20 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ: 31 अक्टूबर से आयोजन, 13 अखाड़ों के बीच समन्वय बैठक संपन्न

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ: 31 अक्टूबर से आयोजन, 13 अखाड़ों के बीच समन्वय बैठक संपन्न

सारांश

31 अक्टूबर से नासिक-त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ का आगाज़ होने जा रहा है। 13 अखाड़ों की एकजुटता और महामंडलेश्वर के आह्वान के साथ प्रयागराज जैसी भव्यता का लक्ष्य — गोदावरी तट पर इतिहास रचने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

मुख्य बातें

19 सितंबर 2026 को नासिक में 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों की सिंहस्थ कुंभ समन्वय बैठक संपन्न हुई।
महामंडलेश्वर श्री रामसनेहीदास महाराज ने बताया कि 31 अक्टूबर से नासिक जिले में कुंभ का आयोजन शुरू होगा।
सभी अखाड़ों के साधु-संतों के आवास, भोजन और आवश्यक व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने पर सहमति बनी।
वैष्णव अखाड़ों समेत सभी अखाड़े एकजुट होकर गोदावरी तट व त्र्यंबकेश्वर में भव्य कुंभ के लिए मिलकर काम करेंगे।
नासिक की जनता से अपील की गई कि वे देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं का अतिथि-भाव से स्वागत करें।
आगामी दिनों में अखाड़ों और प्रशासन के बीच निरंतर संवाद जारी रखने पर जोर दिया गया।

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों को लेकर 19 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और आपसी समन्वय, साधु-संतों के आवास, भोजन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। महामंडलेश्वर श्री रामसनेहीदास महाराज ने बताया कि 31 अक्टूबर से महाराष्ट्र के नासिक जिले में इस भव्य धार्मिक आयोजन की शुरुआत होने जा रही है।

बैठक का मुख्य घटनाक्रम

बैठक में वैष्णव अखाड़ों समेत सभी प्रमुख अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और कुंभ को भव्य एवं दिव्य स्वरूप देने पर एकमत होकर सहमति जताई। संतों ने स्पष्ट किया कि देशभर से बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु नासिक-त्र्यंबकेश्वर पहुँचेंगे, इसलिए प्रशासन और अखाड़ों के बीच निरंतर संवाद अनिवार्य है। यह बैठक आगामी आयोजन की तैयारियों में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।

आवास और भोजन व्यवस्था पर जोर

संतों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सभी अखाड़ों से आने वाले साधु-संतों के लिए रहने और ठहरने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्थानीय महंतों और अखाड़ों के यहाँ पहुँचने वाले संतों तथा भक्तों के भोजन एवं निवास की व्यवस्था को व्यवस्थित और सुसंगठित तरीके से संचालित करने पर सहमति बनी। गौरतलब है कि परंपरागत रूप से स्थानीय स्तर पर आने वाले साधु-संत पहले स्थानीय महंतों या अखाड़ों के यहाँ ठहरते हैं, और इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता बैठक में रेखांकित की गई।

महामंडलेश्वर का संदेश

महामंडलेश्वर श्री रामसनेहीदास महाराज ने बैठक को सार्थक बताते हुए कहा कि नासिक की ओर से पूरे देश में यह संदेश जाना चाहिए कि प्रयागराज की तरह यहाँ भी भव्य और दिव्य कुंभ का आयोजन होने जा रहा है। उन्होंने देशभर के श्रद्धालुओं से समय पर पहुँचने की अपील करते हुए कहा कि कुंभ की अवधि लंबी होने के कारण श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार गोदावरी तट और त्र्यंबकेश्वर की पवित्र भूमि पर पहुँचकर धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर सकते हैं।

नासिक की जनता से अपील

बैठक में संतों ने नासिक की स्थानीय जनता से भी अनुरोध किया कि कुंभ के दौरान देशभर से पधारने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं का अतिथि के भाव से स्वागत किया जाए तथा प्रशासन और अखाड़ों के साथ सक्रिय सहयोग सुनिश्चित हो। संतों ने जोर देकर कहा कि सिंहस्थ कुंभ केवल साधु-संतों तक सीमित आयोजन नहीं है — इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पूरे समाज से जुड़ा हुआ है।

आगे की राह

आगामी दिनों में भी अखाड़ों और प्रशासन के बीच निरंतर संवाद और समन्वय बनाए रखने पर सभी प्रतिभागियों ने एकमत होकर सहमति जताई। गोदावरी तट और त्र्यंबकेश्वर की पवित्र भूमि पर इस सिंहस्थ कुंभ को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए सभी 13 अखाड़े मिलकर कार्य करेंगे। अधिकतम श्रद्धालुओं की भागीदारी और व्यवस्थाओं की सुचारुता के लिए यह समन्वय प्रक्रिया जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन के स्तर पर होगी। प्रयागराज कुंभ 2025 की विशाल सफलता ने श्रद्धालुओं की अपेक्षाएँ काफी ऊँची कर दी हैं — ऐसे में नासिक के लिए बुनियादी ढाँचे, यातायात प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी केवल अखाड़ा-स्तरीय समन्वय से कहीं आगे की माँग करती है। 13 अखाड़ों की एकजुटता उत्साहजनक है, परंतु प्रशासन की ओर से ठोस कार्ययोजना और पारदर्शी समयसीमा अभी सामने नहीं आई है। गोदावरी तट पर सीमित भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए भीड़ प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य होगा।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ 2026 कब शुरू होगा?
महामंडलेश्वर श्री रामसनेहीदास महाराज के अनुसार 31 अक्टूबर 2026 से महाराष्ट्र के नासिक जिले में सिंहस्थ कुंभ का आयोजन शुरू होगा। यह आयोजन गोदावरी तट और त्र्यंबकेश्वर की पवित्र भूमि पर होगा और कुंभ की अवधि लंबी रहेगी।
सिंहस्थ कुंभ की तैयारी बैठक में कितने अखाड़ों ने हिस्सा लिया?
19 सितंबर 2026 को आयोजित बैठक में 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वैष्णव अखाड़ों समेत सभी प्रमुख अखाड़ों ने आपसी सहयोग और समन्वय के साथ कुंभ को भव्य बनाने पर एकमत होकर सहमति जताई।
बैठक में साधु-संतों की किन व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई?
बैठक में मुख्य रूप से सभी अखाड़ों के साधु-संतों के आवास, भोजन और ठहरने की व्यवस्था पर चर्चा हुई। साथ ही देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने और प्रशासन व अखाड़ों के बीच निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी सहमति बनी।
नासिक की जनता से क्या अपील की गई?
संतों ने नासिक की स्थानीय जनता से अपील की कि वे कुंभ के दौरान देशभर से आने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं का अतिथि के रूप में स्वागत करें और प्रशासन व अखाड़ों के साथ सहयोग करें। संतों ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पूरे समाज से जुड़ा है।
नासिक सिंहस्थ कुंभ का धार्मिक महत्व क्या है?
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ गोदावरी नदी के तट पर आयोजित होता है और इसे भारत के प्रमुख कुंभ मेलों में से एक माना जाता है। यह प्रयागराज, हरिद्वार और उज्जैन के बाद चौथा प्रमुख कुंभ स्थल है, जहाँ लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान और आध्यात्मिक अनुभव के लिए एकत्रित होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 16 मिनट पहले
  2. 51 मिनट पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले