वाराणसी MLC मतगणना विवाद: अखिलेश यादव का दावा — भाजपा यूपी में 'ऑल आउट', हेरफेर पर कोर्ट की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 28 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के स्नातक एमएलसी चुनाव में भाजपा पूरी तरह पराजित हो चुकी है। वाराणसी में मतगणना के बीच उठे विवाद — जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी शामिल है — की पृष्ठभूमि में अखिलेश ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि परिणाम में हेरफेर करने वाले हर अधिकारी को न्यायालय में खींचा जाएगा।
मतगणना स्थल पर तनाव
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वाराणसी के मतगणना स्थल पर चार राउंड की गिनती के बाद सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह से करीब 5,000 मतों से आगे चल रहे थे। भाजपा प्रत्याशी की ओर से आपत्ति-पत्र माँगे जाने के बाद अधिकारी उनके तंबू तक पहुँचे, जिसके बाद गणना कुछ देर के लिए रुकी और स्थल पर तनाव बढ़ गया।
पश्चिमी गेट पर भाजपा कार्यकर्ता पुलिस को हटाकर मतगणना परिसर के भीतर प्रवेश की माँग करने लगे। रोके जाने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ा और भाजपा कार्यकर्ता अंतिम बैरिकेड तक पहुँचकर नारेबाजी करने लगे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
भाजपा के आरोप
भाजपा नेता विकास सिंह ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उनके पक्ष के मतों को अवैध और विपक्षी मतों को वैध ठहराया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके एजेंट की अनुपस्थिति में मतगणना की गई — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने चुनाव पर्यवेक्षक प्रांजल यादव को लेकर भी नारे लगाए और आरोप लगाया कि वे पूर्व में वाराणसी के जिलाधिकारी रह चुके हैं तथा सपा नेताओं से उनके निकट संबंध हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अखिलेश यादव की चेतावनी
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि 'वाराणसी में मतगणना रोक देने के पीछे रिजल्ट बदलने की पुरानी भाजपाई चाल चली जा रही है।' उन्होंने लिखा: 'देखना ये है कि बनारस का नतीजा बैलेट पेपर की गणना से आता है या लखनऊ से आए दूरदृष्टा-दूरभाष की टनटनाहट से।'
उन्होंने यह भी दावा किया कि 'पीडीए प्रहरियों' ने पुख्ता साक्ष्य जुटा लिए हैं और चेतावनी दी कि यदि परिणाम में गड़बड़ी हुई तो 'एक-एक संलिप्त अधिकारी' को न्यायालय में खींचा जाएगा। गोरखपुर की अन्य सीट का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वहाँ भी 'नैतिक रूप से हार चुकी है।'
सुरक्षा व्यवस्था
मतगणना स्थल पर डीसीपी काशी गौरव बंसवाल, डीसीपी गोमती नीतू कादयान, चार एसीपी, छह थानों की पुलिस बल और चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारी मौजूद रहे। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए व्यापक बंदोबस्त किया गया था।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है। वाराणसी स्नातक एमएलसी सीट के अंतिम परिणाम की प्रतीक्षा बनी हुई है और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। यदि सपा की जीत की पुष्टि होती है, तो यह भाजपा के लिए उस क्षेत्र में एक उल्लेखनीय झटका होगा जिसे प्रधानमंत्री की संसदीय सीट का गृह क्षेत्र माना जाता है।