झारखंड छात्र आंदोलन: 90% मांगों पर सहमति का दावा, मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने BJP पर लगाए राजनीतिकरण के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार के मंत्री राधा कृष्ण किशोर और शिल्पी नेहा तिर्की ने 12 अगस्त 2026 को रांची में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार छात्रों की करीब 90 प्रतिशत मांगों पर सहमति दे चुकी है और बातचीत के रास्ते पूरी तरह खुले हैं। दोनों मंत्रियों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर छात्र आंदोलन का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए विपक्ष से विधानसभा में सार्थक चर्चा में भाग लेने की अपील की।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि 10 अगस्त को कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में यह तय किया गया था कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अनुपूरक बजट चर्चा का समय दो घंटे से बढ़ाकर तीन घंटे किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव स्वयं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से आया था। इसके बावजूद विपक्ष ने विधानसभा में चर्चा में भाग लेने के बजाय आंदोलन को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की दिशा में मोड़ दिया।
BJP पर राजनीतिकरण का आरोप
किशोर ने BJP के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया जिनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार को छात्र आंदोलन के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा था। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी दिल्ली में हैं, झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन सरकार है — ऐसे में राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराना तर्कसंगत नहीं है।' मंत्री ने आरोप लगाया कि BJP का पूरा फोकस 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक हमला करने पर है।
सुरक्षा बलों के संयम पर सरकार का पक्ष
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि 10 अगस्त के मार्च में बड़ी संख्या में छात्र शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विधानसभा की ओर बढ़ रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP से जुड़े लोगों ने भीड़ को उकसाने की कोशिश की और कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की। तिर्की ने बताया कि सरकार की ओर से सुरक्षा बलों को स्पष्ट निर्देश थे कि किसी भी परिस्थिति में अनावश्यक बल का प्रयोग न किया जाए, यही कारण रहा कि प्रदर्शनकारी विधानसभा तक पहुँच सके। स्थिति बिगड़ने पर केवल सीमित कार्रवाई की गई।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
किशोर ने स्पष्ट किया कि सरकार BJP के राजनीतिक एजेंडे के आधार पर कोई निर्णय नहीं लेगी और जो भी फैसला होगा, वह राज्य एवं छात्रों के हित को ध्यान में रखकर होगा। तिर्की ने कहा कि वास्तविक छात्र अब यह समझने लगे हैं कि कुछ राजनीतिक दल आंदोलन के जरिए अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि छात्रों की समस्याओं पर सीधी बातचीत जारी है और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
आगे क्या
दोनों मंत्रियों ने विपक्ष से अपील की कि वह छात्रों के मुद्दे को सड़क पर नहीं, बल्कि विधानसभा में उठाए। सरकार का दावा है कि 90 प्रतिशत मांगों पर सहमति बन चुकी है और शेष मुद्दों पर भी बातचीत जारी है। यह देखना होगा कि क्या छात्र संगठन इस सहमति को पर्याप्त मानते हैं और आंदोलन समाप्त होता है, या राजनीतिक दबाव में यह और तेज होता है।