैं कि 1857 में सुबह 9 बजे, यानी मेरठ में विद्रोह शुरू होने से करीब 10 घंटे पहले, अंबाला छावनी की 60वीं और 5वीं नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंट ने स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूंका था। उन्होंने कहा, "फिर भी, इतिहास ने उन नायकों को कभी याद नहीं रखा जिन्हें पेड़ों से बांधकर गोली मार दी गई थी, या जिन पर कोल्हू चलाए गए थे। देश ने कभी उन शहीदों को श्रद्धांजलि नहीं दी, जो कि बहुत दुखद है।"
विज ने यह भी कहा कि कांग्रेस की स्थापना से भी पहले, 1857 में पूरे भारत में एक सशस्त्र स्वतंत्रता संग्राम लड़ा गया था। उन्होंने तर्क दिया कि पाठ्यपुस्तकों में इस इतिहास को उचित स्थान नहीं मिला।
25 वर्षों की मांग, 2014 में मिली मंजूरी
विज ने बताया कि वे पिछले 25 30 वर्षों से इस स्मारक के निर्माण के लिए संघर्ष करते रहे हैं और विधानसभा में कई बार इसकी माँग उठाई। उन्होंने कहा कि एक समय उन्होंने कांग्रेस सरकार को इसके लिए बाध्य भी किया था, परंतु स्मारक नहीं बना। 2014 में BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद राष्ट्रीय स्तर के स्मारक के निर्माण को अंततः मंजूरी दी गई।
स्मारक की विशेषताएँ और शैक्षणिक उद्देश्य
इस स्मारक में आधुनिक तकनीक के ज़रिए हरियाणा, बिहार, पंजाब सहित देश भर में 1857 में लड़ी गई लड़ाइयों का जीवंत इतिहास प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार ने राज्य भर के स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के छात्रों को इस स्मारक का भ्रमण कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि नई पीढ़ी को 1857 की क्रांति की वास्तविक पृष्ठभूमि से परिचित कराया जा सके। विज के अनुसार, स्मारक उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देता है जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया — चाहे वे किसी भी दल या विचारधारा से रहे हों।
आगे क्या होगा
5 नवंबर के उद्घाटन के अगले ही दिन, 6 नवंबर से यह शहीद स्मारक आम नागरिकों के लिए सुलभ हो जाएगा। यह स्मारक न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे देश के लिए 1857 की पहली स्वतंत्रता की लड़ाई का एक स्थायी स्मृति केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।