नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ: 31 अक्टूबर से आयोजन, 13 अखाड़ों के बीच समन्वय बैठक संपन्न
सारांश
मुख्य बातें
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों को लेकर 19 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और आपसी समन्वय, साधु-संतों के आवास, भोजन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। महामंडलेश्वर श्री रामसनेहीदास महाराज ने बताया कि 31 अक्टूबर से महाराष्ट्र के नासिक जिले में इस भव्य धार्मिक आयोजन की शुरुआत होने जा रही है।
बैठक का मुख्य घटनाक्रम
बैठक में वैष्णव अखाड़ों समेत सभी प्रमुख अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और कुंभ को भव्य एवं दिव्य स्वरूप देने पर एकमत होकर सहमति जताई। संतों ने स्पष्ट किया कि देशभर से बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु नासिक-त्र्यंबकेश्वर पहुँचेंगे, इसलिए प्रशासन और अखाड़ों के बीच निरंतर संवाद अनिवार्य है। यह बैठक आगामी आयोजन की तैयारियों में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।
आवास और भोजन व्यवस्था पर जोर
संतों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सभी अखाड़ों से आने वाले साधु-संतों के लिए रहने और ठहरने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्थानीय महंतों और अखाड़ों के यहाँ पहुँचने वाले संतों तथा भक्तों के भोजन एवं निवास की व्यवस्था को व्यवस्थित और सुसंगठित तरीके से संचालित करने पर सहमति बनी। गौरतलब है कि परंपरागत रूप से स्थानीय स्तर पर आने वाले साधु-संत पहले स्थानीय महंतों या अखाड़ों के यहाँ ठहरते हैं, और इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता बैठक में रेखांकित की गई।
महामंडलेश्वर का संदेश
महामंडलेश्वर श्री रामसनेहीदास महाराज ने बैठक को सार्थक बताते हुए कहा कि नासिक की ओर से पूरे देश में यह संदेश जाना चाहिए कि प्रयागराज की तरह यहाँ भी भव्य और दिव्य कुंभ का आयोजन होने जा रहा है। उन्होंने देशभर के श्रद्धालुओं से समय पर पहुँचने की अपील करते हुए कहा कि कुंभ की अवधि लंबी होने के कारण श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार गोदावरी तट और त्र्यंबकेश्वर की पवित्र भूमि पर पहुँचकर धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर सकते हैं।
नासिक की जनता से अपील
बैठक में संतों ने नासिक की स्थानीय जनता से भी अनुरोध किया कि कुंभ के दौरान देशभर से पधारने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं का अतिथि के भाव से स्वागत किया जाए तथा प्रशासन और अखाड़ों के साथ सक्रिय सहयोग सुनिश्चित हो। संतों ने जोर देकर कहा कि सिंहस्थ कुंभ केवल साधु-संतों तक सीमित आयोजन नहीं है — इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पूरे समाज से जुड़ा हुआ है।
आगे की राह
आगामी दिनों में भी अखाड़ों और प्रशासन के बीच निरंतर संवाद और समन्वय बनाए रखने पर सभी प्रतिभागियों ने एकमत होकर सहमति जताई। गोदावरी तट और त्र्यंबकेश्वर की पवित्र भूमि पर इस सिंहस्थ कुंभ को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए सभी 13 अखाड़े मिलकर कार्य करेंगे। अधिकतम श्रद्धालुओं की भागीदारी और व्यवस्थाओं की सुचारुता के लिए यह समन्वय प्रक्रिया जारी रहेगी।