श्रावणी मेला 2026: CM सम्राट चौधरी ने की समीक्षा बैठक, कांवड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 21 मई 2026 को पटना में श्रावणी मेला 2026 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जुड़े। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि कांवड़ियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को कांवड़िया पथ पर पैदल मार्ग को व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने शौचालय, साफ-सफाई और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया।
इसके अलावा, कांवड़िया पथ पर बने प्रमुख विश्राम स्थलों के पास स्वास्थ्य सुविधाएँ और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध रखने का भी निर्देश दिया गया। राज्य के शिवालयों में जल चढ़ाने के दौरान भीड़ प्रबंधन की पुख़्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
विभागीय प्रस्तुतीकरण
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने बैठक में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, स्नानागार, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्था, टेंट व पंडाल, सीसीटीवी निगरानी और अग्निशमन सेवाओं की विस्तृत रूपरेखा साझा की गई।
वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति
बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल तथा स्वास्थ्य मंत्री निशांत भी उपस्थित रहे। यह बैठक इस बात का संकेत है कि बिहार सरकार इस वर्ष श्रावणी मेले को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के प्रति गंभीर है।
बैठक में शामिल वरिष्ठ अधिकारी
बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, पर्यटन विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह, पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल और स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
आगे की तैयारी
गौरतलब है कि श्रावणी मेला प्रतिवर्ष सावन के महीने में लाखों कांवड़ियों को बिहार के विभिन्न शिवालयों की ओर आकर्षित करता है, जिससे यह राज्य के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक बन जाता है। इतनी पहले से की जा रही तैयारी यह दर्शाती है कि प्रशासन इस बार किसी भी व्यवस्थागत चूक से बचना चाहता है। आने वाले सप्ताहों में ज़िला स्तर पर भी समीक्षा बैठकें अपेक्षित हैं।