15 अगस्त 2026
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कर्नाटक गुटखा प्रतिबंध बरकरार: स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने अफवाहों को किया खारिज, सुपारी किसानों को नुकसान नहीं

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कर्नाटक गुटखा प्रतिबंध बरकरार: स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने अफवाहों को किया खारिज, सुपारी किसानों को नुकसान नहीं

सारांश

अफवाहों के बीच कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने साफ किया — निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पर प्रतिबंध वापस नहीं हुआ। सुपारी किसानों को नुकसान नहीं, बल्कि कीमतें बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री शिवकुमार का भी जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश।

मुख्य बातें

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी.
खादर ने 15 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पर प्रतिबंध का आदेश वापस नहीं लिया गया है।
प्रतिबंध केवल पान मसाला में निकोटीन के विरुद्ध है — सुपारी पर कोई रोक नहीं।
खादर के अनुसार, गुटखा निर्माण में आमतौर पर नेपाल और बांग्लादेश से आयातित सुपारी का उपयोग होता है, भारतीय सुपारी का नहीं।
शिवकुमार ने जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सुपारी उत्पादकों के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया।
विजयेंद्र ने आरोप लगाया था कि प्रतिबंध से किसानों में डर और अनिश्चितता फैल रही है।
खादर ने दावा किया कि पिछले प्रतिबंध के बाद भी सुपारी के दाम तीन महीने में बढ़े थे।

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने 15 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पर लगाया गया प्रतिबंध वापस नहीं लिया है और न ही ऐसा कोई इरादा है। यह स्पष्टीकरण उन अफवाहों के बीच आया है जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार यह आदेश लागू होने के कुछ ही दिनों बाद वापस लेने पर विचार कर रही है।

प्रतिबंध का दायरा: क्या है और क्या नहीं

खादर ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल पान मसाला में मिलाए जाने वाले निकोटीन के विरुद्ध है — सुपारी पर किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह आदेश केवल पान मसाला में निकोटीन के खिलाफ है। सुपारी पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हमारा विभाग और सरकार सुपारी उत्पादकों, किसानों और व्यापारियों को पूरा सहयोग और प्रोत्साहन देती रहेगी।' मंत्री ने यह भी दावा किया कि आमतौर पर गुटखा निर्माण में नेपाल और बांग्लादेश से आयातित सुपारी का उपयोग होता है, न कि भारतीय सुपारी का।

सुपारी किसानों पर असर: सरकार का आश्वासन

खादर ने भरोसा दिलाया कि इस फैसले से सुपारी किसानों और व्यापारियों को कोई आर्थिक नुकसान नहीं होगा, बल्कि उनका अनुमान है कि सुपारी की कीमतें बढ़ भी सकती हैं। उन्होंने पिछले गुटखा प्रतिबंध का उदाहरण देते हुए कहा, 'हमने तब भी कहा था कि सुपारी की कीमतें नहीं गिरेंगी। तीन महीने बाद सुपारी के दाम बढ़ गए थे।' उन्होंने एक बार फिर तीन महीने इंतजार करने की अपील की।

मुख्यमंत्री शिवकुमार का रुख

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस मुद्दे पर चर्चा की है और स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सुपारी उत्पादकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। खादर ने कहा, 'मुख्यमंत्री ने भी साफ कर दिया है कि सुपारी किसानों को किसी तरह की कठिनाई नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य के नजरिए से यह एक अच्छा फैसला है।'

विपक्ष की आपत्ति और राजनीतिक पृष्ठभूमि

कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार गुटखा प्रतिबंध के जरिए किसानों और सुपारी उत्पादकों के हितों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रही है, जिससे राज्यभर के किसानों में डर और अनिश्चितता पैदा हो रही है। इसके अलावा, विभिन्न दलों के विधायकों ने भी नाराजगी जताई थी कि इस आदेश से कई जिलों के सुपारी उत्पादकों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में गुटखा प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ हो — पिछले प्रतिबंध के दौरान भी ऐसी ही चिंताएँ सामने आई थीं, जो बाद में निराधार साबित हुई थीं।

आगे की राह

स्वास्थ्य मंत्री खादर ने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार अपने फैसले पर अडिग है और जनस्वास्थ्य के हित में यह कदम वापस नहीं लिया जाएगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले तीन महीनों में सुपारी बाजार पर इस प्रतिबंध का वास्तविक असर क्या होता है और क्या विपक्ष का दबाव सरकार की नीति को प्रभावित कर पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार प्रतिबंध को वास्तव में लागू कर पाएगी — क्योंकि कर्नाटक में गुटखा पर पहले भी प्रतिबंध लगे हैं और उनका क्रियान्वयन संदिग्ध रहा है। विभिन्न दलों के विधायकों की नाराजगी यह बताती है कि सुपारी लॉबी का राजनीतिक प्रभाव गहरा है। जनस्वास्थ्य की दृष्टि से यह कदम सही है, लेकिन बिना कड़े प्रवर्तन तंत्र के यह भी पिछले प्रतिबंधों की तरह कागजी रह सकता है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में गुटखा प्रतिबंध वापस लिया गया या नहीं?
नहीं, कर्नाटक सरकार ने गुटखा प्रतिबंध वापस नहीं लिया है। स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने 15 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पर रोक का आदेश पूरी तरह बरकरार है।
कर्नाटक के गुटखा प्रतिबंध में सुपारी पर भी रोक है क्या?
नहीं, यह प्रतिबंध केवल पान मसाला में मिलाए जाने वाले निकोटीन पर है। सुपारी की खेती, बिक्री और व्यापार पर कोई प्रतिबंध नहीं है और सरकार ने सुपारी उत्पादकों को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
क्या इस प्रतिबंध से सुपारी किसानों को नुकसान होगा?
स्वास्थ्य मंत्री खादर के अनुसार, सुपारी किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि गुटखा निर्माण में मुख्यतः नेपाल और बांग्लादेश से आयातित सुपारी का उपयोग होता है और पिछले प्रतिबंध के बाद सुपारी की कीमतें तीन महीने में बढ़ी थीं।
BJP ने इस प्रतिबंध पर क्या आपत्ति जताई है?
कर्नाटक BJP अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया है कि सरकार गुटखा प्रतिबंध के जरिए किसानों और सुपारी उत्पादकों के हितों को नुकसान पहुँचा रही है, जिससे राज्यभर के किसानों में डर और अनिश्चितता पैदा हो रही है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि जनता का स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सुपारी उत्पादकों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो। उन्होंने पहले भी गुटखा प्रतिबंध के फैसले का समर्थन किया था।
राष्ट्र प्रेस
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