28 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नासिक सिंहस्थ कुंभ 2026-27: ध्वजारोहण में राष्ट्रपति मुर्मु के आगमन की संभावना, रामकुंड पर 13 अखाड़े एक साथ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नासिक सिंहस्थ कुंभ 2026-27: ध्वजारोहण में राष्ट्रपति मुर्मु के आगमन की संभावना, रामकुंड पर 13 अखाड़े एक साथ

सारांश

नासिक सिंहस्थ कुंभ 2026-27 के ध्वजारोहण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आने की संभावना ने संत समाज में उत्साह भर दिया है। रामकुंड पर सभी 13 अखाड़ों की एकजुटता को ऐतिहासिक बताया जा रहा है, लेकिन तैयारियों की धीमी गति पर चिंता भी गहरी है।

मुख्य बातें

सिंहस्थ कुंभ मेला 2026-27 के ध्वजारोहण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के शामिल होने की संभावना है।
रामकुंड पर सभी 13 अखाड़ों की एक साथ उपस्थिति को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत संजय दास ने ऐतिहासिक बताया।
30 अक्टूबर को दोपहर दो बजे जगद्गुरु श्री नरेंद्राचार्य जी महाराज के नेतृत्व में ग्राम परिक्रमा आयोजित होगी।
महंत संजय दास ने कुंभ तैयारियों की धीमी गति पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल निर्माण कार्यों में तेज़ी लाने की माँग की।
अखाड़ों के शिविर स्थलों का निरीक्षण कर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।

नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेला 2026-27 की तैयारियों के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत संजय दास ने 28 अक्टूबर 2026 को बताया कि ध्वजारोहण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के शामिल होने की संभावना है, जिससे इस धार्मिक आयोजन का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने रामकुंड पर सभी 13 अखाड़ों के एक साथ एकत्र होने के निर्णय को ऐतिहासिक करार दिया और प्रशासन से तैयारियों में तेज़ी लाने की अपील की।

ध्वजारोहण समारोह और प्रमुख अतिथि

महंत संजय दास के अनुसार, सिंहस्थ कुंभ के ध्वजारोहण कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति की संभावना ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की है। इस अवसर पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री नरेंद्राचार्य जी महाराज, धर्म सम्राट श्री महंत ज्ञान दास जी महाराज, तीनों वैष्णव अखाड़ों के श्रीमहंत और देशभर के संत-महात्माओं के भाग लेने की जानकारी दी गई है।

गौरतलब है कि सिंहस्थ कुंभ हर बारह वर्ष में नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होता है, और यह आयोजन देश के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक है। राष्ट्रपति के स्तर पर इस तरह की सहभागिता ऐतिहासिक दृष्टि से उल्लेखनीय मानी जा रही है।

ग्राम परिक्रमा और संत समाज की भागीदारी

महंत संजय दास ने 30 अक्टूबर को आयोजित होने वाली ग्राम परिक्रमा का भी उल्लेख किया। यह परिक्रमा दोपहर करीब दो बजे जगद्गुरु श्री नरेंद्राचार्य जी महाराज के नेतृत्व में आरंभ होगी। इसमें देशभर के अखाड़ों, जत्था संप्रदायों और अन्य संत-महात्माओं के सम्मिलित होने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों में संत समाज की व्यापक भागीदारी न केवल आस्था को बल देती है, बल्कि पूरे मेले की पवित्रता और संगठन को भी सुदृढ़ करती है।

रामकुंड पर 13 अखाड़ों की ऐतिहासिक उपस्थिति

रामकुंड पर गंगा आरती के अवसर पर सभी 13 अखाड़ों को एक ही स्थान पर एकत्र करने के निर्णय को महंत संजय दास ने अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, अखाड़ों की यह सामूहिक उपस्थिति अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना होगी, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी। इस एकजुटता से सिंहस्थ कुंभ को नई पहचान मिलेगी और धार्मिक एकता का संदेश देशभर में जाएगा।

शिविर आवंटन और निरीक्षण की तैयारी

अखाड़ों के शिविर स्थलों के आवंटन के मुद्दे पर महंत संजय दास ने बताया कि वे शाम को संबंधित स्थलों का निरीक्षण करने जाएंगे। इसके बाद अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की जाएगी। तीनों वैष्णव अखाड़ों को पूर्व में आवंटित स्थलों पर हुई प्रगति पर भी विचार-विमर्श होगा।

तैयारियों में देरी पर चिंता और प्रशासन से अपील

महंत संजय दास ने कुंभ मेले की तैयारियों में देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई कार्यों की गति काफी धीमी है और यदि प्रशासन तथा शासन ने समय रहते तेज़ी नहीं दिखाई, तो आगे चलकर गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सभी निर्माण कार्यों और बुनियादी सुविधाओं को तत्काल प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की माँग की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि तैयारियों को समय पर पूरा करना इसलिए आवश्यक है, ताकि लाखों संतों, अखाड़ों के सदस्यों और श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा सकें। यह ऐसे समय में आया है जब कुंभ के लिए देशभर से बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के नासिक पहुँचने की उम्मीद है और बुनियादी ढाँचे की तैयारी में कोई भी चूक लाखों श्रद्धालुओं को प्रभावित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा बुनियादी ढाँचे की है। महंत संजय दास की चिंता सतही नहीं है — कुंभ जैसे विशालकाय आयोजन में निर्माण देरी का सीधा असर करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा पर पड़ता है। 13 अखाड़ों की एकजुटता धार्मिक एकता का प्रतीक है, परंतु यदि शिविर स्थलों का आवंटन और निर्माण समय पर नहीं हुआ, तो यह ऐतिहासिक एकता प्रशासनिक अव्यवस्था की भेंट चढ़ सकती है। प्रयागराज महाकुंभ 2025 के विशाल प्रबंधन से तुलना अब स्वाभाविक रूप से होगी, और नासिक प्रशासन पर इसकी छाया में काम करने का दबाव है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नासिक सिंहस्थ कुंभ मेला 2026-27 कब और कहाँ आयोजित होगा?
सिंहस्थ कुंभ मेला 2026-27 महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होगा। यह मेला हर बारह वर्ष में एक बार इन स्थानों पर लगता है और देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।
क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सिंहस्थ कुंभ के ध्वजारोहण में शामिल होंगी?
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत संजय दास के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने की संभावना है। हालाँकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
रामकुंड पर 13 अखाड़ों के एकत्र होने का क्या महत्व है?
रामकुंड पर सभी 13 अखाड़ों का एक ही स्थान पर एकत्र होना धार्मिक एकता और सांगठनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महंत संजय दास ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह निर्णय इतिहास में दर्ज होगा।
30 अक्टूबर को होने वाली ग्राम परिक्रमा क्या है?
30 अक्टूबर को दोपहर करीब दो बजे जगद्गुरु श्री नरेंद्राचार्य जी महाराज के नेतृत्व में ग्राम परिक्रमा आयोजित होगी। इसमें देशभर के अखाड़ों, जत्था संप्रदायों और संत-महात्माओं के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों में क्या समस्याएँ हैं?
महंत संजय दास ने बताया कि कई निर्माण कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विकास की गति काफी धीमी है। उन्होंने प्रशासन और शासन से तत्काल तेज़ी लाने की माँग की है, ताकि संतों, अखाड़ों और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ समय पर सुनिश्चित हो सकें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
    सिंहस्थ कुंभ मेला: गिरीश महाजन ने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण का निमंत्रण दिया, राष्ट्रपति मुर्मु रहेंगी मुख्य अतिथि
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 3 महीने पहले