नशा मुक्त भारत सम्मेलन: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बेंगलुरु में दिया नशे के खिलाफ संकल्प का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 28 जून 2026 को बेंगलुरु स्थित राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में आयोजित 'नशा मुक्त भारत' सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों का सेवन केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास, शिक्षा और सामाजिक एकजुटता का भी संकट है।
उपराष्ट्रपति का संबोधन
सभा को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने कहा, 'मैं हमारे शैक्षणिक संस्थानों से आग्रह करता हूं कि वे एडिक्शन मेडिसिन, मानसिक स्वास्थ्य और समुदाय-आधारित उपायों पर शोध को और मजबूत करते रहें।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 'नशा मुक्त भारत' का वास्तविक अर्थ केवल नशीले पदार्थों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि स्वस्थ विकल्पों की उपलब्धता है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से संकल्प लेने का आग्रह किया कि हर युवा को आगे बढ़ने और फलने-फूलने का अवसर मिले।
पोलियो वैक्सीनेशन में सहभागिता
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के अंतर्गत शिशुओं को पोलियो वैक्सीन की बूंदें पिलाकर इस स्वास्थ्य अभियान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। यह कदम स्वास्थ्य जागरूकता के व्यापक संदेश को और बल देता है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार की कड़ी चेतावनी
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस अवसर पर व्यापारियों और उत्पादकों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'मुझे जानकारी मिली है कि पान मसाला, गुटखा, सुपारी से बने उत्पादों और ऐसी ही दूसरी चीजों में नशीले पदार्थ मिलाकर बाजार में बेचे जा रहे हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी पान मसाला या गुटखा उत्पाद में नशीले पदार्थ पाए गए तो कर्नाटक में उनकी बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाएगा।
शिवकुमार ने कहा, 'हमारा लक्ष्य नशा-मुक्त कर्नाटक बनाना है। नशीली दवाओं की लत को रोकना एक बड़ी चुनौती है, और हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि युवा पीढ़ी नशे की लत के जाल में न फंसे।' उन्होंने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को इस मिशन का 'एंबेसडर' बताया।
गणमान्य उपस्थिति
इस सम्मेलन में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल जस्टिस (रिटायर्ड) एस. अब्दुल नजीर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर नशा-विरोधी चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
आगे की राह
गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकारें नशा उन्मूलन के लिए समन्वित प्रयास कर रही हैं। राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों से अपेक्षा है कि वे एडिक्शन मेडिसिन में शोध और प्रशिक्षण को प्राथमिकता देंगे, ताकि नशा-मुक्त भारत का संकल्प जमीनी स्तर पर साकार हो सके।