सिंहस्थ कुंभ मेला 2026: फडणवीस ने राष्ट्रपति मुर्मु को 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण में आमंत्रित किया
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की और उन्हें 31 अक्टूबर को नासिक एवं त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के भव्य ध्वजारोहण समारोह में सम्मिलित होने का औपचारिक आमंत्रण दिया। यह आयोजन नासिक-त्र्यंबकेश्वर में अक्टूबर 2026 से जुलाई 2028 तक चलने वाले सिंहस्थ कुंभ के उत्सवों का आधिकारिक शुभारंभ होगा।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना
इस उच्चस्तरीय शिष्टमंडल में मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार, प्रमुख कैबिनेट मंत्री तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह मुलाकात मेले की तैयारियों के विस्तृत प्रस्तुतीकरण का भी अवसर बनी।
उद्घाटन दिवस के प्रमुख कार्यक्रम
राष्ट्रपति मुर्मु को 31 अक्टूबर को कई महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। इनमें गोदावरी नदी के तट पर भव्य गोदा आरती, नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ, आधिकारिक कुंभ मेला गान का विमोचन, एक स्मारक कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण तथा एक समर्पित कुंभ मेला डाक टिकट का अनावरण प्रमुखता से शामिल हैं।
महाराष्ट्र की विरासत को दर्शाता विशेष उपहार
मुख्यमंत्री फडणवीस ने राष्ट्रपति को एक विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया कलात्मक निमंत्रण पत्र और एक अनूठा उपहार-संग्रह भेंट किया, जिसमें महाराष्ट्र की आध्यात्मिक, आदिवासी, कृषि एवं पाक परंपराओं की झलक थी। उपहार में प्राकृतिक अगरबत्ती, अनाज-आधारित खाद्य उत्पाद, महुआ के फूल से निर्मित सामग्री, हस्तनिर्मित बांस शिल्पकृतियाँ और वन्य शहद शामिल थे — ये सभी आदिवासी कारीगरों की आत्मनिर्भरता और सतत संसाधन प्रबंधन को प्रतिबिंबित करते हैं।
इसके अलावा, महाराष्ट्र की पारंपरिक बुनाई परंपरा की प्रतीक येओला पैठानी साड़ी भी उपहार का हिस्सा रही। कृषि-उत्पादों में काले किशमिश, काजू, पारंपरिक नासिक चिवड़ा, चुनिंदा मिठाइयाँ और सूखे मेवे शामिल किए गए।
बुनियादी ढाँचे की तैयारियाँ और समीक्षा
मुख्यमंत्री फडणवीस ने हाल ही में नासिक और त्र्यंबकेश्वर के प्रमुख स्थलों का स्वयं निरीक्षण कर आगामी मेले के लिए बुनियादी ढाँचे की तैयारियों का जायज़ा लिया। उन्होंने घाट विकास, दर्शन पथ तथा प्रमुख सड़कों पर यातायात भार कम करने की परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि ये कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे हो जाएँगे।
उन्होंने स्वीकार किया कि गोदा घाट और त्र्यंबकेश्वर दर्शन पथ जैसी परियोजनाएँ जटिल एवं चुनौतीपूर्ण हैं, किंतु महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय की सराहना की। गौरतलब है कि इस कुंभ के मुख्य पवित्र स्नान अनुष्ठान 2027 में केंद्रित रहेंगे, जो करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करने का अनुमान है।
राष्ट्रपति की भागीदारी से इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलने की संभावना है, और राज्य सरकार का ध्यान अब उद्घाटन दिवस की तैयारियों पर केंद्रित हो गया है।