नशा: युवाओं, समाज और राष्ट्र पर पड़ता है गंभीर प्रभाव - उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

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नशा: युवाओं, समाज और राष्ट्र पर पड़ता है गंभीर प्रभाव - उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने धर्मशाला में दीक्षांत समारोह में नशे के प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने युवाओं को नशामुक्त रहने और राष्ट्र की उन्नति में योगदान देने का आह्वान किया।

Key Takeaways

  • नशा युवाओं और समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
  • हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू कर रहा है।
  • समाज कल्याण के लिए युवाओं को सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है।
  • महिलाओं की भागीदारी राष्ट्र की प्रगति का प्रतीक है।
  • नशामुक्त परिसर बनाने के लिए जागरूकता फैलाना आवश्यक है।

शिमला, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इसके बाद उन्होंने कांगड़ा में चामुंडा नंदिकेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने हिमाचल प्रदेश को देवभूमि और वीरभूमि के रूप में संदर्भित करते हुए कहा कि इस राज्य ने राष्ट्र के सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने यहां की समृद्ध आतिथ्य सत्कार, जीवंत संस्कृति और चिरस्थायी परंपराओं की सराहना की।

राधाकृष्णन ने भारत की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्र अपने शिक्षकों के ज्ञान और विद्वता के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। इन संस्थानों के गुरु और आचार्य हमेशा से शिक्षार्थी बने रहे हैं जिन्होंने वाद-विवाद, संवाद और शोध के माध्यम से अपने ज्ञान को और बढ़ाया। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने कहा कि आधुनिक विश्वविद्यालयों को संकाय विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए और शिक्षण में नवाचार, अंतःविषयक अनुसंधान और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रभावी ढंग से लागू कर रहा है और भारतीय ज्ञान परंपराओं से संबंधित विषयों को शामिल कर रहा है, जिससे एक नई शिक्षा संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है। राधाकृष्णन ने विश्वविद्यालय द्वारा कई रचनाओं का डोगरी में अनुवाद करने और हिंदी साहित्य का पंजाबी में अनुवाद करने की पहल की सराहना की और इसे स्वदेशी चिंतन का एक नया दृष्टिकोण बताया।

उपराष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त शोध, शिक्षकों की साझा विशेषज्ञता, डिजिटल संसाधनों और अकादमिक आदान-प्रदान के माध्यम से ऐसी साझेदारियां एक समर्पित शिक्षण समुदाय का निर्माण कर सकती हैं, जिससे छात्रों और विद्वानों दोनों को लाभ होगा और एक विकसित भारत के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा प्रणाली का निर्माण होगा।

उन्होंने उल्लेख किया कि स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलें युवा नवप्रवर्तकों के लिए नए रास्ते खोल रही हैं। उन्होंने युवाओं में नवाचार को प्रोत्साहित करने और विश्वविद्यालय की 'कम्युनिटी लैब' पहल की सराहना की, जिसके माध्यम से छात्र और शिक्षक आस-पास के समुदायों से जुड़े रहते हैं, जिससे छात्रों को ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं को समझने में मदद मिलती है।

उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता की शताब्दी तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आवश्यक है कि आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश, तकनीकी उन्नति, पर्यावरणीय स्थिरता और नैतिक नेतृत्व पर जोर दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण को साकार करने में छात्र और युवा सबसे महत्वपूर्ण हितधारक हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना समावेशी विकास पर आधारित होनी चाहिए, जिसमें कोई भी राज्य या समाज का वर्ग पीछे न रह जाए।

उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय द्वारा नशामुक्त परिसर बनाने के लिए की गई पहलों की सराहना की और कहा कि नशा युवाओं, समाज और राष्ट्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने सभी से नशाखोरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। राधाकृष्णन ने युवाओं से समाज कल्याण के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करने, राष्ट्र की उन्नति के लिए जीने और 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत को अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि आज के दीक्षांत समारोह में 700 से अधिक मेधावी छात्रों को उपाधियां और पदक प्रदान किए गए, जिनमें से अधिकांश महिलाएं थीं। उन्होंने कहा कि 32 स्वर्ण पदक विजेताओं में से 23 युवा महिलाएं थीं, और उनकी यह भागीदारी राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं के सशक्तिकरण और योगदान को दर्शाती है।

इस दीक्षांत समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता, कृषि मंत्री चंद्र कुमार, विधानसभा में विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर, सांसद राजीव भारद्वाज और अनुराग सिंह ठाकुर सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

Point of View

बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर है। यह शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही ठीक किया जा सकता है।
NationPress
14/03/2026

Frequently Asked Questions

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने नशे के बारे में क्या कहा?
उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशा युवाओं, समाज और राष्ट्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है और सभी से नशाखोरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आग्रह किया।
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय ने कौन सी नीति लागू की है?
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रभावी ढंग से लागू किया है।
दीक्षांत समारोह में कितने छात्रों को पदक दिए गए?
दीक्षांत समारोह में 700 से अधिक मेधावी छात्रों को उपाधियां और पदक प्रदान किए गए।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से क्या करने को कहा?
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से समाज कल्याण के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करने और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना से जीने का आह्वान किया।
कौन-कौन से गणमान्य व्यक्ति समारोह में उपस्थित थे?
समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, कृषि मंत्री, विधानसभा में विपक्ष के नेता, सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।
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