पान मसाला-गुटखा में नशीले पदार्थ मिले तो बैन: कर्नाटक CM डीके शिवकुमार की कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 28 जून 2026 को बेंगलुरु में स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि राज्य में बिकने वाले पान मसाला और गुटखा उत्पादों में किसी भी मात्रा में नशीले पदार्थों की मिलावट साबित हुई, तो इन सभी उत्पादों की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाएगा। उन्होंने यह बात कांतीरवा इंडोर स्टेडियम में आयोजित राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RGUHS) के 31वें स्थापना दिवस और 'नशा मुक्त भारत अभियान' कार्यक्रम में कही।
मुख्यमंत्री की चेतावनी: क्या कहा शिवकुमार ने
शिवकुमार ने कहा, 'मुझे जानकारी मिली है कि पान मसाला, गुटखा, सुपारी से बने उत्पादों और ऐसी ही दूसरी चीज़ों में नशीले पदार्थ मिलाकर बाज़ार में बेचे जा रहे हैं। अगर यह सच है और इसे तुरंत नहीं रोका गया, तो कर्नाटक में सभी तरह के पान मसाला और गुटखा उत्पादों की बिक्री पर बैन लगा दिया जाएगा।' यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब देशभर में तंबाकू और नशीले उत्पादों की मिलावट को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
नशा-मुक्त कर्नाटक: सरकार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य नशा-मुक्त कर्नाटक बनाना है। उन्होंने उपस्थित स्वास्थ्य पेशेवरों को इस अभियान का 'एंबेसडर' बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को नशे की लत से बचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोड़ा, 'नशीली दवाओं की लत को रोकना एक बड़ी चुनौती है, और हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि युवा पीढ़ी नशे के जाल में न फँसे।'
RGUHS और कर्नाटक की चिकित्सा शिक्षा
शिवकुमार ने इस अवसर पर राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज को देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय बताया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में 70 मेडिकल कॉलेज हैं, जो देश के किसी भी अन्य राज्य से अधिक हैं, और इस कारण राज्य को देश की 'मेडिकल राजधानी' का दर्जा प्राप्त है। विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उन्होंने वीरप्पा मोइली का आभार व्यक्त किया।
नए कैंपस और भविष्य की योजनाएँ
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि RGUHS को जल्द ही बेंगलुरु दक्षिण जिले में उसके नए कैंपस में स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल शिक्षा सभी वर्गों के लिए सुलभ होनी चाहिए। गौरतलब है कि बेंगलुरु को उसकी अनुकूल जलवायु के कारण अक्सर 'एयर-कंडीशंड शहर' कहा जाता है, जो इसे स्वास्थ्य और शिक्षा संस्थानों के लिए आदर्श स्थान बनाती है। पान मसाला और गुटखा पर संभावित प्रतिबंध की दिशा में सरकार की अगली कार्रवाई पर अब सभी की नज़रें टिकी हैं।