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भारत की ताकत: विविधता में एकता; उपराष्ट्रपति ने नगालैंड विश्वविद्यालय दीक्षांत में युवाओं से नशामुक्त जीवन का आह्वान किया

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भारत की ताकत: विविधता में एकता; उपराष्ट्रपति ने नगालैंड विश्वविद्यालय दीक्षांत में युवाओं से नशामुक्त जीवन का आह्वान किया

सारांश

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नगालैंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में युवाओं को नशामुक्त जीवन जीने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। यह समारोह पूर्वोत्तर क्षेत्र में शिक्षा और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बातें

नगालैंड विश्वविद्यालय का योगदान उच्च शिक्षा में महत्वपूर्ण है।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं को नशामुक्त जीवन जीने का आह्वान किया।
भारत की विविधता में एकता हमारी ताकत है।
पीएम-देवआईएनई पहल से पूर्वोत्तर के विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता क्षेत्र में शांति और विकास को मजबूत करेगा।

नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 6 मार्च 2026 को नगालैंड के लुमामी परिसर में नगालैंड विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई। यह उनकी पदभार ग्रहण करने के बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहली यात्रा थी, जिसकी शुरुआत नगालैंड से हुई।

समारोह में अपने संबोधन के दौरान उपराष्ट्रपति ने नगालैंड की यात्रा पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने नगालैंड को प्रकृति, संस्कृति और साहस का बेजोड़ संगम बताया और कहा कि राज्य की असली ताकत यहां के लोगों और उनकी जीवंत परंपराओं में निहित है। भारत की विविधता में एकता को राष्ट्रीय शक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की मजबूती मतभेदों में नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाली एकता में निहित है।

उपराष्ट्रपति ने 1994 में नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी से अलग होकर स्थापित नगालैंड विश्वविद्यालय के योगदान की सराहना की। विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार किया है और पूरे पूर्वोत्तर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाई है। उन्होंने कैंसर अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना, स्वदेशी नगा भाषाओं और पारंपरिक कानूनों के संरक्षण और दस्तावेजीकरण जैसे प्रयासों की प्रशंसा की।

स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने उन्हें विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए प्रगति करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से जिम्मेदार जीवन जीने, नशे से दूर रहने और मजबूत राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है, इसलिए ज्ञान और कौशल को निरंतर अपडेट करना आवश्यक है ताकि उभरती चुनौतियों और अवसरों का सामना किया जा सके।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर के विकास पर केंद्र सरकार के विशेष फोकस को रेखांकित किया। उन्होंने पीएम-देवआईएनई (प्रधानमंत्री विकास पहल) का जिक्र किया, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक विकास और आजीविका परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्र में समावेशी प्रगति को बढ़ावा दे रही है। ये पहल युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं।

उन्होंने फरवरी 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र सरकार, नगालैंड सरकार और पूर्वी नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) के बीच हस्ताक्षरित ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते की सराहना की। यह समझौता लंबे समय से चली आ रही चिंताओं का समाधान करेगा और क्षेत्र में शांति व विकास को मजबूत करेगा।

उपराष्ट्रपति ने नगालैंड के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और राज्य सरकार को शांति और विकास के प्रयासों के लिए बधाई दी। उन्होंने पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर में इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभूतपूर्व विकास पर प्रकाश डाला, लेकिन जोर दिया कि सड़कें और पुल क्षेत्रों को जोड़ती हैं, जबकि लोगों के बीच आपसी मेल-जोल राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करता है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने नगालैंड विश्वविद्यालय में एचईएफए फेज II भवनों की आधारशिला भी रखी। समारोह में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, उप मुख्यमंत्री टीआर जेलियांग, कुलाधिपति डॉ. समुद्र गुप्ता कश्यप, कुलपति प्रोफेसर जगदीश कुमार पटनायक सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह कार्यक्रम पूर्वोत्तर में शिक्षा और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि आज की आवश्यकता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति ने युवाओं को क्या संदेश दिया?
उपराष्ट्रपति ने युवाओं को नशामुक्त जीवन जीने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
नगालैंड विश्वविद्यालय की स्थापना कब हुई थी?
नगालैंड विश्वविद्यालय की स्थापना 1994 में नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी से अलग होकर की गई थी।
उपराष्ट्रपति ने किस पहल का जिक्र किया?
उपराष्ट्रपति ने पीएम-देवआईएनई (प्रधानमंत्री विकास पहल) का जिक्र किया, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास को बढ़ावा दे रही है।
राष्ट्र प्रेस
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