भोजशाला फैसले पर BJP बोली 'सनातन की जीत', विपक्ष और मुस्लिम पक्ष ने जताया विरोध
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार स्थित भोजशाला–कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया, जिसके बाद देश की राजनीति तेज़ी से ध्रुवीकृत हो गई है। जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इसे सनातन धर्म की ऐतिहासिक जीत करार दिया, वहीं विपक्षी दलों ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है। मुस्लिम पक्ष ने कथित तौर पर मामले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
भाजपा विधायक सी.पी. सिंह ने कहा कि धार स्थित भोजशाला का विवाद अत्यंत पुराना है और यह स्थान राजा भोज के काल से जुड़ा माना जाता है। उन्होंने कहा, 'मुगल काल में कई मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों के स्वरूप बदल दिए गए थे और भोजशाला भी उसी का हिस्सा रही होगी।' उनके अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह एक हिंदू मंदिर है और वहाँ पूजा का अधिकार है।
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए मुस्लिम पक्ष से 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' की भावना के साथ फैसले को स्वीकार करने की अपील की। BJP नेत्री केतकी सिंह ने इसे सीधे तौर पर 'सनातन की जीत' कहा और इसे लंबे संघर्ष का परिणाम बताया।
शिवसेना (UBT) का स्वागत
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय करोड़ों हिंदू भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखकर आया है। दुबे ने अयोध्या राम मंदिर फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने तब भी प्रसन्नता व्यक्त की थी, और अब मथुरा जन्मभूमि विवाद पर भी इसी तरह के निर्णय की उम्मीद जताई जा रही है।
विपक्ष की आपत्ति
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ऐसे मुद्दों को बार-बार उठाकर असली समस्याओं से ध्यान भटकाया जा रहा है। उनके अनुसार देश में बेरोज़गारी, महँगाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन चर्चा बार-बार धार्मिक विवादों पर आकर अटक जाती है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सरकारें लगातार ऐसे कदम उठा रही हैं जो एक खास धार्मिक एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं। रॉय ने कहा कि वे बाबरी मस्जिद मामले के फैसले से भी असहमत रहे हैं।
मुस्लिम पक्ष की स्थिति
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा, 'वहाँ की कमेटी सर्वोच्च न्यायालय जाएगी और हम उसे अपना नैतिक समर्थन देंगे।' उन्होंने चिंता जताई कि न्यायपालिका के ऐसे फैसलों से एक ऐसा माहौल बन रहा है जहाँ हर गाँव में लोग मस्जिदों को मंदिर बताने लगेंगे। उनके अनुसार, कमाल मौला मस्जिद की स्थानीय कमेटियाँ भी इस मामले में उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगी।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई पुराने धार्मिक स्थलों को लेकर कानूनी विवाद सक्रिय हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना के साथ यह मामला अभी और लंबा खिंच सकता है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ यह संकेत देती हैं कि भोजशाला विवाद आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में केंद्रीय स्थान बनाए रख सकता है।