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2028 तक नशामुक्त कर्नाटक का संकल्प: CM डीके शिवकुमार बोले — बच्चों की लत मत छिपाएं, पुलिस का साथ दें

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2028 तक नशामुक्त कर्नाटक का संकल्प: CM डीके शिवकुमार बोले — बच्चों की लत मत छिपाएं, पुलिस का साथ दें

सारांश

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु में 2028 तक राज्य को नशामुक्त बनाने का संकल्प दोहराया। अभिभावकों से कहा — सामाजिक कलंक से न डरें, बच्चों की लत छिपाने से नुकसान बढ़ता है। पिछले तीन वर्षों में ₹89 करोड़ के मादक पदार्थ नष्ट किए जा चुके हैं।

मुख्य बातें

CM डीके शिवकुमार ने 30 जून 2026 को बेंगलुरु में 2028 तक कर्नाटक को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य घोषित किया।
अभिभावकों से अपील — सामाजिक कलंक के डर से बच्चों की नशे की लत न छिपाएं; बच्चों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
नशे की जानकारी देने वाले नागरिकों और अभिभावकों को पुलिस विभाग की ओर से पुरस्कार दिया जाएगा।
पिछले तीन वर्षों में ₹89 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ नष्ट किए गए।
पान मसाला और गुटखा में नशीले पदार्थ मिलाने और फोन के ज़रिए घर-घर आपूर्ति की शिकायतें; सख्त कार्रवाई के निर्देश।
स्कूलों-कॉलेजों में स्टूडेंट पुलिसिंग सिस्टम और नशा-विरोधी विशेष टास्क फोर्स गठित।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 30 जून 2026 को बेंगलुरु के कांतिराव इंडोर स्टेडियम में घोषणा की कि राज्य सरकार का सुनिश्चित लक्ष्य वर्ष 2028 तक कर्नाटक को पूर्णतः नशामुक्त बनाना है। अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस-2026 के अवसर पर कर्नाटक पुलिस द्वारा आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने नागरिकों, अभिभावकों, छात्रों और युवाओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

मुख्यमंत्री का संकल्प और सरकार का संदेश

शिवकुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमारा लक्ष्य 2028 तक नशामुक्त और व्यसनमुक्त कर्नाटक बनाना है।" उन्होंने जोड़ा कि यदि जनता, युवा और छात्र सरकार के साथ मिलकर काम करें तो नशे के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म किया जा सकता है। सरकार का केंद्रीय संदेश है — "नशा छोड़ो, खुशियां चुनो" — और मुख्यमंत्री ने इसे महज एक नारा नहीं, बल्कि हर कन्नड़वासी की सामूहिक प्रतिबद्धता बताया।

अभिभावकों से अपील: सामाजिक कलंक से न डरें

मुख्यमंत्री ने माता-पिता को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि वे सामाजिक बदनामी के डर से अपने बच्चों की नशे की लत को न छिपाएं। उनके अनुसार, "जितना अधिक समय यह समस्या छिपाई जाएगी, बच्चे के भविष्य को उतना ही ज्यादा नुकसान होगा।" उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे पुलिस का सहयोग करें ताकि नशे की आपूर्ति के स्रोत तक पहुँचा जा सके और अन्य युवाओं को भी बचाया जा सके। शिवकुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देश दिया है कि ऐसे बच्चों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए।

मुखबिरों को पुरस्कार, नेटवर्क तोड़ने की रणनीति

शिवकुमार ने घोषणा की कि नशे की तस्करी या सेवन से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी देने वाले अभिभावकों और आम नागरिकों को पुलिस विभाग की ओर से पुरस्कार दिया जाएगा। यह कदम नशे की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने चिंता जताई कि पुलिस ने सरकार को सूचित किया है कि पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों में नशीले पदार्थ मिलाए जा रहे हैं और फोन के ज़रिए घर-घर नशे की आपूर्ति हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में गृह मंत्री प्रियंक खड़गे प्रभावी कार्रवाई कर रहे हैं।

पिछले तीन वर्षों की कार्रवाई और आँकड़े

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर के नेतृत्व में करीब ₹89 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ नष्ट किए गए हैं। उन्होंने इस कार्य में लगे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, कांस्टेबलों और कर्मचारियों को बधाई दी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में हर वर्ष लगभग 13 से 14 लाख लोगों की मौत तंबाकू सेवन के कारण होती है — एक आँकड़ा जो नशे की व्यापकता की गंभीरता को रेखांकित करता है।

युवाओं और छात्रों के लिए विशेष पहल

शिवकुमार ने बताया कि युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में स्टूडेंट पुलिसिंग सिस्टम शुरू किया गया है। नशे और अन्य अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष टास्क फोर्स भी गठित की गई है। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि कर्नाटक हर वर्ष करीब 19,940 डॉक्टर, एक लाख से अधिक नर्स और हज़ारों इंजीनियर तैयार करता है — इस प्रतिभा को नशे के खतरे से बचाना राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नशामुक्त कर्नाटक के निर्माण में सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक भागीदारी की भी उन्होंने अपील की।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹89 करोड़ के मादक पदार्थ नष्ट होने के बावजूद राज्य में नशे की आपूर्ति श्रृंखला का फोन-आधारित विस्तार यह बताता है कि चुनौती कम नहीं हुई — बल्कि और परिष्कृत हुई है। पान मसाला और गुटखा जैसे रोज़मर्रा के उत्पादों में नशीले पदार्थ मिलाने की स्वीकारोक्ति खुद पुलिस की ओर से आई है, जो निगरानी की खामियों को उजागर करती है। मुखबिरों को पुरस्कार देने की नीति सही दिशा में कदम है, परंतु बिना स्पष्ट जवाबदेही ढाँचे और स्वतंत्र मूल्यांकन के, 2028 का लक्ष्य एक और राजनीतिक घोषणा बनने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक को 2028 तक नशामुक्त बनाने की योजना क्या है?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 30 जून 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार 2028 तक कर्नाटक को नशामुक्त और व्यसनमुक्त बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इस योजना में स्टूडेंट पुलिसिंग सिस्टम, विशेष टास्क फोर्स और मुखबिरों को पुरस्कार जैसी पहलें शामिल हैं।
CM शिवकुमार ने अभिभावकों से क्या अपील की?
शिवकुमार ने माता-पिता से कहा कि वे सामाजिक बदनामी के डर से बच्चों की नशे की लत न छिपाएं, क्योंकि इससे बच्चे का भविष्य और अधिक खतरे में पड़ता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पुलिस ऐसे बच्चों की पहचान गोपनीय रखेगी।
नशे की जानकारी देने पर क्या पुरस्कार मिलेगा?
हाँ, सरकार ने घोषणा की है कि नशे की तस्करी या सेवन से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी देने वाले अभिभावकों और आम नागरिकों को पुलिस विभाग की ओर से पुरस्कृत किया जाएगा। इसका उद्देश्य नशे की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना है।
कर्नाटक में पिछले तीन वर्षों में नशे के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर के नेतृत्व में पिछले तीन वर्षों में करीब ₹89 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ नष्ट किए गए हैं। इसके अलावा स्कूलों-कॉलेजों में स्टूडेंट पुलिसिंग सिस्टम और विशेष टास्क फोर्स भी गठित की गई है।
पान मसाला और गुटखा में नशीले पदार्थ मिलाने पर क्या कदम उठाए जाएंगे?
CM शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि पान मसाला या गुटखा में नशीले पदार्थ मिलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गृह मंत्री प्रियंक खड़गे इस दिशा में सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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