26 जून 2026
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अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एक्स पर दिया 'नशा मुक्त भारत' का आह्वान

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अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एक्स पर दिया 'नशा मुक्त भारत' का आह्वान

सारांश

26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा तक — कई नेताओं ने एक्स पर 'नशा मुक्त भारत' का आह्वान किया। राजनीतिक एकजुटता तो दिखी, अब असली परीक्षा नीतिगत अमल की है।

मुख्य बातें

26 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर उपराष्ट्रपति सी.पी.
राधाकृष्णन ने एक्स पर 'नशा मुक्त भारत' का संकल्प दोहराया।
किशन रेड्डी ने युवाओं को सशक्त बनाने और स्वस्थ जीवन-शैली अपनाने का आह्वान किया।
राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने परिवार, समुदाय और जागरूकता को नशे से मुक्ति की कुंजी बताया।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में नशे के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
केंद्र की नशा मुक्त भारत अभियान पहल वर्ष 2020 से सक्रिय है और देशभर के सैकड़ों जिलों में विस्तारित है।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 26 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर 'नशा मुक्त भारत' बनाने के सामूहिक संकल्प का आह्वान किया। उनके साथ केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा सांसद और राज्य के मुख्यमंत्री सहित कई नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर संदेश साझा कर नशे के विरुद्ध जन-जागरण का संकल्प दोहराया।

उपराष्ट्रपति का संदेश

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने एक्स पर लिखा, 'मैं उन विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और संगठनों की सराहना करता हूँ जो इस अभियान को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। उनके प्रयास एक मज़बूत, स्वस्थ और नशा-मुक्त भारत बनाने की दिशा में सार्थक योगदान दे रहे हैं।' उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे जागरूकता फैलाएं, नशा छोड़ने की प्रक्रिया से गुजर रहे लोगों का समर्थन करें और युवाओं को उम्मीद, सेहत और जीवन के मकसद को चुनने के लिए प्रेरित करें।

केंद्रीय मंत्री और सांसद का संकल्प

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने एक्स पर कहा कि जागरूकता, स्वस्थ जीवन-शैली और सही विकल्पों को बढ़ावा देकर युवाओं को उनकी पूरी क्षमता पहचानने और देश की प्रगति में योगदान देने के लिए सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की जहाँ हर व्यक्ति उम्मीद, सम्मान और अवसरों के साथ आगे बढ़े।

राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने एक्स पर लिखा कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के हानिकारक प्रभावों से युवाओं को बचाने के लिए जागरूकता, परिवार का सहयोग, समुदाय की भागीदारी और समय पर सही कदम उठाना अनिवार्य है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि हर युवा अपनी पूरी क्षमता पहचान सके और उसे हासिल कर सके, इस दिशा में सामूहिक प्रयास हो।

असम सरकार की प्रतिबद्धता

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर कहा, 'हमारी सरकार इस मुद्दे पर बहुत गंभीरता से काम कर रही है और नशीले पदार्थों के खिलाफ़ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने और उन्हें इस सामाजिक बर्बादी से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

दिवस का महत्व और व्यापक संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित 26 जून को प्रतिवर्ष नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में नशे की समस्या, विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों में, गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की 'नशा मुक्त भारत अभियान' पहल वर्ष 2020 से सक्रिय है और अब तक देशभर के सैकड़ों जिलों में विस्तारित हो चुकी है।

आगे की राह

नेताओं के इन संदेशों ने नशा-विरोधी जागरूकता को राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय स्थान दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी से जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियानों को बल मिलता है, बशर्ते इसे नीतिगत कार्रवाई और पुनर्वास सेवाओं के विस्तार के साथ जोड़ा जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि संकल्पों से ज़मीन पर कितना बदला है। भारत में नशे की समस्या — विशेषकर पंजाब, मणिपुर और असम जैसे राज्यों में — वर्षों की घोषणाओं के बावजूद गंभीर बनी हुई है। नशा मुक्त भारत अभियान 2020 से चल रहा है, फिर भी नशा पुनर्वास केंद्रों की भारी कमी और जागरूकता बजट की सीमाएँ आलोचकों के निशाने पर हैं। राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन ज़रूरी है, पर उसे मापने योग्य परिणामों — गिरफ्तारियों, पुनर्वास दरों और युवा नशा-उपयोग सर्वेक्षणों — से जोड़े बिना यह महज़ वार्षिक रस्म बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
यह दिवस प्रतिवर्ष 26 जून को संयुक्त राष्ट्र के निर्देश पर नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर नशे की समस्या के समाधान के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता को मज़बूत करना है।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नशा निरोधक दिवस पर क्या कहा?
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने एक्स पर लिखा कि विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और संगठनों के प्रयास नशा-मुक्त भारत बनाने में सार्थक योगदान दे रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से जागरूकता फैलाने, नशा छोड़ने वालों का समर्थन करने और युवाओं को उम्मीद व सेहत चुनने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
असम सरकार नशे के खिलाफ क्या कदम उठा रही है?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार असम सरकार नशीले पदार्थों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। सरकार युवाओं को इस सामाजिक बर्बादी से बचाने और उनका भविष्य सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
नशा मुक्त भारत अभियान क्या है और यह कब शुरू हुआ?
नशा मुक्त भारत अभियान केंद्र सरकार की एक राष्ट्रीय पहल है जो वर्ष 2020 में शुरू हुई। यह अभियान देशभर के सैकड़ों जिलों में जागरूकता, पुनर्वास और नशा-विरोधी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रखने पर केंद्रित है।
इस दिवस पर किन-किन नेताओं ने संदेश दिया?
26 जून 2025 को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन , केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी , राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर 'नशा मुक्त भारत' का संकल्प साझा किया। सभी ने युवाओं की सुरक्षा और जागरूकता को प्राथमिकता बताया।
राष्ट्र प्रेस
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