भोजशाला फैसले पर साध्वी त्रिकाल भवंता बोलीं — 'हिंदू समाज जाग चुका है, सनातन धर्म की रक्षा होगी'

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भोजशाला फैसले पर साध्वी त्रिकाल भवंता बोलीं — 'हिंदू समाज जाग चुका है, सनातन धर्म की रक्षा होगी'

सारांश

भोजशाला मामले में अदालत के फैसले पर साध्वी त्रिकाल भवंता ने कहा — हिंदू समाज जाग चुका है। नासिक-त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ 2027-28 की तैयारी शुरू, 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण। महिला साध्वियों की सुरक्षा और अमृत स्नान की व्यवस्था की माँग भी उठाई।

मुख्य बातें

साध्वी त्रिकाल भवंता (अनिता शर्मा) ने भोजशाला मामले में अदालत के फैसले का स्वागत किया और इसे हिंदू समाज की जागृति का संकेत बताया।
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेला 2027-28 का आयोजन होगा; 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण से शुरुआत।
परी अखाड़ा और श्री पंचभूत अखाड़ा (पूर्णतः महिला-संचालित) कुंभ की तैयारियों में सक्रिय।
प्रशासन, मुख्यमंत्री और रेल मंत्री से महिला साध्वियों की सुरक्षा व अमृत स्नान की व्यवस्था की माँग।
साध्वी ने सरकार से आग्रह किया कि अदालत द्वारा दिए गए अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

साध्वी त्रिकाल भवंता (अनिता शर्मा) ने भोजशाला मामले में अदालत के फैसले का खुलकर स्वागत किया और कहा कि यह निर्णय हिंदू समाज की जागृति का प्रमाण है। नासिक में 16 मई को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने आगामी कुंभ मेले की तैयारियों और महिला साध्वियों की सुरक्षा को लेकर भी अपनी बात रखी।

भोजशाला फैसले पर प्रतिक्रिया

साध्वी त्रिकाल भवंता ने कहा, 'हम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हैं, क्योंकि हिंदू धर्म को बहुत पहले से राजनीति और कई विभिन्न रास्तों के तहत दबाया गया है और अब जो भी हो रहा है, उससे हिंदू जाग गया है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि परी अखाड़ा और पंचभूत अखाड़ा मिलकर सनातन धर्म की रक्षा के लिए हर संघर्ष को तैयार हैं। उन्होंने सरकार से माँग की कि जो अधिकार मिले हैं, उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ की तैयारियाँ

महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेला 2027-28 की तैयारियाँ जोरों पर हैं। साध्वी त्रिकाल भवंता ने बताया कि आद्य जगतगुरु शंकराचार्य त्रिकाल भवंत सरस्वती जी महाराज — जो गायत्री त्रिवेणी प्रयाग पीठ की पीठाधीश्वर और परी अखाड़े की प्रमुख हैं — के नेतृत्व में तैयारियाँ चल रही हैं। इस कुंभ का आधिकारिक शुभारंभ 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण के साथ होगा।

महिला अखाड़ों की भूमिका

साध्वी त्रिकाल भवंता ने बताया कि परी अखाड़े के बाद श्री पंचभूत अखाड़ा — जो पूर्णतः महिलाओं द्वारा संचालित है — को भी पूरी तरह तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य एक मिशन के तहत कार्य करने को प्रतिबद्ध हैं। यह पहल महिला साध्वियों की कुंभ में सक्रिय भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

प्रशासन से सुरक्षा की माँग

साध्वी त्रिकाल भवंता ने राज्य प्रशासन, मुख्यमंत्री, रेल मंत्री और संबंधित अधिकारियों से माँग की कि कुंभ में महिला साध्वियों को पूर्ण सुरक्षा, सुविधाएँ और अमृत स्नान की व्यवस्था दी जाए। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाली साध्वी पदाधिकारी, महामंडलेश्वर और जगतगुरु भयमुक्त होकर अपनी साधना और पूजा कर सकें, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यह माँग महिला धार्मिक नेतृत्व की बढ़ती आवाज़ को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

धार्मिक संस्थाओं में लैंगिक समानता के एक उभरते विमर्श को सामने लाती है। कुंभ जैसे विशाल आयोजनों में महिला साध्वियों की सुरक्षा की माँग मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर हाशिए पर रहती है, जबकि यह एक ठोस प्रशासनिक चुनौती है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साध्वी त्रिकाल भवंता ने भोजशाला फैसले पर क्या कहा?
साध्वी त्रिकाल भवंता ने भोजशाला मामले में अदालत के फैसले का स्वागत किया और कहा कि हिंदू धर्म को लंबे समय से दबाया गया है, लेकिन अब हिंदू समाज जाग चुका है। उन्होंने सरकार से माँग की कि मिले हुए अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला कब होगा?
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेला 2027-28 में आयोजित होगा। इसकी तैयारियों के तहत 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण किया जाएगा, जो आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक होगा।
परी अखाड़ा और पंचभूत अखाड़ा क्या हैं?
परी अखाड़ा एक धार्मिक संस्था है जिसकी प्रमुख साध्वी त्रिकाल भवंता हैं। श्री पंचभूत अखाड़ा पूर्णतः महिलाओं द्वारा संचालित अखाड़ा है, जो कुंभ मेले में महिला साध्वियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए काम करता है।
साध्वी त्रिकाल भवंता ने प्रशासन से क्या माँगें रखीं?
उन्होंने राज्य प्रशासन, मुख्यमंत्री, रेल मंत्री और अधिकारियों से माँग की कि कुंभ मेले में महिला साध्वियों को पूर्ण सुरक्षा, सुविधाएँ और अमृत स्नान की व्यवस्था दी जाए। उनका कहना था कि देश-विदेश से आने वाली साध्वी पदाधिकारी भयमुक्त होकर साधना कर सकें।
भोजशाला मामला क्या है?
भोजशाला मध्य प्रदेश के धार ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसे हिंदू पक्ष वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है और मुस्लिम पक्ष कमाल मौला मस्जिद। इस स्थल के स्वामित्व और उपयोग को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है, जिस पर हाल ही में अदालत का फैसला आया।
राष्ट्र प्रेस
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