DK शिवकुमार का कर्नाटक CM के रूप में शपथ ग्रहण आज, बेंगलुरु में शाम 4:05 बजे समारोह
सारांश
मुख्य बातें
डीके शिवकुमार बुधवार, 3 जून को शाम 4:05 बजे बेंगलुरु के लोक भवन स्थित ग्लास हाउस में कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। राज्यपाल थावर चंद गहलोत शिवकुमार और नई कैबिनेट के सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएँगे। समारोह से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें ‘जुझारू नेता’ बताते हुए सराहा।
विधायक वडेट्टीवार ने की तारीफ
कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा कि जब भी राज्य में पार्टी मुश्किलों में रही, शिवकुमार ने उसे आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, ‘उन्हें अपने राज्य के बाहर भी एक जुझारू नेता के तौर पर जाना जाता है। उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में भी है जो दूसरों के सुख-दुख में शामिल होते हैं।'
वडेट्टीवार के अनुसार, शिवकुमार ने पार्टी के प्रति अपने जुड़ाव से कभी समझौता नहीं किया और हमेशा कहा, ‘मैं जेल जाना पसंद करूँगा, लेकिन भाजपा में शामिल नहीं होऊँगा।' उन्होंने जोड़ा कि ‘जो लड़ता है, वही जीतता है' और यह बात अब लोगों को समझ में आ रही है।
पटवारी और हनुमंत राव का बयान
समारोह में शामिल होने बेंगलुरु पहुँचे मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि सिद्दारमैया के कार्यकाल में राज्य की आर्थिक प्रगति पर कर्नाटक का हर निवासी गर्व करता है, और कांग्रेस को सत्ता में लाने में शिवकुमार की भूमिका अहम रही। उन्होंने कहा कि शिवकुमार ने सिद्दारमैया के मुख्यमंत्री-काल का सम्मानपूर्वक समर्थन करके ‘राजनीति में आपसी सम्मान और सहयोग' की मिसाल कायम की।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता वी हनुमंत राव ने कहा कि नेतृत्व में यह बदलाव पार्टी के भीतर एक लंबी राजनीतिक प्रक्रिया का नतीजा है। उनके अनुसार, ‘पिछले 21 सालों से कर्नाटक में एक प्रक्रिया चल रही है, जिसमें सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार शामिल रहे हैं।' हनुमंत राव ने बताया कि हाई कमान ने सिद्दारमैया को अन्य ज़िम्मेदारियाँ सौंपने का फैसला किया है और उन्हें कांग्रेस कार्य समिति में जगह दी गई है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि मुख्यमंत्री का चुनाव कांग्रेस का आंतरिक मामला है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक का राजनीतिक माहौल सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ होता जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम उनके लिए शुभकामनाएँ देते हैं… मौजूदा हालात दिखाते हैं कि आने वाले चुनावों में आम लोग और वोटर भारतीय जनता पार्टी की तरफ देख रहे हैं।'
आगे क्या
गौरतलब है कि यह नेतृत्व परिवर्तन 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस आलाकमान द्वारा तय किए गए कथित ‘रोटेशनल फॉर्मूले' के तहत हो रहा है, जिसमें सिद्दारमैया और शिवकुमार के बीच कार्यकाल बँटवारे की चर्चा रही थी। अब निगाहें नई कैबिनेट के स्वरूप और चुनाव-पूर्व किए गए कल्याणकारी वादों के क्रियान्वयन पर रहेंगी।