सिंहस्थ महाकुंभ: CM फडणवीस आज राष्ट्रपति मुर्मू से मिलेंगे, 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण का न्योता देंगे
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार भेंट करेंगे और उन्हें नासिक में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वजारोहण समारोह में सम्मिलित होने का आमंत्रण देंगे। यह ध्वजारोहण समारोह 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया जाना है, जो महाकुंभ के औपचारिक शुभारंभ का प्रतीक होगा।
ध्वजारोहण समारोह की रूपरेखा
31 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर एक साथ दो स्थानों पर ध्वजारोहण किया जाएगा। पहला स्थान नासिक का ऐतिहासिक रामकुंड घाट है और दूसरा त्र्यंबकेश्वर स्थित कुशावर्त कुंड — जो त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर से संलग्न है। कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन के अनुसार, रामकुंड घाट पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के करकमलों से ध्वजारोहण होने की योजना है, जबकि त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री फडणवीस स्वयं उपस्थित रहेंगे।
समारोह में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के भी उपस्थित रहने की संभावना जताई जा रही है। इसके अतिरिक्त केंद्र और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ नेता भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।
प्रशासनिक तैयारियाँ
सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के सिलसिले में सितंबर माह में कुंभ मेला प्रशासन और कुंभ मेला प्राधिकरण की एक अहम बैठक आयोजित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने की। इस बैठक में साधु-संत, महंत, विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए थे।
बैठक में सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, पार्किंग, आपातकालीन प्रबंध और प्रशासनिक समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने की संभावना के मद्देनज़र ये इंतज़ाम अतिआवश्यक माने जा रहे हैं।
सिंहस्थ महाकुंभ का धार्मिक महत्व
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ हिंदू आस्था के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र सरकार इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विशेष तैयारियाँ कर रही है। गौरतलब है कि ध्वजारोहण समारोह धार्मिक परंपराओं के अनुरूप भव्य और सुव्यवस्थित रूप से आयोजित किए जाने की योजना है।
आगे की राह
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की संभावित उपस्थिति इस आयोजन को राजकीय महत्व प्रदान करेगी और देशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह का संचार करेगी। मुख्यमंत्री फडणवीस की दिल्ली यात्रा यह भी दर्शाती है कि राज्य सरकार इस धार्मिक महाकुंभ को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। अब सभी की निगाहें 31 अक्टूबर के उस ऐतिहासिक क्षण पर टिकी हैं, जब दोनों पवित्र स्थलों पर एक साथ ध्वजारोहण से महाकुंभ की औपचारिक शुरुआत होगी।