भोजशाला फैसले पर BJP बोली 'सनातन की जीत', विपक्ष और मुस्लिम पक्ष ने जताया विरोध

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भोजशाला फैसले पर BJP बोली 'सनातन की जीत', विपक्ष और मुस्लिम पक्ष ने जताया विरोध

सारांश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के भोजशाला फैसले ने एक बार फिर धार्मिक-राजनीतिक रेखाएँ खींच दी हैं — BJP ने इसे सनातन की जीत बताया, विपक्ष ने एजेंडे पर सवाल उठाए, और मुस्लिम पक्ष सर्वोच्च न्यायालय की ओर बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार स्थित भोजशाला–कमल मौला मस्जिद परिसर पर अहम फैसला सुनाया।
सिंह , राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक और नेत्री केतकी सिंह ने इसे 'सनातन की जीत' बताया।
शिवसेना (UBT) के आनंद दुबे ने फैसले का स्वागत किया और मथुरा विवाद पर भी ऐसे ही निर्णय की उम्मीद जताई।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और TMC सांसद सौगत रॉय ने फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई।
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा कि मुस्लिम पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगा।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार स्थित भोजशाला–कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया, जिसके बाद देश की राजनीति तेज़ी से ध्रुवीकृत हो गई है। जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इसे सनातन धर्म की ऐतिहासिक जीत करार दिया, वहीं विपक्षी दलों ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है। मुस्लिम पक्ष ने कथित तौर पर मामले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

भाजपा विधायक सी.पी. सिंह ने कहा कि धार स्थित भोजशाला का विवाद अत्यंत पुराना है और यह स्थान राजा भोज के काल से जुड़ा माना जाता है। उन्होंने कहा, 'मुगल काल में कई मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों के स्वरूप बदल दिए गए थे और भोजशाला भी उसी का हिस्सा रही होगी।' उनके अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह एक हिंदू मंदिर है और वहाँ पूजा का अधिकार है।

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए मुस्लिम पक्ष से 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' की भावना के साथ फैसले को स्वीकार करने की अपील की। BJP नेत्री केतकी सिंह ने इसे सीधे तौर पर 'सनातन की जीत' कहा और इसे लंबे संघर्ष का परिणाम बताया।

शिवसेना (UBT) का स्वागत

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय करोड़ों हिंदू भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखकर आया है। दुबे ने अयोध्या राम मंदिर फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने तब भी प्रसन्नता व्यक्त की थी, और अब मथुरा जन्मभूमि विवाद पर भी इसी तरह के निर्णय की उम्मीद जताई जा रही है।

विपक्ष की आपत्ति

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ऐसे मुद्दों को बार-बार उठाकर असली समस्याओं से ध्यान भटकाया जा रहा है। उनके अनुसार देश में बेरोज़गारी, महँगाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन चर्चा बार-बार धार्मिक विवादों पर आकर अटक जाती है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सरकारें लगातार ऐसे कदम उठा रही हैं जो एक खास धार्मिक एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं। रॉय ने कहा कि वे बाबरी मस्जिद मामले के फैसले से भी असहमत रहे हैं।

मुस्लिम पक्ष की स्थिति

जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा, 'वहाँ की कमेटी सर्वोच्च न्यायालय जाएगी और हम उसे अपना नैतिक समर्थन देंगे।' उन्होंने चिंता जताई कि न्यायपालिका के ऐसे फैसलों से एक ऐसा माहौल बन रहा है जहाँ हर गाँव में लोग मस्जिदों को मंदिर बताने लगेंगे। उनके अनुसार, कमाल मौला मस्जिद की स्थानीय कमेटियाँ भी इस मामले में उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगी।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई पुराने धार्मिक स्थलों को लेकर कानूनी विवाद सक्रिय हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना के साथ यह मामला अभी और लंबा खिंच सकता है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ यह संकेत देती हैं कि भोजशाला विवाद आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में केंद्रीय स्थान बनाए रख सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अन्य मुद्दों पर BJP के विरोधी हैं, इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं — यह दर्शाता है कि धार्मिक-सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अपील पारंपरिक विपक्षी गठबंधनों की सीमाएँ लाँघ रही है। मलिक मोतसिम खान की यह चेतावनी कि 'हर गाँव में मस्जिदों पर दावे होने लगेंगे', महज़ आशंका नहीं — यह उस व्यापक प्रवृत्ति की ओर संकेत है जो उपासना स्थल अधिनियम 1991 की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। असली परीक्षा सर्वोच्च न्यायालय में होगी, जहाँ यह तय होगा कि यह फैसला एक अपवाद था या एक मिसाल।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला–कमल मौला मस्जिद विवाद क्या है?
धार (मध्य प्रदेश) स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू पक्ष राजा भोज काल का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग करता रहा है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में इस परिसर को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है, जिसे BJP ने हिंदू पक्ष की जीत बताया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर BJP की क्या प्रतिक्रिया रही?
BJP विधायक सी.पी. सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक और नेत्री केतकी सिंह ने फैसले को 'सनातन की जीत' और 'ऐतिहासिक निर्णय' बताया। अजय आलोक ने मुस्लिम पक्ष से 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' की भावना के साथ फैसले को स्वीकार करने की अपील की।
विपक्ष ने इस फैसले पर क्या आपत्ति जताई?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ऐसे धार्मिक विवाद बेरोज़गारी और महँगाई जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं। TMC सांसद सौगत रॉय ने फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठाए।
मुस्लिम पक्ष अब क्या कदम उठाएगा?
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान के अनुसार, कमाल मौला मस्जिद की स्थानीय कमेटियाँ इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगी। उन्होंने कहा कि उनका संगठन इस प्रयास को नैतिक समर्थन देगा।
क्या शिवसेना (UBT) ने भी इस फैसले का समर्थन किया?
हाँ, शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने फैसले का स्वागत किया और इसे करोड़ों हिंदू भक्तों की भावनाओं का सम्मान बताया। उन्होंने मथुरा जन्मभूमि विवाद में भी ऐसे ही निर्णय की उम्मीद जताई।
राष्ट्र प्रेस
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