21 अक्टूबर 2026
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सिंहस्थ कुंभ 2027: CM फडणवीस ने राष्ट्रपति मुर्मु को 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण समारोह का दिया निमंत्रण

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सिंहस्थ कुंभ 2027: CM फडणवीस ने राष्ट्रपति मुर्मु को 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण समारोह का दिया निमंत्रण

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने सिंहस्थ कुंभ 2027 की तैयारी का पहला बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण समारोह में बुलाया है। CM फडणवीस के नेतृत्व में दिया गया यह निमंत्रण नासिक-त्र्यंबकेश्वर के इस महाकुंभ को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 21 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
राष्ट्रपति को 31 अक्टूबर को नासिक-त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 के ध्वजारोहण समारोह का निमंत्रण दिया गया।
उसी दिन गोदा आरती , कुंभ मेला वेबसाइट उद्घाटन, कुंभ गीत विमोचन, कॉफी टेबल बुक और विशेष डाक टिकट अनावरण का भी कार्यक्रम है।
राष्ट्रपति को दिए उपहार सेट में येवला की पैठणी , शबरी नेचुरल्स के जनजातीय उत्पाद, नासिक की काली किशमिश, काजू और चिवड़ा शामिल हैं।
प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे , सुनेत्रा पवार और अन्य मंत्रिमंडल सदस्य भी शामिल थे।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भेंट की और उन्हें 31 अक्टूबर को नासिक-त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 के ध्वजारोहण समारोह में सम्मिलित होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। यह ध्वजारोहण कार्यक्रम भव्य सिंहस्थ कुंभ की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

राष्ट्रपति भवन में हुई इस मुलाकात में मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बताया कि 31 अक्टूबर को नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 'धर्मध्वज' फहराने का यह आयोजन सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

राष्ट्रपति को उसी दिन कई अन्य कार्यक्रमों के लिए भी आमंत्रित किया गया, जिनमें गोदा आरती, नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण की वेबसाइट का उद्घाटन, कुंभ मेला गीत का विमोचन, कुंभ मेले पर आधारित कॉफी टेबल बुक का प्रकाशन और एक विशेष डाक टिकट का अनावरण शामिल हैं।

अनूठा निमंत्रण और उपहार

राष्ट्रपति को भेंट किया गया निमंत्रण स्वयं में एक कलात्मक कृति है। बॉक्स खोलते ही एक त्रि-आयामी पॉप-अप कलाकृति प्रकट होती है, जो कुंभ मेले की पौराणिक पृष्ठभूमि, आध्यात्मिक भव्यता और विशालता को साकार करती है। इस अवधारणा में पाँचों इंद्रियों — देखने, सुनने, सूंघने, स्वाद लेने और स्पर्श करने — से जुड़े अनुभव समाहित हैं।

साथ में दिए गए उपहार सेट में महाराष्ट्र की बहुआयामी विरासत की झलक मिलती है। जनजातीय विकास विभाग के अंतर्गत 'शबरी नेचुरल्स' के उत्पाद — अगरबत्ती, मोटे अनाजों से बनी खाद्य सामग्री, बांस की वस्तुएं और जंगली शहद — जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और आर्थिक सशक्तीकरण का संदेश देते हैं। येवला की प्रसिद्ध पैठणी वस्त्र परंपरा, नासिक की काली किशमिश और काजू, चिवड़ा, चुनिंदा मिठाइयाँ और सूखे मेवे भी इस सेट का हिस्सा हैं।

नेताओं की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री फडणवीस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मिलकर सम्मानित महसूस हुए और उन्हें नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 के 'धर्मध्वज' फहराने के कार्यक्रम में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस अवसर पर गोदा आरती, वेबसाइट उद्घाटन, कुंभ गीत विमोचन, कॉफी टेबल बुक और डाक टिकट अनावरण सहित कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।

सिंहस्थ कुंभ का महत्व

गौरतलब है कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ प्रत्येक बारह वर्ष में एक बार आयोजित होता है और यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भी महाराष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार इस महाकुंभ को वैश्विक मंच पर महाराष्ट्र की सांस्कृतिक भव्यता और आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है।

आगे की तैयारियाँ

31 अक्टूबर का ध्वजारोहण समारोह सिंहस्थ कुंभ की औपचारिक शुरुआत का संकेत देगा और इसके बाद तैयारियाँ पूरे जोर पर होंगी। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रपति को आमंत्रित किया जाना इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व और मान्यता दिलाने का प्रयास है। यह देखना रोचक होगा कि राष्ट्रपति मुर्मु इस निमंत्रण को स्वीकार करती हैं या नहीं — जो इस कुंभ को एक ऐतिहासिक आयाम दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें सिंहस्थ कुंभ को केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में स्थापित करना है। बारह वर्षों में एक बार आने वाला यह कुंभ नासिक और त्र्यंबकेश्वर के लिए पर्यटन और आर्थिक गतिविधि का बड़ा अवसर है, इसलिए राजनीतिक दृष्टि से भी इसे भव्य बनाने की होड़ स्वाभाविक है। हालांकि, असली कसौटी यह होगी कि इस महाकुंभ के दौरान बुनियादी ढाँचा, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा पिछले आयोजनों की तुलना में कितनी बेहतर होती है — क्योंकि करोड़ों आगंतुकों की भीड़ प्रबंधन की चुनौती किसी भी प्रतीकात्मक निमंत्रण से कहीं बड़ी है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 का ध्वजारोहण समारोह कब और कहाँ होगा?
सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 का ध्वजारोहण समारोह 31 अक्टूबर 2026 को नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होगा। यह समारोह महाकुंभ की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक होगा।
CM फडणवीस ने राष्ट्रपति मुर्मु को किन कार्यक्रमों के लिए आमंत्रित किया?
CM फडणवीस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण के अलावा गोदा आरती, नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण की वेबसाइट के उद्घाटन, कुंभ मेला गीत के विमोचन, कॉफी टेबल बुक के प्रकाशन और विशेष डाक टिकट के अनावरण के लिए आमंत्रित किया। ये सभी कार्यक्रम एक ही दिन आयोजित होने हैं।
राष्ट्रपति को दिए उपहार सेट में क्या शामिल था?
उपहार सेट में महाराष्ट्र की विविध विरासत की झलक दी गई — जनजातीय विकास विभाग के 'शबरी नेचुरल्स' के उत्पाद जैसे अगरबत्ती, बांस की वस्तुएं और जंगली शहद, येवला की पैठणी, नासिक की काली किशमिश, काजू, चिवड़ा, मिठाइयाँ और सूखे मेवे शामिल थे। निमंत्रण बॉक्स में एक विशेष त्रि-आयामी पॉप-अप कलाकृति भी थी।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ कितने वर्षों में एक बार आयोजित होता है?
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ प्रत्येक बारह वर्ष में एक बार आयोजित होता है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और धार्मिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक दृष्टि से महाराष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है।
इस प्रतिनिधिमंडल में महाराष्ट्र के कौन-कौन से नेता शामिल थे?
CM देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाले इस प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और महाराष्ट्र मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगी शामिल थे। यह बैठक 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में हुई।
राष्ट्र प्रेस
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