31 अक्टूबर 2026
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नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला: राष्ट्रपति मुर्मु ने फहराई धर्मध्वजा, सिंहस्थ महाकुंभ का शुभारंभ

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नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला: राष्ट्रपति मुर्मु ने फहराई धर्मध्वजा, सिंहस्थ महाकुंभ का शुभारंभ

सारांश

कुंभपर्व के इतिहास में पहली बार किसी महिला राष्ट्रपति ने धर्मध्वजा फहराई — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नासिक में और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने त्र्यंबकेश्वर में दोपहर 12:02 बजे एक साथ सिंहस्थ महाकुंभ का शुभारंभ किया।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 31 अक्टूबर 2026 को नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेले की धर्मध्वजा फहराई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में एक साथ दोपहर 12:02 बजे धर्मध्वजा आरोहित की।
कुंभ मेले के इतिहास में पहली बार किसी महिला राष्ट्रपति के हाथों ध्वजारोहण हुआ।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने ओझर एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति का स्वागत किया।
बुनियादी ढाँचे के सभी कार्य निर्धारित समय से पहले पूरे किए जाने की घोषणा।

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 31 अक्टूबर 2026 को सिंहस्थ महाकुंभ मेले का औपचारिक शुभारंभ ध्वजारोहण समारोह के साथ हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नासिक में धर्मध्वजा फहराई, जबकि त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों धर्मध्वजा का आरोहण किया गया। दोनों स्थानों पर एक साथ दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर यह ऐतिहासिक अनुष्ठान संपन्न हुआ।

ऐतिहासिक महत्व: पहली बार महिला राष्ट्रपति के हाथों ध्वजारोहण

इस बार का कुंभपर्व कई मायनों में अभूतपूर्व रहा। कुंभ मेले के इतिहास में पहली बार किसी महिला राष्ट्रपति ने धर्मध्वजा फहराई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति ने इस धार्मिक आयोजन को राष्ट्रीय गरिमा से जोड़ दिया, जिससे पूरे महाराष्ट्र में उत्साह का माहौल देखा गया।

राष्ट्रपति के आगमन पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार स्वागत के लिए नासिक के ओझर एयरपोर्ट पहुँचे। प्रशासन और नागरिकों में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर विशेष उत्साह रहा।

त्र्यंबकेश्वर में भव्य समारोह

त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में समारोह की भव्य तैयारियाँ की गई थीं। पूरे परिसर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया था। ब्रह्मवृंदों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच ध्वज स्तंभ और ध्वज का विधिवत पूजन संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों धर्मध्वजा फहराए जाने के साथ ही महाकुंभ के शुभारंभ का शंखनाद हुआ।

बुनियादी ढाँचे की तैयारी

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के तहत चल रहे बुनियादी ढाँचे के सभी कार्य निर्धारित समय पर — बल्कि समय से पहले — पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री स्वयं इन कार्यों पर निगरानी रख रहे हैं और हमारा भी सभी कार्यों पर पूरा ध्यान है।'

गौरतलब है कि सिंहस्थ कुंभ महाराष्ट्र का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है और इसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार राज्य सरकार ने तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के लिए विशेष प्रबंध किए हैं।

आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में उमड़ने वाले लाखों तीर्थयात्रियों के लिए यह आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान न केवल धार्मिक आस्था का संगम होता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बढ़ावा मिलता है। प्रशासन ने यातायात, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए व्यापक इंतज़ाम किए हैं।

क्या होगा आगे

ध्वजारोहण के साथ ही सिंहस्थ महाकुंभ की आधिकारिक उलटी गिनती शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में विभिन्न अखाड़ों की पेशवाइयाँ और प्रमुख स्नान पर्वों की तिथियाँ घोषित की जाएंगी। राज्य सरकार ने सुनिश्चित किया है कि तीर्थयात्रियों के लिए तमाम सुविधाएँ समय से पहले तैयार हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सरकार के 'सबका साथ' के राजनीतिक संदेश को धार्मिक मंच पर पुनर्स्थापित करता है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हाल ही में सत्ता परिवर्तन के बाद यह फडणवीस सरकार का पहला बड़ा राज्य-स्तरीय आयोजन है, जिसमें केंद्र और राज्य की साझेदारी दिखाने का भी उद्देश्य स्पष्ट दिखता है। सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के 'समय से पहले पूरे होने' के दावों की जाँच जनता और मीडिया को मेले के आरंभिक चरणों में ही करनी होगी।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला 2026 का ध्वजारोहण कब और कहाँ हुआ?
31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर नासिक और त्र्यंबकेश्वर — दोनों स्थानों पर एक साथ ध्वजारोहण किया गया। नासिक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने धर्मध्वजा फहराई।
कुंभ इतिहास में पहली बार महिला राष्ट्रपति का ध्वजारोहण क्यों ऐतिहासिक है?
कुंभपर्व के इतिहास में अब तक किसी महिला राष्ट्रपति ने धर्मध्वजा नहीं फहराई थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों यह ध्वजारोहण इस धार्मिक परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ता है और इसे महाराष्ट्र के लिए गर्व का क्षण बताया जा रहा है।
त्र्यंबकेश्वर कुंभ समारोह में क्या विशेष था?
त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ को आकर्षक फूलों से सजाया गया था। ब्रह्मवृंदों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच ध्वज स्तंभ और ध्वज का विधिवत पूजन हुआ, और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों धर्मध्वजा फहराए जाने के बाद महाकुंभ के शुभारंभ का शंखनाद हुआ।
सिंहस्थ कुंभ मेले की बुनियादी सुविधाओं की तैयारी का क्या हाल है?
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अनुसार बुनियादी ढाँचे के सभी कार्य निर्धारित समय पर, बल्कि समय से पहले पूरे किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं इन कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
नासिक में राष्ट्रपति मुर्मु के आगमन पर किसने स्वागत किया?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के स्वागत के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार नासिक के ओझर एयरपोर्ट पहुँचे। प्रशासन और स्थानीय नागरिकों में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।
राष्ट्र प्रेस
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